February 11, 2026

तंगी से तरक्की तक: सुशीला की ज्वेलरी ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी!

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सीएम योगी की प्रेरणा से कस्टम ज्वेलरी उद्यम ने बदली

ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी

NEWS1UP

विशेष संवाददाता

लखनऊ। मीरजापुर जिले का छोटा सा पिपरवा गांव आज एक नई वजह से चर्चा में है, यहां की 28 वर्षीय सुशीला देवी उस बदलाव की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं, जिसने ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी की दिशा और दशा बदल दी है। कभी आर्थिक तंगी और घरेलू जिम्मेदारियों में उलझी रहने वाली सुशीला आज न केवल सफल उद्यमी हैं, बल्कि गांव की कई महिलाओं के लिए प्रेरणा भी बन गई हैं। 

प्रशिक्षण ने खोला नया रास्ता, कस्टम ज्वेलरी बनी पहचान

किसान परिवार में जन्मी सुशीला के लिए इंटर तक की पढ़ाई ही बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन आगे का रास्ता हमेशा धुंधला रहा। पति की सीमित आय से घर चलाना मुश्किल हो रहा था। तभी एक दिन उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स संस्था की टीम गांव पहुंची और महिलाओं को बताया कि वे भी व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

इसी दौरान सुशीला को कस्टम ज्वेलरी प्रशिक्षण का अवसर मिला। हिम्मत जुटाकर उन्होंने प्रशिक्षण लिया और स्वयं सहायता समूह से 15,000 रुपये का लोन लेकर अपना छोटा सा उद्यम शुरू किया। उनके हाथों की डिजाइन की गई ज्वेलरी जल्द ही आसपास के बाजारों में पसंद की जाने लगी। मिशन और संस्था की टीम ने उन्हें खरीदारों से जोड़कर मार्केट तक पहुंच भी आसान करा दी।

सुशीला देवी द्वारा निर्मित ज्वेलरी

15,000 रुपये मासिक आय, गांव की महिलाओं को भी दिया रोजगार

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के सहयोग से अब सुशीला की मासिक आय बढ़कर 15,000 रुपये तक पहुंच चुकी है। उनकी सफलता ने न केवल उनकी बल्कि गांव की कई महिलाओं की किस्मत भी बदल दी है, क्योंकि सुशीला ने अपने उद्यम में अन्य महिलाओं को भी काम देना शुरू कर दिया है। गांव की महिलाएं, जो अब तक घर तक सीमित थीं, अब आय अर्जित कर अपने परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं।

बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिला, परिवार की मजबूत साथी बनीं सुशीला

पहले जहां बच्चों की पढ़ाई सिर्फ उम्मीदों पर टिकी थी, वहीं सुशीला ने अपनी कमाई से उन्हें अच्छे स्कूल में दाखिला कराया। अब वे घर की आर्थिक जिम्मेदारियों में पति की बराबरी से कंधा मिला रही हैं।

सुशीला कहती हैं-

“पहले लगता था कि गांव की महिलाएं सिर्फ घर तक सीमित रहती हैं, लेकिन सही दिशा मिले तो हम अपना भविष्य खुद बना सकते हैं।”

महिला सशक्तिकरण मॉडेल की सफलता की गवाही

ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन कहती हैं-

दीपा रंजन, निदेशक, ग्रामीण आजीविका मिशन

“सुशीला जैसी कहानियां दिखाती हैं कि सीएम योगी की महिला-केंद्रित नीतियों ने गांव-गांव में नई ऊर्जा पैदा की है। छोटे गांवों से महिलाएं अब स्वाभिमान और सफलता की नई कहानियां लिख रही हैं।”

सुशीला की यह सफलता सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं, बल्कि उस ग्रामीण भारत की बदलती तस्वीर है, जहां अवसर, प्रशिक्षण और सरकारी समर्थन मिल जाए तो महिलाएं आर्थिक, सामाजिक और मानसिक, हर तरह की सीमाओं को पार कर सकती हैं।

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