February 5, 2026

गाजियाबाद की हाई-राइज़ सोसाइटी में 69 वर्षीय बुज़ुर्ग की दस दिन पुरानी मौत, पड़ोसियों को भनक तक नहीं!!

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मोबाइल बजता रहा, दरवाज़ा बंद रहा

और इंसानियत देर से पहुँची

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद।  राजनगर एक्सटेंशन स्थित ब्रेव हार्ट्स सोसाइटी में घटी एक घटना ने न सिर्फ़ पूरे परिसर को, बल्कि हमारे शहरी समाज की आत्मा को भी झकझोर कर रख दिया है। यह कहानी किसी अपराध की नहीं, बल्कि उस खामोश मौत की है, जो भीड़ में रहकर भी अकेलेपन के कारण आ जाती है।

सोसाइटी के फ्लैट नंबर F-804 में रहने वाले 69 वर्षीय दीपक कुमार अपने ही घर में मृत पाए गए। बताया जा रहा है कि उन्हें आख़िरी बार 30 दिसंबर की शाम सोसाइटी परिसर में देखा गया था। उसके बाद वे अचानक अदृश्य हो गए, न कोई आवाज़, न कोई आहट, न किसी की चिंता।

मृतक दीपक कुमार (फाइल फोटो)

मोबाइल फोन कई दिनों तक बजता रहा, लेकिन उठाने वाला कोई नहीं था। 4 जनवरी के बाद मोबाइल भी खामोश हो गया। आशंका है कि 30 दिसंबर की रात ही दिल का दौरा पड़ने से दीपक कुमार का निधन हो गया, और वे लगभग दस दिनों तक मृत अवस्था में अपने ही फ्लैट में पड़े रहे।

बताया जा रहा है कि दीपक कुमार मूल रूप से कश्मीर के निवासी थे, अविवाहित थे और अकेले ही जीवन व्यतीत कर रहे थे। रविवार को दिल्ली के मालवीय नगर से उनकी बहन और बहनोई जब उन्हें तलाशते हुए सोसाइटी पहुंचे, तब जाकर इस दर्दनाक सच से पर्दा उठा। फ्लैट अंदर से बंद था। 112 पर कॉल की गई। पुलिस ने दरवाज़ा खुलवाया और अंदर का दृश्य दिल दहला देने वाला था। दीपक का शरीर आधा बिस्तर पर और आधा नीचे लटका हुआ था। एक ऐसा दृश्य, जिसे देखने के बाद इंसान देर तक चुप रह जाए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। 

पूरी सोसाइटी में मातम सा छा गया। हर चेहरा सवाल पूछ रहा था, क्या हम इतने व्यस्त हो गए हैं कि बगल में रहने वाला इंसान ज़िंदा है या नहीं, इसकी भनक तक नहीं लगती ? दस दिनों तक एक बुज़ुर्ग की मृत्यु का किसी को पता न चलना, सिर्फ़ एक घटना नहीं, यह उस सोसाइटी कल्चर पर एक करारा तमाचा है, जहाँ लोग सुरक्षा गेट और फ्लैट की दीवारों के भीतर तो सुरक्षित हैं, लेकिन मानवीय रिश्तों से कोसों दूर।

त्रासदी से सबक: एओए अध्यक्ष एडवोकेट लवीश त्यागी की पहल

लविश त्यागी, एओए अध्यक्ष 

इस हृदयविदारक घटना के बाद ब्रेव हार्ट्स सोसाइटी के अध्यक्ष एडवोकेट लवीश त्यागी ने इसे महज़ एक हादसा मानकर छोड़ देने के बजाय, इंसानियत और सामुदायिक जिम्मेदारी को फिर से जिंदा करने का बीड़ा उठाया।

उन्होंने सोसाइटी में सुरक्षा और संवेदनशीलता दोनों स्तरों पर कड़े और व्यावहारिक कदम उठाने की घोषणा की।

लागू किए गए प्रमुख निर्णय:

सम्पूर्ण डेटा वेरिफिकेशन: हर फ्लैट का रिकॉर्ड, कौन मालिक है, कौन किराएदार और कौन अकेला रहता है, अब अपडेट किया जाएगा।

अकेले और बुजुर्ग निवासियों की सूची: अकेले रहने वाले बुजुर्गों और दंपतियों की अलग सूची बनाई जाएगी।

गार्ड्स की मानवीय जिम्मेदारी: सुरक्षा गार्ड्स को निर्देश दिए गए हैं कि वे रोज़ाना ऐसे निवासियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क करें।

आवागमन की जानकारी: अकेले रहने वाले निवासियों को बाहर जाने से पहले गार्ड को सूचित करना होगा।

आपातकालीन संपर्क अनिवार्य: सभी के नजदीकी रिश्तेदारों के फोन नंबर सोसाइटी रिकॉर्ड में सुरक्षित रखे जाएंगे।

अध्यक्ष एडवोकेट लवीश त्यागी का भावुक संदेश

“यह घटना हमारे लिए चेतावनी है। हम नहीं चाहते कि हमारी सोसाइटी में कोई भी व्यक्ति अकेला महसूस करे। सुरक्षा केवल कैमरों से नहीं, संवेदनाओं से आती है। हम तकनीक के साथ-साथ मानवीय जुड़ाव को भी मज़बूत कर रहे हैं।”

सोसाइटी के निवासियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे सिर्फ़ सुरक्षा नहीं, बल्कि इंसानियत की पुनर्स्थापना बताया है।

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