February 9, 2026

कल्याण सिंह की 94वीं जयंती पर बोले योगी, उत्तर प्रदेश के ‘कल्याण’ का पर्याय बने बाबू जी!

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कल्याण सिंह केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास का वह अध्याय हैं, जिसने सत्ता को सेवा और संकल्प को संस्कार का स्वरूप दिया। किसान परिवार से निकलकर मुख्यमंत्री, राज्यपाल और राष्ट्रवादी आंदोलन के अग्रदूत बने ‘बाबू जी’ ने अपने नाम को उत्तर प्रदेश के ‘कल्याण’ से इस तरह जोड़ा कि दोनों एक-दूसरे के पर्याय बन गए। उनका जीवन सुशासन, साहस और सिद्धांतों के लिए सत्ता के त्याग का उदाहरण है।


NEWS1UP

भूमेश शर्मा

लखनऊ। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल स्वर्गीय कल्याण सिंह की 94वीं जयंती पर सोमवार को लखनऊ में एक भावुक और गरिमामय वातावरण देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘बाबू जी’ के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और कहा कि कल्याण सिंह ने जीवन भर अपने नाम को उत्तर प्रदेश के ‘कल्याण’ के साथ जोड़कर सार्थक किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबू जी का जीवन संघर्ष, सेवा और संकल्प की त्रिवेणी है। वे ऐसे नेता थे जिन्होंने सत्ता को साध्य नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का माध्यम माना।

भाजपा के पहले मुख्यमंत्री और सुशासन की नींव

सीएम योगी ने याद दिलाया कि कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री थे। वर्ष 1991 में जब उन्होंने प्रदेश की बागडोर संभाली, तब राज्य अव्यवस्था, अराजकता, गुंडागर्दी और आतंकी गतिविधियों से जूझ रहा था। गांव, गरीब, किसान, महिला और युवा, सभी शासन की योजनाओं से वंचित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा-

“बाबू जी के नेतृत्व में पहली बार प्रदेशवासियों को यह विश्वास हुआ कि उत्तर प्रदेश सुशासन की राह पर चलेगा और विकास के नए सोपान गढ़ेगा।”

हालांकि, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि उस समय उन्हें अस्थिर करने की साजिशें शुरू हो गई थीं और प्रदेश में जानबूझकर अव्यवस्था फैलाने के प्रयास किए गए।

सत्ता से बड़ा संकल्प: राम के प्रति कर्तव्य

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब राम जन्मभूमि आंदोलन अपने चरम पर था, तब कल्याण सिंह ने सत्ता को बचाने के बजाय आस्था और राष्ट्रधर्म को प्राथमिकता दी। रामभक्तों और संत समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए उन्होंने सत्ता का बलिदान देने में कोई संकोच नहीं किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि-

“उनकी सरकार गई, लेकिन 500 वर्षों की गुलामी के प्रतीक ढांचे को हटाने का संकल्प अडिग रहा। बाबू जी ने सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेकर प्रभु श्रीराम के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया,”

मुख्यमंत्री ने कहा कि यही कारण है कि बाबू जी का कार्यकाल सुशासन, विकास और राष्ट्रवादी मिशन को आगे बढ़ाने के लिए सदैव स्मरण किया जाएगा।

संघ की पाठशाला से राष्ट्रवाद का जीवन-मंत्र

सीएम योगी ने कहा कि कल्याण सिंह का जन्म एक किसान परिवार में हुआ और उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पाठशाला में राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ा। वही राष्ट्रवाद उनके जीवन का मंत्र बना। उन्होंने विधायक, मंत्री, सांसद, मुख्यमंत्री और राज्यपाल, हर भूमिका में उसी विचार को आत्मसात कर कार्य किया।

योगी ने कहा कि-

“आज हर भारतवासी बाबू जी को याद करता है, क्योंकि उन्होंने जो कहा, वही जिया और जो जिया, वही देश के सामने उदाहरण बन गया,”

इस अवसर पर स्वर्गीय कल्याण सिंह के पुत्र एवं पूर्व सांसद राजवीर सिंह, उनके पौत्र एवं बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, भाजपा उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष चौधरी भूपेंद्र सिंह, सांसद सतीश गौतम, मुकेश राजपूत, कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद, राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी सहित अनेक जनप्रतिनिधि और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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