फिर से जी उठेगी हिंडन: ‘आयरन मैन’ IAS अभिनव गोपाल की पहल से शुरू होगी हिंडन यात्रा!

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हिंडन हमारी जिम्मेदारी है 

अभिनव गोपाल की ‘हिंडन यात्रा’ बनेगी जनजागरूकता का प्रतीक

NEW1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद। हिंडन नदी जो  सहारनपुर जिले में शाकुंभरी देवी रेंज  हिमालय की ऊपरी शिवालिक तलहटी से निकलती है और नोएडा में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के पास यमुना नदी में गिरती है। एक दशक पहले जब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने हिंडन नदी को डेड रिवर घोषित किया था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह नदी फिर कभी सांस ले सकेगी। पर अब हालात बदल रहे हैं, और इस बदलाव की अगुवाई कर रहे हैं गाज़ियाबाद के मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल, जिन्हें प्रशासनिक जगत में उनके दृढ़ इरादों और धरातल पर काम करने के जज़्बे के लिए लोग “आयरन मैन आईएएस” कहने लगे हैं।

अब हिंडन फिर से जीवंत होने की राह पर है, और इस दिशा में गाज़ियाबाद प्रशासन ने एक अनोखी पहल की है, हिंडन यात्रा। यह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज, सरकार और संवेदना को जोड़ने वाला आंदोलन बनने जा रहा है।

हम चाहते हैं कि लोग हिंडन को ‘मरी हुई नदी’ नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में देखें: अभिनव गोपाल

बीते सोमवार को हुई जिला स्तरीय बैठक में जब मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल ने हिंडन यात्रा की रूपरेखा रखी, तो उनके शब्दों में न केवल प्रशासनिक गंभीरता, बल्कि एक भावनात्मक संकल्प भी झलक रहा था।
उन्होंने कहा,

“हमारा उद्देश्य केवल नदी की सफाई नहीं, बल्कि समाज को यह एहसास कराना है कि नदी हमारे जीवन का हिस्सा है। हिंडन को बचाने के लिए जनता, उद्योग और प्रशासन, तीनों को एकजुट होना होगा”

NEWS1UP से बातचीत में यूपी कैडर के 2020 बैच के आईएएस अफसर अभिनव गोपाल ने कहा कि “हिंडन को बचाने का विचार मेरे मन में बहुत पहले से आकार ले चुका था। अब समय आ गया है कि इस विचार को एक सामूहिक अभियान का रूप दिया जाए।” उन्होंने बताया कि ‘हिंडन यात्रा’ लगभग एक महीने तक चलने वाला जनआंदोलन होगा, जिसमें स्कूली बच्चे, ग्राम प्रधान, वकील, उद्योग जगत से जुड़े लोग और आरडब्लूए, एओए, सामाजिक संगठन सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। यात्रा प्रतिदिन करीब पांच किलोमीटर का सफर तय करेगी और हर पड़ाव पर लोगों को हिंडन की स्थिति और उसकी सुरक्षा के महत्व से जोड़ा जाएगा।

अभिनव आगे कहते हैं, “हमारा मकसद सिर्फ नदी की सफाई नहीं, बल्कि लोगों के मन में यह भाव जगाना है कि हिंडन हमारी अपनी जिम्मेदारी है।” पर्यावरण के प्रति समाज की लापरवाही उन्हें गहराई से विचलित करती है। वे कहते हैं, “हम यात्रा के माध्यम से लोगों को यह भी समझाएंगे कि पानी का सही इस्तेमाल कैसे किया जाए, प्लास्टिक से परहेज क्यों ज़रूरी है और कूड़ा-कचरा सही जगह डालना कितना आवश्यक है।” उनके शब्दों में, यह यात्रा केवल एक अभियान नहीं, बल्कि नदी और समाज के बीच एक नई संवेदनशीलता जगाने की पहल है।

हरियाली और स्वच्छता की डबल मुहिम

इस बैठक में वृक्षारोपण समिति, गंगा समिति और पर्यावरण समिति के सदस्य मौजूद थे। निर्णय हुआ कि वृक्षारोपण और नदी पुनर्जीवन की योजनाओं को साथ लेकर चला जाएगा। अभिनव गोपाल ने निर्देश दिया कि हिंडन के किनारों पर हरियाली की नई परत चढ़ाई जाए, ताकि नदी के पास का पारिस्थितिक संतुलन फिर से मजबूत हो सके।

