महागुनपुरम में दूषित पानी: भागीरथी टावर का सैंपल पॉजिटिव, निवासियों में बढ़ी चिंता!
स्वास्थ्य विभाग ने नोटिस तो जारी किए, पर लोग बोले, सिर्फ खानापूर्ति नहीं चलेगी!
NEWS1UP
विशेष संवाददाता
गाज़ियाबाद। एनएच-9 की चर्चित सोसाइटी महागुनपुरम एक बार फिर दूषित पानी की वजह से सुर्खियों में है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच के लिए भेजे गए सात पानी के सैंपलों में से एक सैंपल पॉजिटिव पाया गया है, और वह सैंपल भागीरथी टावर से लिया गया था, जहाँ से सबसे अधिक लोगों के बीमार होने की शिकायतें मिली थीं।
रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सोसाइटी मैनेजमेंट और मेंटेनेंस कंपनी को नोटिस जारी किए हैं तथा जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं। लेकिन निवासियों का आरोप है कि यह कार्रवाई सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहेगी, जैसा कि 2021 में हुआ था, जब शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था।
निवासियों का आक्रोश: नोटिस नहीं, कार्रवाई चाहिए
सोसाइटी के निवासियों ने बताया कि दूषित पानी की शिकायतें पिछले कई दिनों से की जा रही थीं। उन्होंने समय रहते एओए (अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन) को सतर्क करने और वैकल्पिक स्वच्छ जल की व्यवस्था करने को कहा था, परंतु कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। इस लापरवाही का परिणाम यह हुआ कि कई लोग पेट दर्द, उल्टी और संक्रमण जैसी बीमारियों की चपेट में आ गए।
एक स्थानीय निवासी ने बताया-
“हमने जब पहली बार शिकायत की थी, तब किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब जब लोग बीमार पड़ गए हैं, तब नोटिस की औपचारिकता शुरू हुई है। क्या हमारी सेहत की कीमत सिर्फ कागज़ों पर दी जाएगी?”
स्वास्थ्य विभाग की जांच से संतुष्ट नहीं रेजिडेंटस
स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट आने के बाद सोसाइटी प्रबंधन को चेतावनी जारी की है। लेकिन निवासियों का कहना है कि यह “पुरानी रूटीन प्रक्रिया” है, जिससे अब किसी को भरोसा नहीं है। निवासियों ने जनसुनवाई पोर्टल पर जिलाधिकारी से शिकायत दर्ज कराई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह मामला स्वास्थ्य और लोगों की जान से जुड़ा है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।
अब एसटीपी बना नई मुसीबत का कारण 
महागुनपुरम का एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) लंबे समय से ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है। इस कारण ट्रीटेड वेस्ट वॉटर को सोसाइटी के पीछे खुले में छोड़ दिया जा रहा है। यह पानी अब एक गंदे तालाब का रूप ले चुका है, जिससे दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप और प्रदूषण बढ़ रहा है। निवासियों को डर है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो किसी भी समय महामारी फैलने का ख़तरा उत्पन्न हो सकता है।
एक महिला निवासी ने कहा-
“हमारे बच्चे खुले में खेलते हैं, सोसायटी के पास गंदा पानी इकट्ठा हो रहा है। अगर जल्द व्यवस्था नहीं की गई, तो हालात बहुत बिगड़ सकते हैं।”
स्थायी समाधान की गुहार
स्थानीय निवासी सुमित अग्रवाल ने जीडीए उपाध्यक्ष से जनसुनवाई पोर्टल पर अनुरोध किया है कि महागुनपुरम के एसटीपी से निकलने वाले ट्रीटेड वेस्ट वॉटर को चिरंजीव विहार की मेन सीवर लाइन से जोड़ा जाए। उन्होंने नगर निगम और जल बोर्ड दोनों को इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया है। अग्रवाल का कहना है कि-
“जब तक इस गंदे पानी का स्थायी निस्तारण नहीं होगा, तब तक सोसाइटी के अंदर और बाहर दोनों जगह खतरा बना रहेगा।”
बड़ा सवाल: क्या इस बार कुछ बदलेगा?
निवासी प्रशासन से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि इस बार सिर्फ नोटिसों की खानापूर्ति नहीं होगी, बल्कि वास्तविक और स्थायी समाधान निकलेगा। महागुनपुरम की यह घटना केवल एक सोसाइटी की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है जो हर बार जांच और नोटिसों के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल देती है।
