February 12, 2026

आसमान का शेर… धरती की गोद में सो गया: विंग कमांडर नमंश स्याल को अश्रुपूर्ण विदाई

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कांगड़ा का बेटा पंचतत्व में विलीन

पूरे सैन्य सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

शहीद की मासूम बेटी को संभालती विंग कमांडर पत्नी

NEWS1UP

संवाददाता

कांगड़ा (हिमाचल)। दुबई एयरशो में क्रैश हुए स्वदेशी फाइटर जेट तेजस के पायलट विंग कमांडर नमंश स्याल का पार्थिव शरीर रविवार दोपहर जब विशेष सैन्य विमान से हिमाचल पहुंचा, तो गग्गल एयरपोर्ट से लेकर उनके पैतृक गांव पटियालकर तक हर आंख नम थी, हर कदम भारी था।
देश के इस होनहार एयरोबेटिक पायलट ने भले ही अंतिम उड़ान दुबई की धरती पर भरी हो, लेकिन उनका सफर अपने मिट्टी की गोद में पूरे सैन्य सम्मान के साथ आकर समाप्त हुआ।

गांव में पसरा मातम, वतन के सपूत का अंतिम सफर

नमांश स्याल की पार्थिव देह जैसे ही गांव पहुंची, वातावरण करुण क्रंदन से भर गया। मां का बेज़ोर विलाप, पिता की टूटी हुई आवाज़ें, पत्नी की आंखों में दर्द और सात साल की मासूम बेटी की अनजान पुकार, हर किसी का दिल चीर रही थी।गांव के लोग, बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं… सभी रास्ते में खड़े होकर अंतिम दर्शन कर रहे थे। किसी के होंठों पर सिर्फ एक ही शब्द, “हमने अपना बेटा खो दिया… देश ने अपना एक वीर”

उनके चचेरे भाई निशांत ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान वायुसेना के अधिकारियों की आंखें भी नम थीं, क्योंकि वे सिर्फ एक अधिकारी को नहीं, एक साथी, एक दोस्त, एक योद्धा को विदा कर रहे थे।

पत्नी भी विंग कमांडर: सलामी देते ही ढह गई हिम्मत

शहीद पायलट नमांश की पत्नी अफशां, पत्नी को आखिरी सैल्यूट करते ही फूट-फूट कर रोने लगीं

नमांश की पत्नी विंग कमांडर अफशां जो खुद वायुसेना में उच्च पद पर हैं। पति की पार्थिव देह के सामने खड़े होकर सलामी तो दे पाईं, पर अगले ही पल बिखर गईं। वह जानती हैं कि यूनिफॉर्म की शपथ क्या मतलब रखती है… मगर आज वो सिर्फ एक पत्नी थीं, जिसने अपने जीवनसाथी को खो दिया।

सात साल की उनकी मासूम बेटी अभी समझ भी नहीं पा रही है कि पापा की यह नींद अब कभी नहीं खुलेगी। उसकी मासूम निगाहें सबके चेहरे पर एक ही सवाल ढूंढ रही थीं, पापा कब आएंगे…?

ये सिर्फ मेरा नहीं, देश का नुकसान है: पिता की टूटती आवाज़

रोते-बिलखते मां-पिता और अन्य परिजन

शहीद पायलट के पिता, शिक्षक गगन कुमार ने भर्राए स्वर में कहा, “मैंने अपना बेटा खोया है… और देश ने एक जवान। नमांश एक होनहार एयरोबेटिक पायलट था। देश में ऐसे चार ही पायलट थे… उसका जाना बहुत बड़ा नुकसान है।” गांव में सन्नाटा पसरा है, हर चेहरे पर शोक है, और हर आंख में गर्व… कि उनके गांव ने देश को इतना बहादुर सपूत दिया।

दुबई एयरशो की वह आखिरी उड़ान

शुक्रवार को दुबई एयरशो में फ्लाइंग डिस्प्ले के दौरान तेजस विमान अचानक नियंत्रण खो बैठा और जमीन से टकरा गया। हादसा इतना भीषण था कि विंग कमांडर नमंश स्याल को गंभीर चोटें आईं और उन्होंने अंतिम सांस ले ली। भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान सहित भारतीय सशस्त्र बलों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। वायुसेना ने इस क्षति को “अपूरणीय” बताया है।

एक एयरोबेटिक पायलट: जो जोखिम को मुस्कुराकर चुनौती देता था

नमंश सिर्फ एक पायलट नहीं थे। वे उन चुनिंदा भारतीय पायलटों में से थे जो तेजस जैसे हल्के लड़ाकू विमान में एयरोबेटिक स्टंट करते थे। हर फ्लाइंग डिस्प्ले में उनकी मुस्कान, उनकी पकड़, उनकी क्षमता दुनिया को भारत की शक्ति दिखाती थी। लेकिन इस बार उनकी उड़ान अमर हो गई…और वे इतिहास में दर्ज हो गए, एक ऐसे वीर के रूप में, जिसने उड़ान भरते-भरते वतन के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए।

तेरा कर्ज चुकाना मुश्किल है, वीर…

कांगड़ा स्थित शहीद पायलट के गांव में उनका घर

आज पटियालकर गांव की मिट्टी ने अपने लाल को अपने भीतर समा लिया है। पर उनकी शहादत, उनकी बहादुरी, उनका साहस… सदियों तक गूंजेगा।

देश आज नमंश स्याल को सलाम करता है, एक वीर पायलट, एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी, एक स्नेही पिता, एक जांबाज़ बेटा। “जय हिंद… शहीद नमंश स्याल अमर रहें।”

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