ड्यूटी और श्रद्धा के बीच थमती सांसें: दो दिल, दो जगह, एक ही त्रासदी!!
कर्तव्य और भक्ति दोनों ही सम्मान के पात्र हैं,
और जब इन रास्तों पर चलते हुए किसी की सांसें थम जाती हैं, तो सिर्फ एक व्यक्ति नहीं जाता,
उसके साथ एक परिवार, कई सपने और अनगिनत यादें भी खामोश हो जाते हैं।
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
बदायूं/हरिद्वार। सोमवार का दिन बदायूं के सिविल लाइंस स्थित पोस्टमार्टम हाउस में आम दिनों जैसा ही शुरू हुआ था। पुलिस की औपचारिकताएं, कागज़ी कार्रवाई और एक किशोरी के शव का पोस्टमार्टम, सब कुछ रोज़मर्रा की व्यवस्था का हिस्सा था। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि कानून की सेवा में खड़े एक जिम्मेदार कंधे के ठीक निचे लगे दिल की धड़कनें यहीं अचानक थम जाएंगी।
55 वर्षीय सब-इंस्पेक्टर कुंवरपाल, जो मूल रूप से बुलंदशहर जनपद के नरौरा के निवासी थे और वर्तमान में संभल के चंदौसी में रह रहे थे, ड्यूटी निभाने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करते समय अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। सीने में तेज दर्द उठा, चक्कर आया और देखते ही देखते वह वहीं गिर पड़े। पल भर में वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बिना देर किए CPR दिया, उम्मीद थी कि शायद जिंदगी लौट आए। लेकिन हालात बिगड़ते देख उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस उपाधीक्षक देवेन्द्र सिंह ने बताया कि-
कुंवरपाल पूरी तरह ड्यूटी पर थे और अचानक आया हार्ट अटैक उनकी मौत का कारण बना। सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। परिवार को खबर दे दी गई है, जो बदायूं के लिए रवाना हो चुका है।
एक ओर कानून की सेवा में लगा एक सिपाही यूं चला गया, तो दूसरी ओर श्रद्धा और आस्था के बीच भी मौत ने दस्तक दी!!
हरकी पैड़ी पर आरती के बीच बुझ गया जीवन का दीप
गौरतलब है कि दो दिन पहले हरिद्वार के हरकी पैड़ी पर गंगा आरती का दृश्य था, घंटियों की आवाज़, दीपों की रोशनी और भक्ति में डूबे सैकड़ों श्रद्धालु। इसी पवित्र वातावरण में गुजरात के सोमनाथ स्थित बेरावल निवासी जगदीश भाई गोकाणी अपने परिजनों के साथ गंगा स्नान और आरती में शामिल थे। अचानक आरती के दौरान उन्हें हार्ट अटैक आ गया और वे वहीं अचेत होकर गिर पड़े।

सूचना मिलते ही हरकी पैड़ी चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद जगदीश भाई को बचाया नहीं जा सका। श्रद्धा के दीपों के बीच एक परिवार की खुशियां बुझ गईं।
ये दोनों घटनाएं अलग-अलग जगहों की हैं, लेकिन दर्द एक जैसा है। एक ने वर्दी पहनकर कर्तव्य निभाते हुए आखिरी सांस ली, तो दूसरे ने ईश्वर के चरणों में श्रद्धा अर्पित करते हुए। अचानक थमते दिल, पीछे छूटते परिवार और सवालों से भरा सन्नाटा, ये घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि जिंदगी कितनी नश्वर है।
