17 वर्षीय रिया की जान बचाने दिल्ली पहुँचे गाजियाबाद के बुलंद त्यागी और करण बेगवानी!
व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए गाजियाबाद के युवा बन रहे हैं जीवनदाता

NEWS1UP
विशेष संवाददाता
गाजियाबाद। आज की भागदौड़ और कमर्शियल ज़िंदगी में जहाँ मानवीय संवेदनाएँ धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं, वहीं गाजियाबाद के कुछ युवाओं ने अपने छोटे से प्रयास से मानवता की नई मिसाल कायम की है। “रक्तदान महादान” नामक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से ये युवा जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्तदाता बनकर अस्पतालों में जीवनदान दे रहे हैं।
मंगलवार, 11 नवंबर को इस ग्रुप से जुड़े दो युवा, 24 वर्षीय बुलंद त्यागी और करण बेगवानी ने दिल्ली के गंगाराम अस्पताल पहुँचकर 17 वर्षीय रिया नाम की एक लड़की को रक्त और प्लाज़्मा दान कर उसकी जान बचाई। रिया बिहार की रहने वाली है और वह गंगाराम अस्पताल में रक्त संक्रमण का इलाज करवाने आई थी। जब अचानक रक्त की कमी के कारण स्थिति गंभीर हो गई, तो उसके पिता संजय कुमार ने मदद के लिए “रक्तदान महादान” ग्रुप से संपर्क किया। कुछ ही घंटों में बुलंद और करण ने बिना किसी स्वार्थ के दिल्ली पहुँचकर रक्तदान किया।

लड़की के भावुक पिता संजय कुमार ने कहा-
“मैं इन दोनों युवाओं का दिल से आभारी हूँ। ये हमारे लिए भगवान से कम नहीं हैं। मेरी बेटी की ज़िंदगी अब फिर से मुस्कुरा रही है। मैं इन युवाओं की दीर्घायु की कामना करता हूँ।”
महामानवता की मिसाल बना “रक्तदान महादान”
इस प्रेरणादायक पहल की शुरुआत वर्ष 2020 में दीपांशु मित्तल नामक युवा ने की थी। कोविड काल में जब ब्लड बैंक खाली हो रहे थे और निजी अस्पताल रक्त के अभाव में मरीजों को भर्ती करने से मना कर रहे थे, तब दीपांशु ने महसूस किया कि आपातकाल में जरूरतमंदों को रक्त उपलब्ध कराना कितना मुश्किल होता है।
इसी सोच से उन्होंने “रक्तदान महादान” नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया, जिसमें अब लगभग 800 से अधिक वॉलंटियर्स जुड़े हुए हैं। यह सभी लोग समय-समय पर जरूरत पड़ने पर सीधे अस्पताल जाकर रक्तदान करते हैं और अब तक सैकड़ों लोगों की जान बचा चुके हैं।
ग्रुप के संस्थापक दीपांशु मित्तल कहते हैं-

“रक्त का कोई विकल्प नहीं होता। अगर हम सब मिलकर अपने शहर या मोहल्ले में ऐसे ग्रुप बनाएं, तो कई जानें बचाई जा सकती हैं। हमारी कोशिश है कि कोई भी व्यक्ति रक्त की कमी से अपनी जान न गंवाए।”
निजी अस्पतालों की ‘ब्लड डोनर’ मांग से बढ़ी चुनौती
वर्तमान में कई निजी अस्पताल ब्लड बैंक से रक्त लेने में हिचकिचा रहे हैं और मरीज के परिजनों से स्वयं डोनर लाने की मांग करते हैं। ऐसे में किसी विशेष रक्त समूह के डोनर को तुरंत ढूँढ पाना मरीज के परिवार के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है।
इसी स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए रक्तदाता करण बेगवानी कहते हैं-
“कई बार लोगों के जानने वालों में सही ब्लड ग्रुप नहीं मिलता, ऐसे में व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म बहुत काम आते हैं। जब हमें रिया के पिता का मैसेज मिला, तो हम तुरंत दिल्ली के लिए रवाना हो गए।”
वहीं बुलंद त्यागी ने कहा-
“रक्तदान एक ऐसा कार्य है जिसमें हम बिना कुछ खोए किसी की ज़िंदगी लौटा सकते हैं। यह एहसास शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।”
मानवता की एक मिसाल
“रक्तदान महादान” ग्रुप की यह पहल आज गाजियाबाद ही नहीं, बल्कि पूरे दिल्ली-एनसीआर में इंसानियत का संदेश फैला रही है। दीपांशु और उनकी टीम के युवा किसी पुरस्कार या सम्मान की चाह नहीं रखते, उनका मकसद केवल एक है: “हर ज़रूरतमंद तक रक्त पहुँचाना।”
दीपांशु मित्तल ने आगे कहा-
“हम चाहते हैं कि हर शहर, हर मोहल्ले में ऐसा एक ग्रुप बने, यह समाज की सबसे बड़ी सेवा है। हम सब मिलकर किसी का आज नहीं, बल्कि उसका पूरा भविष्य बचा सकते हैं।”
रक्तदान वास्तव में महादान है, और इन युवाओं की यह पहल इस बात का सजीव प्रमाण है कि जब इरादे नेक हों तो तकनीक भी इंसानियत की सेवा में एक मजबूत माध्यम बन सकती है।

आप सभी का तह दिल से धन्यवाद l You guys are doing Best. I do not have any words. Thank you so much for your tremendous support.