बुलंदशहर। जिले के चोला थाना क्षेत्र के खानपुर गांव में आयोजित एक शादी समारोह में हर्ष फायरिंग के दौरान हुई लापरवाही ने खुशियों को गम में बदल दिया। लाइसेंसी पिस्टल से की गई फायरिंग में भाजपा कार्यकर्ता धर्मेंद्र भाटी को गोली लग गई। उन्हें तुरंत नोएडा के अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कैसे हुआ हादसा ?
जानकारी के अनुसार, ककोड़ थाना क्षेत्र के अजय नगर निवासी शिवम की बारात 27 नवंबर की रात खानपुर गांव पहुंची थी। बारात की रस्में चल रही थीं और दूल्हा बाढ़ौती की रस्म के लिए दरवाजे पर पहुँचा ही था कि इसी दौरान लड़की पक्ष की ओर से मौजूद सुग्रीव सोलंकी ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से हर्ष फायरिंग करने की कोशिश की।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुग्रीव ने कई बार ट्रिगर दबाया, लेकिन पिस्टल नहीं चली। इसके बाद उसने जबरन फायर करवाने की कोशिश की, तभी अचानक गोली चल गई। उसी समय, सामने कुर्सी पर बैठे भाजपा कार्यकर्ता धर्मेंद्र भाटी की छाती में गोली जा लगी।
गोली लगते ही मचा हड़कंप
गोली लगते ही समारोह में अफरातफरी मच गई। धर्मेंद्र भाटी को तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पुलिस जांच में जुटी
अपर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शंकर प्रसाद और चोला थाना प्रभारी बलराम सिंह सेंगर भी मौके पर पहुंचे। थाना प्रभारी ने बताया कि अभी तक कोई तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। तहरीर मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आरोपी सुग्रीव सोलंकी की पहचान कर ली है और उससे संबंधित साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं।
लगातार बढ़ रही हर्ष फायरिंग की घटनाएँ
हर्ष फायरिंग की फाइल फोटो
प्रदेश में प्रशासन की सख्ती और जागरूकता अभियान के बावजूद हर्ष फायरिंग की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रहीं। कुछ दिनों पहले मेरठ में चढ़त के दौरान हुई हर्ष फायरिंग में छत पर बैठी एक लड़की की जान चली गई थी, और अब बुलंदशहर में भाजपा नेता की मौत ने फिर से इस अमानवीय और खतरनाक प्रथा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
समाज और प्रशासन के लिए कड़ा सवाल
शादी-ब्याह जैसे शुभ अवसर पर ‘जश्न’ के नाम पर की जाने वाली इस गैरकानूनी और लापरवाह हरकत ने एक और परिवार को तबाह कर दिया। बावजूद इसके, समाज में हर्ष फायरिंग को लेकर जागरूकता की कमी और कानून के प्रति लापरवाही लगातार ऐसे हादसों को जन्म दे रही है।
विवाह का उत्सव मातम में बदल गया और एक परिवार का सहारा हमेशा के लिए छिन गया। यह घटना न केवल प्रशासन की कमियों को उजागर करती है, बल्कि समाज के उस क्रूर और गैरजिम्मेदार पहलू को भी सामने लाती है जिसे अब सख्ती से रोकने की जरूरत है।