महागुनपुरम में जल-जहर और घोटाला: बीमारियों और बेबसी के बीच ‘डीएम’ से न्याय की गुहार!
दूषित पानी, जलभराव और करोड़ों की मेंटेनेंस राशि पर सवाल
डीएम से हस्तक्षेप की अपील
ऑडिट से डर कैसा ?
NEWS1UP
विशेष संवाददाता
गाजियाबाद। एनएच-9 पर स्थित महागुनपुरम सोसाइटी, जो कभी आधुनिक जीवनशैली का प्रतीक मानी जाती थी, आज हज़ारों परिवारों के लिए बीमारी, बदबू और बेबसी का पर्याय बन चुकी है। करीब 10,000 से अधिक निवासी महीनों से दूषित जल, जलभराव, बिजली संकट और वित्तीय अनियमितताओं के भंवर में फंसे हैं, परंतु बिल्डर, एओए (Apartment Owners Association) और मेंटेनेंस एजेंसी सीएसके फैसिलिटी मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड ने आँखें मूँद रखी हैं। 27 अक्टूबर सोमवार को त्रस्त रेसिडेंट्स का एक प्रतिनिधि मंडल जिलाधिकारी से मिला और अपनी समस्याओं का पुलिंदा उन्हें सौंपा।
पानी में ज़हर: स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट ने खोला राज
11 अक्टूबर 2025 से भगिरथी टॉवर में दूषित जल की आपूर्ति से 80 से अधिक लोग पेट संक्रमण, उल्टी और बुखार से पीड़ित हुए। स्वास्थ्य विभाग की जांच में पानी का नमूना फेल पाया गया, यानी नल से निकलने वाला पानी सीधे बीमारी बाँट रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 2021 में भी इसी कंपनी के कार्यकाल में पानी दूषित हुआ था, और उस समय भी दर्जनों लोग बीमार पड़े थे। फिर भी इस बार न कोई चेतावनी दी गई, न वैकल्पिक जल आपूर्ति की व्यवस्था। उल्टा, मीडिया में गलत जानकारी देकर सच्चाई को दबाने की कोशिश की गई।
एओए अध्यक्ष का कहना है कि जाँच में पानी को पीने योग्य नहीं पाया जाना चिंताजनक है। उनका कहना है कि दिवाली और छठ की व्यस्त्तता के चलते फिर से जाँच नहीं हो सकी है, जल्द ही पानी के नमूने जाँच के लिए भेजे जायेंगे।

एसटीपी बंद, रेनवॉटर पिट चोक्ड: जलभराव से बदबू और मच्छरों का आतंक
सोसाइटी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) वर्षों से बंद पड़ा है। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पूरी तरह बेकार हो चुका है। नतीजा, हर बारिश में बेसमेंट और ग्रीन बेल्ट झील बन जाती है, जिसमें मच्छरों का प्रकोप और सड़ांध से जीना दूभर हो गया है। जीडीए के पत्र और निवासियों के सैकड़ों निवेदन भी अब तक सिर्फ फाइलों में कैद हैं। निवासी इसके स्थायी समाधान के लिए, चिरंजीव विहार सीवर लाइन से कनेक्शन जोड़ने की मांग लगातार कर रहे हैं।

7 साल से बिना ऑडिट: फंड कहाँ गया, कोई जवाब नहीं
सोसाइटी के निवासियों से हर महीने लाखों रुपये मेंटेनेंस के नाम पर वसूले जा रहे हैं, परंतु पिछले 7 वर्षों से एओए का कोई ऑडिट नहीं हुआ। डिप्टी रजिस्ट्रार ने नोटिस तक जारी किया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर शून्य। निवासियों का सवाल सीधा है, “अगर सब पारदर्शी है, तो ऑडिट से डर कैसा ?”
बिजली बकाया में करोड़ों की गड़बड़ी: निवासियों पर अंधेरे का खतरा
रेसिडेंट्स का आरोप है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) को करीब एक करोड़ रुपए से अधिक का बकाया भुगतान नहीं किया गया, जिसमें 34.93 लाख सीएसके फैसिलिटी मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और 26 लाख रुपए बिल्डर के नाम से हैं। जबकि यह राशि पहले ही निवासियों से वसूली जा चुकी है! यूपीपीसीएल ने अब कनेक्शन विच्छेदन की चेतावनी जारी की है। यानी गलती किसी और की, पर अंधेरे में डूबेंगे आम लोग।
हमने घर नहीं, संकट खरीदा है: निवासियों की दर्दभरी पुकार

भागीरथी टॉवर के सुमित अग्रवाल कहते हैं-
“हमारे बच्चे दूषित पानी से बीमार हैं, प्रशासन से लेकर एओए तक सब मूकदर्शक हैं, यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि यह अपराध है।”

नर्मदा टॉवर के संदीप पाराशर जोड़ते हैं-
“ सीएसके फैसिलिटी मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और एओए एक-दूसरे को बचा रहे हैं। सात साल का हिसाब कोई नहीं देता, लेकिन हर महीने बिल समय पर भेजा जाता है।”

गंगा टॉवर के पवन पांडे की मांग है कि-
“जिला प्रशासन तुरंत जांच समिति बनाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे।”
निवासियों की अपील: अब बस, हमें न्याय चाहिए
महागुनपुरम के निवासी प्रशासन से ये चार प्रमुख मांगें कर रहे हैं, जल प्रदूषण, जलभराव, वित्तीय अनियमितता और बिजली बकाया पर विशेष जांच समिति गठित की जाए। सीएसके फैसिलिटी मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड सहित दोषियों पर कानूनी कार्यवाही हो। नगर निगम, जल निगम, विद्युत विभाग और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा संयुक्त निरीक्षण किया जाए। एसटीपी और सीवर लाइन का स्थायी समाधान सुनिश्चित कराया जाए।
अब सवाल सिर्फ महागुनपुरम का नहीं, यह सवाल “शहरी जवाबदेही” का है
अगर 10,000 से अधिक लोग राजधानी से कुछ किलोमीटर दूर, एक “प्रतिष्ठित” सोसाइटी में ज़हरीला पानी और प्रशासनिक उदासीनता झेल रहे हैं, तो सवाल सिर्फ बिल्डर या एओए पर नहीं, पूरे सिस्टम पर है। क्या शहर की चमक के पीछे ऐसी सोसायटियों की सड़ांध को अनदेखा किया जाएगा ? उम्मीद है कि “जिला अधिकारी” जनता के दर्द को अपना विषय बनाएंगे!
