बांग्लादेश में एक और हिंदू युवक की मौत, 15 दिनों में तीसरी हत्या!
मुस्लिम दोस्त ने चलाई गोली
NEWS1UP
विशेष संवाददाता
नई दिल्ली। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मयमनसिंह जिले में सोमवार, 29 दिसंबर की शाम एक फैक्ट्री परिसर के भीतर हिंदू युवक बजेंद्र बिस्वास (42) की गोली लगने से मौत हो गई। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पिछले महज 15 दिनों में यह तीसरा मामला है, जिसमें बांग्लादेश में हिंदू युवक की जान गई है। इससे पहले 18 दिसंबर को दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी और उसके शव को बीच चौराहे पर जला दिया गया था, जबकि ढाका में अमृत मंडल की गोली मारकर हत्या हुई थी।

फैक्ट्री के भीतर चली गोली, दोस्त ही बना मौत का कारण
घटना मयमनसिंह के भालुका उपजिला इलाके में स्थित लबीब ग्रुप गार्मेंट्स की सुल्तान स्वेटर्स लिमिटेड फैक्ट्री में शाम करीब 6:45 बजे हुई। पुलिस और चश्मदीदों के अनुसार बजेंद्र बिस्वास और उसका मुस्लिम दोस्त नोमान मिया (29) दोनों ही फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर तैनात थे और फैक्ट्री के अंदर बने अंसार बैरक में ही रहते थे।
बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान नोमान मिया ने “मजाक” में बजेंद्र पर अपनी सरकारी बंदूक तान दी। इसी दौरान ट्रिगर दब गया और गोली बजेंद्र की बाईं जांघ (लेफ्ट थाई) में जा लगी। गंभीर रूप से घायल बजेंद्र को बचाया नहीं जा सका और उसकी मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी नोमान मिया को गिरफ्तार कर लिया है।
अंसार सदस्य की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
बजेंद्र बिस्वास अंसार बल का सदस्य था। फैक्ट्री की सुरक्षा के लिए कुल 20 अंसार सदस्यों को तैनात किया गया था।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि-
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क्या हथियारों के इस्तेमाल को लेकर कोई सख्त प्रोटोकॉल नहीं था ?
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क्या “मजाक” की आड़ में यह गंभीर लापरवाही थी या फिर जांच के दायरे में कोई और साजिश छिपी है ?
फैक्ट्री परिसर के भीतर, सुरक्षा कर्मियों के बैरक में हुई यह घटना पूरे सुरक्षा तंत्र पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा
बजेंद्र की मौत के बाद बांग्लादेश में फिर से तनाव बढ़ने की आशंका है। 18 दिसंबर को दीपू दास की नृशंस हत्या के बाद ही हालात बेहद गंभीर हो गए थे, जिस पर भारत सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाराजगी देखने को मिली थी।
पिछले एक साल में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले, हत्याएं, धमकियां और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं में तेजी से इजाफा हुआ है। ताजा मामला भले ही “दुर्घटना” बताया जा रहा हो, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाएं यह सवाल मजबूती से खड़ा करती हैं कि क्या बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक वास्तव में सुरक्षित हैं ?
भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर
लगातार हो रही इन घटनाओं से भारत में भी आक्रोश है। सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि बांग्लादेश सरकार को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस और पारदर्शी कदम उठाने होंगे, न कि हर घटना को अलग-थलग “दुर्घटना” बताकर टाल देना होगा।