प्रदूषण की परतें खोलने की तैयारी

अभियान की वैज्ञानिक बुनियाद भी मज़बूत रखी जा रही है। पर्यावरण विभाग को आदेश दिया गया है कि मातौर गांव से नदी की प्रविष्टि बिंदु तक नियमित सैंपलिंग की जाए और जैविक ऑक्सीजन मांग (BOD)  व रासायनिक ऑक्सीजन मांग (COD) स्तरों की निगरानी से यह पता लगाया जाए कि किन हिस्सों में प्रदूषण सबसे अधिक है। साथ ही, मुुरादनगर के माकरैड़ा नाले में बायोरिमेडिएशन और फाइटोरिमेडिएशन तकनीक लागू करने की प्रक्रिया भी शुरू हो रही है, यह वही तकनीक है जो बिना केमिकल के प्राकृतिक तरीके से पानी को शुद्ध करती है।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की सख्ती और उम्मीदों की किरण

हिंडन पुनर्जीवन की दिशा में यह पहल तब आ रही है जब राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) पहले ही राज्य सरकार की कार्रवाइयों से असंतुष्टता जता चुका है। 2015 में नदी को “डेड” घोषित किया गया था क्योंकि उसमें जीवन बचाने लायक ऑक्सीजन तक नहीं बची थी। लेकिन 2022 में दाखिल याचिका के बाद से अब तक गाज़ियाबाद प्रशासन ने जो ज़मीनी सुधार दिखाए हैं, वे एक नई उम्मीद जगा रहे हैं।

गांवों से लेकर उद्योगों तक फैलेगी जिम्मेदारी

अभिनव गोपाल के नेतृत्व में “हिंडन यात्रा” में सिर्फ अधिकारी नहीं, बल्कि ग्राम प्रधानों, उद्योग प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को भी जोड़ा जा रहा है।
डिस्ट्रिक्ट पब्लिक रिलेशन ऑफिसर जाहिद हुसैन के मुताबिक-

“मुरादनगर में नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) लगाया जा रहा है, जिससे नदी में बिना उपचारित गंदे पानी का प्रवाह काफी घटेगा। यात्रा के दौरान ग्राम प्रधानों को प्रेरित किया जाएगा कि गांवों से आने वाला अपशिष्ट नदी में मिलने से पहले उपचारित हो”

प्रशासन से आगे, समाज के भीतर

अभिनव गोपाल की यह पहल इस मायने में खास है कि वे सिर्फ फाइलों पर योजनाएँ नहीं बनाते, बल्कि खुद मौके पर उतरकर देखना पसंद करते हैं। गाजियाबाद में स्वच्छता, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई अभियानों में उनकी ग्राउंड लेवल एक्टिव लीडरशिपने उन्हें जनता और अधिकारियों, दोनों के बीच प्रेरक व्यक्तित्व बना दिया है।

उनके करीबी अधिकारी के शब्दों में-

“सर ने हिंडन को केवल नदी नहीं, बल्कि समाज की संवेदना माना है। वे चाहते हैं कि यह यात्रा एक आंदोलन बने, जहां हर व्यक्ति को महसूस हो कि वह खुद नदी का प्रहरी है”

 हिंडन यात्रा: प्रतीक नहीं, परिवर्तन की शुरुआत

गाजियाबाद प्रशासन का यह प्रयास यह दिखाता है कि जब एक ईमानदार नेतृत्व के साथ समाज जुड़ता है, तो “डेड रिवर” भी फिर से लिविंग बन सकती है। हिंडन यात्रा आने वाले दिनों में न केवल प्रदूषण पर वार करेगी, बल्कि यह संदेश भी देगी कि “जब इच्छा शक्ति प्रशासनिक ईमानदारी से मिलती है, तो प्रकृति भी जवाब देती है।” और शायद इस बार हिंडन फिर से बहना सीखेगी, क्योंकि अब उसकी धार में है एक ‘आयरन मैन’ का जज़्बा।

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