अब ट्रैक होगा हर क्लिक! यूपी में योगी के साइबर कमांडो तैनात!!
एसपीजी-एनएसजी पैटर्न पर तैयार विशेष टीम
आईआईटी और रक्षा विश्वविद्यालयों से ली गई अत्याधुनिक ट्रेनिंग
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
लखनऊ। डिजिटल दुनिया में बढ़ते अपराधों के खिलाफ योगी सरकार ने वह कदम उठाया है, जिसकी लंबे समय से ज़रूरत महसूस की जा रही थी। साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड, डेटा चोरी और डिजिटल ब्लैकमेलिंग जैसे अपराधों की कमर तोड़ने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने “साइबर कमांडो” नाम से एक विशेष और अत्याधुनिक टीम तैयार की है। यह टीम न केवल तकनीकी रूप से दक्ष है, बल्कि इसकी संरचना और प्रशिक्षण देश के सबसे विशिष्ट सुरक्षा बलों, एसपीजी और एनएसजी की तर्ज पर किया गया है।
जिस तरह एनएसजी और एसपीजी देश की भौतिक सुरक्षा के अभेद्य कवच हैं, उसी तरह ये साइबर कमांडो अब प्रदेश की डिजिटल सुरक्षा की पहली और सबसे मज़बूत दीवार बनकर उभरे हैं।
मुख्यमंत्री की मंशा, डिजिटल सुरक्षा का संकल्प

साइबर/सीआईडी डीजी बिनोद कुमार सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में साइबर अपराधों पर प्रभावी और निर्णायक अंकुश लगाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। इसी क्रम में पुलिस को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने और साइबर अपराधियों के पूरे नेक्सस को ध्वस्त करने के उद्देश्य से इस विशेष टीम का गठन किया गया।
पहले चरण में 15 चयनित पुलिसकर्मियों को साइबर कमांडो के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। इनका चयन तकनीकी दक्षता, विश्लेषण क्षमता और फील्ड अनुभव के आधार पर किया गया, ताकि ये केवल प्रतिक्रिया देने वाली नहीं, बल्कि पूर्व-निवारक (Preventive) भूमिका भी निभा सकें।

आईआईटी से लेकर राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय तक, देश के शीर्ष संस्थानों की ट्रेनिंग
इन साइबर कमांडो को तैयार करने में देश के प्रतिष्ठित तकनीकी और सुरक्षा संस्थानों की विशेषज्ञता ली गई है।
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आईआईटी कानपुर
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आईआईटी नया रायपुर
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आईआईटी मद्रास
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राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू), गुजरात
इसके अलावा राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU), गुजरात और नई दिल्ली से भी साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल ट्रेसिंग, ऑनलाइन लेन-देन की जांच और एडवांस्ड साइबर इन्वेस्टिगेशन तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। यह प्रशिक्षण केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि रीयल-टाइम साइबर अटैक सिमुलेशन, लाइव केस स्टडी और डिजिटल क्राइम नेटवर्क एनालिसिस पर आधारित रहा।
जोन और मुख्यालय पर तैनाती, ज़मीनी पुलिस को भी बना रहे साइबर सक्षम
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद साइबर कमांडो को पुलिस जोन और मुख्यालय स्तर पर तैनात किया गया है, ताकि किसी भी साइबर अपराध की सूचना मिलते ही त्वरित और तकनीकी रूप से सक्षम कार्रवाई हो सके। इतना ही नहीं, ये साइबर कमांडो अब जिला और थाने स्तर के पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं। इसका उद्देश्य है कि साइबर अपराध की पहचान, प्राथमिक जांच और डिजिटल साक्ष्य संकलन की क्षमता जमीनी स्तर तक पहुंचे और पूरे प्रदेश में साइबर सुरक्षा का मजबूत नेटवर्क तैयार हो।
हाईटेक टूल्स से लैस, अपराधियों के डिजिटल फुटप्रिंट पर सीधी नज़र
योगी सरकार ने साइबर कमांडो को अत्याधुनिक संसाधनों से भी लैस किया है, जिनमें एडवांस्ड साइबर सॉफ्टवेयर, डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स, डेटा एनालिटिक्स सिस्टम और रियल-टाइम मॉनिटरिंग तकनीक शामिल हैं। इन टूल्स की मदद से साइबर अपराधियों के डिजिटल फुटप्रिंट, ऑनलाइन लेन-देन, सोशल मीडिया गतिविधियों और इंटरनेशनल साइबर रैकेट्स तक पहुंचना आसान होगा। फिशिंग, ऑनलाइन ठगी, डेटा चोरी और साइबर हमलों के मामलों में अब अपराधियों के लिए बच निकलना आसान नहीं रहेगा।
डिजिटल दौर में कानून-व्यवस्था का नया चेहरा
योगी सरकार का स्पष्ट मानना है कि आज कानून-व्यवस्था केवल सड़क और गली तक सीमित नहीं रह गई है। अपराधी अब मोबाइल, लैपटॉप और सोशल मीडिया के ज़रिए आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पुलिस को भी उतना ही डिजिटल, तेज़ और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना समय की मांग है।
