गाजियाबाद में हाउस टैक्स पर बढ़ा असमंजस: छूट की तारीख़ बढ़ी, कोर्ट में 19 नवंबर को सुनवाई, जनता अब भी उलझन में!
छूट का छलावा या राहत की कोशिश ?
निगम और याचिकाकर्ताओं में सीधा टकराव
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भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। शहर में हाउस टैक्स को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर नगर निगम ने 20 प्रतिशत छूट की अंतिम तारीख़ 31 अक्टूबर से बढ़ाकर अब 30 नवंबर 2025 कर दी है, तो दूसरी ओर इस पूरे विवाद पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 19 नवंबर को सुनवाई तय की गई है। हालांकि अब तक कितने करदाताओं ने टैक्स जमा किया है और कुल कितनी राशि निगम के खाते में आई है, इसका कोई स्पष्ट डेटा नहीं मिल पाया है, और न ही याचिकाकर्ताओं के दावे पर अंतिम मुहर लग पाई है।
जनता में गहराता भ्रम
हाउस टैक्स की बढ़ी हुई दरों को लेकर शहरवासी इस वक्त असमंजस में हैं। लोग समझ नहीं पा रहे कि उन्हें बढ़ी दरों पर टैक्स देना चाहिए या पुरानी दरों पर टिके रहना चाहिए। एक तरफ़ नगर निगम लगातार छूट की तारीख़ें बढ़ाकर राहत देने का संदेश दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ़ न्यायालय में सुनवाई टलने से मामला उलझता जा रहा है। हालाँकि बेतहाशा टैक्स बढाकर दी गयी छूट लोगों को ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसा दिख रही है।
महापौर ने कहा: जनता को राहत देना प्राथमिकता

गाजियाबाद की महापौर सुनीता दयाल ने स्पष्ट कहा कि नगर निगम जनता को राहत देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा,
“हमने लोगों की सुविधा के लिए 20 प्रतिशत छूट की तारीख़ 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी है। हमारा मक़सद जनता को राहत देना है, लेकिन कुछ लोग जनता को गुमराह कर रहे हैं।”
जब उनसे यह पूछा गया कि जून की बोर्ड बैठक में तो उन्होंने खुद कहा था कि टैक्स पुरानी दरों पर ही लिया जाएगा, तो महापौर ने टालते हुए कहा,
“अब पुरानी बातें छोड़िए, हम टैक्स को कम कर जनता को राहत देना चाहते हैं।”
याचिकाकर्ता बोले: निगम का ‘छूट ऑफर’ छलावा

वहीं दूसरी ओर याचिकाकर्ता टीम के सदस्य और भाजपा के पूर्व पार्षद हिमांशु मित्तल ने निगम पर तीखा हमला बोला।
“निगम का 20 प्रतिशत छूट का दावा महज़ एक छलावा है। निगम ही मामले को कोर्ट में लटकाए हुए है,”
उन्होंने कहा- निगम ने अब कोर्ट में 30 जून की बोर्ड बैठक के मिनिट्स दाखिल कर दिए हैं और उन्हें उम्मीद है कि अदालत से जनता को राहत मिलेगी।
मित्तल का आरोप है कि टैक्स में 300 से 400 गुना बढ़ोतरी पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा,
“निगम का यह तर्क गलत है कि टैक्स दरों पर साल 2021 से अभ्यास चल रहा था। 2023 में महज़ 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। किराया दर बढ़ाने का अधिकार बोर्ड को है, न कि किसी व्यक्ति विशेष को।”
मित्तल ने यह भी कहा कि निगम पुराने और नए करदाताओं से अलग-अलग दरों पर टैक्स वसूल रहा है, जो कानून के खिलाफ है।
संघर्ष समिति की चेतावनी: सड़क से कोर्ट तक लड़ाई जारी

ग़ाज़ियाबाद संघर्ष समिति के सदस्य अजय टंडन ने कहा कि बढ़ी हुई टैक्स दरें जनभावनाओं के विरुद्ध हैं।
“हम इस अन्यायपूर्ण टैक्स वृद्धि को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई जारी रहेगी,”
टंडन के अनुसार आंदोलन को और मज़बूत करने की रणनीति बनाई जा रही है। जल्द ही जन जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को आंदोलन से जोड़ा जायेगा।
निगम चाहे तो अभी समाधान संभव: कानूनी विशेषज्ञ

कानूनी मामलों के जानकार एडवोकेट गजेंद्र सिंह आर्य का मानना है कि मामला भले ही न्यायालय में लंबित हो, लेकिन यदि नगर निगम चाहे तो जनता के हित में अपनी भूल को सुधार करते हुए कोई ठोस निर्णय लेकर इस भ्रम की स्थिति को खत्म कर सकता है।
राजनीति की गूंज भी तेज़
ग़ाज़ियाबाद में हाउस टैक्स का यह मुद्दा अब सिर्फ प्रशासनिक नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। वर्ष 2027 की शुरुआत में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि जून की बोर्ड बैठक में मौजूद वे जनप्रतिनिधि, जिन्होंने तब जनता को राहत देने की बात कही थी, अब क्या रुख अपनाते हैं।
फिलहाल पूरा शहर एक सवाल पूछ रहा है, “टैक्स दे या रुके ?” निगम छूट बढ़ाकर राहत देने का दावा कर रहा है, जबकि कोर्ट में मामले की पेचिदगियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। जनता, याचिकाकर्ता और निगम, तीनों के अपने तर्क हैं, पर सच्चाई यह है कि शहर का टैक्स संकट अब भी ‘जस का तस‘ है।

सोसायटियों का बहुत बुरा हाल है जहां बिल्डर है वहां भी निवासियों की सुनवाई नहीं है एवं जहां ऐ ओ ऐ वहां भी नहीं ।
गाजियाबाद नगर निगम का हाइकोर्ट में केस नंबर क्या है मेरा नंबर 9810649905 है इस पर सूचित करें