KW सृष्टि का सबसे बड़ा एक्सपोज़: GDA ने बिल्डर पंकज जैन पर कसा शिकंजा, NOC से लेकर CC तक रेसिडेंट्स को सब सौंपो!
दस साल की पीड़ा, हजारों परिवारों का गुस्सा
एक माह में हैंडओवर दो, वरना कानून तैयार है: GDA
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित के डब्लू सृष्टि सोसायटी के निवासियों की वर्षों पुरानी जद्दोजहद एक निर्णायक मोड़ पर पहुँचती दिखाई दे रही है। सोसायटी के प्रमोटर पंकज जैन के खिलाफ गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने इस बार बिल्कुल सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है कि यदि एक माह के भीतर यूपी अपार्टमेंट एक्ट की धारा 4(6) के अनुसार सोसायटी का विधिवत हैंडओवर नहीं किया गया, तो बिल्डर के खिलाफ UP Apartment Act 2010 की धारा 25 और 26, रेरा अधिनियम 2016, भारतीय न्याय संहिता 2023 और राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2023 के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
समय रहते कार्रवाई होनी चाहिए थी
रेजिडेंट्स का आरोप है कि GDA ने वर्षों पहले ही पर्यावरण विभाग की NOC के बिना ही बिल्डर को कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया, जिसके बाद से बिल्डर के हौसले इतने बुलंद हुए कि उसने लगातार निवासियों से वादाखिलाफी और धोखाधड़ी का खेल चलाया।
लगभग एक हजार से ज़्यादा परिवार, जो पिछले एक दशक से बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे थे, कहते हैं कि यदि GDA ने वही सक्रियता पहले दिखाई होती जो आज दिखा रहा है तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती।
GDA की बैठक में बड़ा निर्देश: एक माह में MOU और पूरा हैंडओवर
19 सितम्बर को GDA के संयुक्त सचिव की मौजूदगी में बिल्डर और AOA बोर्ड प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में प्राधिकरण ने बिल्डर को कड़े शब्दों में आदेश दिया कि:
-
एक माह में MOU तैयार किया जाए
-
यूपी अपार्टमेंट एक्ट के अनुसार विधिवत हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी की जाए
इससे पहले:
-
25 जुलाई को AOA अध्यक्ष प्रमोद कुमार त्यागी और महासचिव प्रशांत पांडेय ने मेरठ मंडल आयुक्त को विस्तृत शिकायत भेजी थी।
-
8 अगस्त को AOA बोर्ड मेंबर प्रवीण प्रधान, वीरेंद्र इंदौलिया, नरेंद्र तोमर और अनुज तोमर ने GDA उपाध्यक्ष को ईमेल के माध्यम से गुहार लगाई थी कि बिल्डर से सुरक्षित, पारदर्शी और कानूनन हैंडओवर सुनिश्चित कराया जाए।
-

वीरेंद्र इंदौलिया, जिन्होंने लम्बी लड़ाई लड़ी -
इससे पहले निवासी वीरेंद्र इंदौलिया और अन्य सदस्यों ने विभागों से लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और लगातार दस्तक दी।
AOA का साफ संदेश: आधा-अधूरा हैंडओवर नहीं चलेगा
AOA के पदाधिकारियों का कहना है कि बिल्डर हैंडओवर के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करना चाहता है जबकि कानून स्पष्ट है कि हैंडओवर पूरी पारदर्शिता के साथ होना चाहिए।
AOA अध्यक्ष प्रमोद कुमार त्यागी कहते हैं-

“हमें हैंडओवर केवल यूपी अपार्टमेंट एक्ट के अनुसार ही चाहिए। बिल्डर जिम्मेदारियों से भागना चाहता है पर हम किसी भी तरह की अपूर्ण प्रक्रिया स्वीकार नहीं करेंगे।”
प्रवीण प्रधान, AOA बोर्ड मेंबर, का बयान और भी कड़ा है-

“रेजिडेंट्स ने दस साल तक परेशानियों का दंश झेला है। अब यदि आधा-अधूरा हैंडओवर मिला तो यह जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा होगा।”
वे कहते हैं कि प्रत्येक निवासी को कानूनन मिलना चाहिए-
-
बिजली सप्लाई से जुड़े सभी दस्तावेज
-
IFMS का पूरा पैसा
-
स्वीकृत पार्किंग
-
STP की NOC, सभी विभागों की NOC
-
स्वीकृत मानचित्र
-
CC और OC
-
डीड ऑफ डिक्लेरेशन
-
लैंड टाइटल
“सहित जब तक सभी दस्तावेज नहीं मिलते, तब तक रेसिडेंट्स को न्याय नहीं मिल सकता।”
क्या अब पाएंगे निवासी अपनी लड़ाई का परिणाम ?
सवाल बड़ा है कि क्या GDA इस बार अपने आदेशों में कठोरता बरकरार रख पाएगा और क्या बिल्डर तय समय सीमा में पारदर्शी हैंडओवर करेगा ? निवासी आशान्वित हैं और आशंकित भी कि यह आदेश वर्षों से जमे विवाद को खत्म करने की दिशा में निर्णायक कदम सिद्ध होगा।
