रहने लायक नही: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गिरेगा सिग्नेचर व्यू हाउसिंग प्रोजेक्ट
इमारतें रहने योग्य नहीं, पुनर्विकास में अब कोई कानूनी बाधा नहीं
NEWS1UP
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर दिल्ली के सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट्स को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए इन असुरक्षित इमारतों के विध्वंस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश में दखल देने से साफ मना करते हुए कहा कि रिकॉर्ड पर यह साबित है कि ये इमारतें अब रहने योग्य नहीं रह गई हैं। इस फैसले के साथ ही इन अपार्टमेंट्स के पुनर्विकास की राह पूरी तरह साफ हो गई है।
अधिकांश निवासी छोड़ चुके हैं फ्लैट: डीडीए
सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई उन निवासियों की याचिका पर हुई थी जिन्होंने तर्क दिया कि फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) का मुद्दा अभी तय नहीं हुआ है, इसलिए उन्हें जबरन घर खाली करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
हालांकि, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय जैन और स्थायी वकील संजय कटियाल ने अदालत को बताया कि “336 फ्लैट मालिकों में से 235 पहले ही परिसर खाली करने की सहमति दे चुके हैं, जबकि 133 को किराया देने की प्रक्रिया जारी है।”
उन्होंने कहा कि डीडीए उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप निवासियों को पुनर्विकास की अवधि में किराया देने का वादा निभा रहा है।
5 संस्थानों ने घोषित किया ‘असुरक्षित’
डीडीए ने अदालत को यह भी बताया कि पाँच स्वतंत्र संस्थानों और एजेंसियों ने इन इमारतों को “रहने योग्य नहीं” घोषित किया है। इनमें-
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डीडीए द्वारा गठित तकनीकी समिति
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अदालत द्वारा बनाई गई विशेषज्ञ पैनल
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नेशनल काउंसिल फॉर सीमेंट एंड बिल्डिंग मटीरियल्स की रिपोर्ट
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नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) के दो स्वतंत्र आदेश
शामिल हैं।
इन सभी निष्कर्षों को तीन अलग-अलग अवसरों पर दिल्ली उच्च न्यायालय भी बरकरार रख चुका है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी 
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संजय कुमार और आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि “यह स्पष्ट है कि इमारतें असुरक्षित हैं, और निवासियों के जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है।”
अदालत ने यह भी कहा कि पुनर्विकास की प्रक्रिया में निवासियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
2010 की आवास योजना के तहत बना था परिसर
सिग्नेचर व्यू अपार्टमेंट्स को डीडीए ने वर्ष 2010 में अपनी बहुमंजिला आवास योजना के तहत बनाया था। कुल 12 ब्लॉकों में 336 फ्लैट हैं, जिनमें से 224 उच्च आय वर्ग (HIG) और 112 मध्यम आय वर्ग (MIG) श्रेणी के हैं।
12 अक्टूबर तक घर खाली करने का आदेश
दिल्ली उच्च न्यायालय ने पिछले महीने अपने आदेश में कहा था कि विध्वंस पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी, पर यह सुनिश्चित किया जाए कि निवासियों को न्यूनतम असुविधा हो। अदालत ने 12 अक्टूबर तक सभी निवासियों को मकान खाली करने का निर्देश दिया था और पुनर्विकास अवधि के दौरान किराया देने का आदेश डीडीए को दिया था।
एमसीडी का आदेश भी बरकरार
दिसंबर 2024 में दिल्ली उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने एमसीडी के 18 दिसंबर 2023 के आदेश को सही ठहराया था, जिसमें इमारतों को “खतरनाक” घोषित किया गया था।
