सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: शौर्य, श्रद्धा और संकल्प का महासंगम, पीएम मोदी ने बलिदानी वीरों को किया नमन!
समुद्र, सूर्य और शिव दिव्यता में डूबा सोमनाथ धाम
1,000 ड्रोन, 1,000 वर्षों की गाथा
आकाश में इतिहास का जीवंत प्रदर्शन

NEWS1UP
भूमेश शर्मा
सोमनाथ (गुजरात)। भारत की आस्था, इतिहास और आत्मबल का प्रतीक सोमनाथ एक बार फिर राष्ट्रचेतना के केंद्र में रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को सोमनाथ पहुंचे, जहां उन्होंने ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर आयोजित शौर्य यात्रा में भाग लिया और मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग करने वाले वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान प्रधानमंत्री ने भगवान सोमनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना कर देशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि-
“सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में सक्रिय सेवा का अवसर मिलना मेरे लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है। आज देश के कोने-कोने से लाखों लोग इस पावन पर्व से जुड़े हैं। उन सभी को मेरी ओर से जय सोमनाथ।”
आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ की दिव्यता का वर्णन करते हुए कहा कि यह समय, यह वातावरण और यह उत्सव, तीनों अद्भुत हैं।
“एक ओर देवाधिदेव महादेव, दूसरी ओर अथाह समुद्र की लहरें, सूर्य की स्वर्णिम किरणें, मंत्रों की गूंज, आस्था का उफान और भक्तों की विराट उपस्थिति, यह सब मिलकर इस अवसर को भव्य और दिव्य बना रहा है।”
सोमनाथ मंदिर परिसर इन क्षणों में आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया, जहां मंत्रोच्चार, भजन और श्रद्धालुओं की भावनाओं ने पूरे वातावरण को आलोकित कर दिया।

बलिदान की स्मृति: एक हजार वर्षों का इतिहास साक्षी
प्रधानमंत्री मोदी ने इतिहास के उन कठिन क्षणों को स्मरण करते हुए कहा कि करीब एक हजार वर्ष पहले इसी धरती पर हमारे पूर्वजों ने अपनी आस्था की रक्षा के लिए प्राणों की बाजी लगा दी थी।
“हमारे पुरखों ने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया। वे आततायी सोच रहे थे कि उन्होंने हमें जीत लिया, लेकिन एक हजार साल बाद भी सोमनाथ महादेव की ध्वजा पूरी सृष्टि को बता रही है कि भारत की शक्ति और सामर्थ्य क्या है।”
उन्होंने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत की सनातन चेतना, आत्मसम्मान और पुनरुत्थान का प्रतीक है।

ड्रोन शो और शौर्य यात्रा ने रचा इतिहास
प्रधानमंत्री ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन अपने आप में ऐतिहासिक है।
“72 घंटे तक अनवरत ओंकार नाद, 72 घंटे का मंत्रोच्चार, 1,000 ड्रोन द्वारा सोमनाथ के 1,000 वर्षों की गाथा का दृश्य प्रदर्शन, वैदिक गुरुकुलों के 1,000 विद्यार्थियों की सहभागिता, यह सब अद्वितीय था।”
उन्होंने विशेष रूप से 108 अश्वों के साथ निकाली गई शौर्य यात्रा को भारत की परंपरा, साहस और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बताया, जिसमें मंत्रों और भजनों की प्रस्तुति ने सभी को मंत्र-मुग्ध कर दिया।

‘यह अनुभूति शब्दों से परे है’
प्रधानमंत्री ने भावुक स्वर में कहा कि इस दिव्य अनुभूति को शब्दों में अभिव्यक्त करना कठिन है।
“इसे केवल समय ही संकलित कर सकता है। यह अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।”
उन्होंने दुनियाभर के श्रद्धालुओं को सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा देता है।

सोमनाथ: आस्था, संघर्ष और विजय का प्रतीक
सोमनाथ का इतिहास केवल विध्वंस की कथा नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय स्वाभिमान की अमर गाथा है। बार-बार आक्रमणों के बावजूद जिस प्रकार सोमनाथ ने स्वयं को पुनः स्थापित किया, वही भारत की आत्मा की असली पहचान है।
प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति और संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि सोमनाथ केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भारत के भविष्य का संकल्प भी है, एक ऐसा संकल्प जो आस्था, संस्कृति और राष्ट्रबोध को एक सूत्र में बांधता है।

