बेटे के निधन से टूटे अनिल अग्रवाल, बोले- 75% से ज्यादा संपत्ति समाज को लौटाऊंगा!!
NEWS1UP January 8, 2026 0
बेटे का सपना अधूरा नहीं रहने दूंगा
सेवा ही अब मेरी विरासत: वेदांता चेयरमैन
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भूमेश शर्मा
नई दिल्ली। कुछ दुख ऐसे होते हैं जो शब्दों में नहीं समाते। एक पिता की आंखों से बहता वह मौन, जिसमें जीवन भर की कमाई, उपलब्धियां और शोहरत सब फीकी पड़ जाती हैं। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन और देश के जाने-माने उद्योगपति अनिल अग्रवाल आज ऐसे ही एक असहनीय दर्द से गुजर रहे हैं। बेटे अग्निवेश अग्रवाल के अचानक निधन ने उन्हें और उनके परिवार को भीतर तक तोड़ दिया है। लेकिन इसी गहरे शोक के बीच, उन्होंने इंसानियत और समाज के नाम एक ऐसा संकल्प दोहराया है, जिसने देश का ध्यान खींच लिया है।
अनिल अग्रवाल ने कहा है कि वह अपनी कमाई का 75 फीसदी से अधिक हिस्सा समाज को लौटाएंगे। यह कोई तात्कालिक फैसला नहीं, बल्कि बेटे से किया गया एक वादा है, जिसे अब वह अपने जीवन का उद्देश्य बना चुके हैं।

बेटे से किया वादा, जिसे अब ज़िंदगी का मकसद बनाया
अपने भावुक संदेश में अनिल अग्रवाल ने लिखा कि उन्होंने यह संकल्प अपने बेटे अग्निवेश से किया था। उनका मानना था कि जो कुछ उन्होंने जीवन में पाया है, वह केवल उनका नहीं, बल्कि समाज की अमानत है। बेटे के जाने के बाद यह संकल्प और भी मजबूत हो गया है। उन्होंने कहा कि अब उनकी बाकी जिंदगी इसी उद्देश्य को समर्पित होगी, समाज के लिए, देश के लिए।
49 साल की उम्र में चला गया जीवन का सहारा
अमेरिका में इलाज के दौरान कार्डियक अरेस्ट से 49 वर्षीय अग्निवेश अग्रवाल का निधन हो गया। एक पिता के लिए जवान बेटे को खोने से बड़ा कोई दुख नहीं होता। अनिल अग्रवाल ने स्वीकार किया कि वह और उनकी पत्नी किरण अग्रवाल पूरी तरह टूट चुके हैं। उन्होंने लिखा कि वेदांता में काम करने वाला हर कर्मचारी अब उन्हें अपने बच्चों जैसा लगता है, और शायद इसी भाव ने उन्हें फिर से खड़ा होने की ताकत दी है।
कबाड़ से कारोबार, संघर्ष से साम्राज्य
अनिल अग्रवाल Vedanta Resources के फाउंडर और चेयरमैन हैं। 1954 में बिहार के पटना में जन्मे अग्रवाल ने बहुत कम उम्र में अपने पिता के साथ कबाड़ के काम से शुरुआत की। 19 साल की उम्र में वह मुंबई पहुंचे, जेब में पैसे कम थे, लेकिन हौसले अडिग। कई बार नुकसान हुआ, कई बार असफलताएं मिलीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। यही संघर्ष आगे चलकर वेदांता ग्रुप बना, जो आज मेटल, माइनिंग, पावर और ऑयल जैसे बड़े सेक्टर में भारत और विदेशों में अपनी मजबूत मौजूदगी रखता है।

परिवार, जो अब एक बड़े बदलाव के दौर में है
अनिल अग्रवाल की पत्नी किरण अग्रवाल हमेशा लाइमलाइट से दूर रहीं, लेकिन हर फैसले में उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं। बेटी प्रिया अग्रवाल अब परिवार और बिजनेस की अहम जिम्मेदारी संभाल रही हैं। वह Hindustan Zinc की चेयरपर्सन हैं और ग्रुप के कई रणनीतिक काम देख रही हैं। भाई नवीन अग्रवाल वेदांता ग्रुप के वाइस चेयरमैन हैं।
अग्निवेश: सादगी में नेतृत्व
अग्निवेश अग्रवाल वेदांता की कंपनी Talwandi Sabo Power Limited के बोर्ड में थे और Fujairah Gold जैसी कंपनी की स्थापना कर चुके थे। बड़े उद्योगपति परिवार से होने के बावजूद वह सादा जीवन पसंद करते थे। बिजनेस में उनकी भूमिका अहम थी और उनका असमय जाना परिवार के लिए गहरा आघात बन गया।
कितनी है अनिल अग्रवाल की संपत्ति?
Forbes के मुताबिक, अनिल अग्रवाल और उनके परिवार की कुल नेटवर्थ 4.2 अरब डॉलर, यानी करीब 35,000 करोड़ रुपये है। इस संपत्ति का 75 फीसदी हिस्सा समाज को देने का ऐलान वह पहले ही कर चुके थे, लेकिन बेटे के निधन के बाद उन्होंने इसे और दृढ़ता से दोहराया है।
बेटे के सपनों को जिंदा रखेंगे
अनिल अग्रवाल ने लिखा कि उनका और उनके बेटे का सपना एक था, आत्मनिर्भर भारत। कोई बच्चा भूखा न सोए, हर बच्चा पढ़े, महिलाएं सशक्त हों और युवाओं को रोजगार मिले। उन्होंने कहा, “बेटे के बिना जिंदगी अधूरी है, लेकिन उसके सपने अधूरे नहीं रहेंगे।”
यह कहानी सिर्फ एक उद्योगपति की नहीं है। यह उस पिता की कहानी है, जिसने अपने निजी दुख को समाज की सेवा में बदलने का साहस दिखाया, और शायद यहीं से उसके बेटे की यादें, उसके सपने, और उसकी विरासत आगे चलती रहेंगी।
