गाजियाबाद में ‘सवर्ण महासभा’ का शंखनाद, एकजुटता से अधिकारों की लड़ाई का ऐलान!

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सनातन, संगठन और संघर्ष का संकल्प: सेवाराम त्यागी

NEWS1UP

संवाददाता

गाजियाबाद। मालीवाड़ा स्थित वोल्गा पैलेस में आयोजित बैठक में सवर्ण महासभा का गठन किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से संस्था के संरक्षक, संयोजक व सह-संयोजक तय किए गए, जबकि पांच मुख्य संयोजक घोषित किए गए। मुख्य संयोजकों में सेवाराम त्यागी, सुरेश चंद्र शर्मा, वीके अग्रवाल, विवेक कुमार तोमर, विनय कक्कड़ और डॉ. सतीश भारद्वाज के नाम शामिल हैं। वहीं ब्रह्मऋषि विभूति बी.के. शर्मा ‘हनुमान’ को महासभा का प्रवक्ता नियुक्त किया गया।

इस अवसर पर प्रवक्ता विभूति बी.के. शर्मा ‘हनुमान’ ने कहा कि समाज और देश के विकास में सवर्ण समाज का ऐतिहासिक योगदान रहा है। संकट के समय समाज हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहा, इसके बावजूद अपेक्षित सम्मान और अधिकार नहीं मिल पाए, जिसका प्रमुख कारण संगठन और एकजुटता की कमी है। उन्होंने कहा कि एकता और संगठन से ही शक्ति आती है। उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश को सबसे अधिक राजस्व देने वाला सवर्ण समाज उद्योग-व्यापार के माध्यम से करोड़ों लोगों को रोजगार देता रहा है और समाजसेवा में भी मिसाल कायम की है। समाज के खिलाफ षड्यंत्रों का मुकाबला एकजुट होकर ही संभव है। समाज में समानता, समरसता, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने के उद्देश्य से ही सवर्ण महासभा का गठन किया गया है।

प्रतीकात्मक इमेज

वैश्य समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वी.के. अग्रवाल ने कहा कि आज सवर्ण समाज के संगठित होने का समय आ गया है। यदि समाज एकजुट नहीं हुआ तो आने वाली पीढ़ियों पर इसका दुष्प्रभाव पड़ेगा। सम्मान और अधिकार के लिए आवाज उठानी होगी और सवर्ण महासभा समाज की आवाज बनेगी। बैठक में सभी ने एक स्वर में कहा कि देश की सभी जातियों को अपने पूर्वजों के पदचिह्नों पर चलकर प्रेम-सौहार्द की गंगा बहानी होगी,“जाति में बंटोगे तो समाज से कटोगे।” अन्य वक्ताओं ने कहा कि सवर्ण समाज का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक देश की जातियां एक नहीं होंगी और “यूजीसी जैसे कानूनों” को समाप्त नहीं किया जाएगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सेवाराम त्यागी ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य सवर्ण समाज को जागरूक करना, सनातन संस्कृति की रक्षा करना और नागरिकों को उनके नैतिक, सामाजिक व राष्ट्रीय दायित्वों से जोड़ना है। सवर्ण केवल विचार नहीं, बल्कि व्यवहार में उतारने योग्य संकल्प है। स्वदेशी, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्यों का पालन, परिवार व समाज में संस्कारों का संवर्धन, यही सवर्ण की सुदृढ़ नींव है। उन्होंने कहा कि सीमाओं पर तैनात सैनिकों के परिश्रम के बीच समाज के हर वर्ग का नैतिक दायित्व है कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करे। त्यागी ने गौ-सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सनातन संस्कृति की रक्षा को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया गया।

बैठक में सुरेंद्र पाल त्यागी, डॉ. सतीश भारद्वाज, विनय कक्कड़, दीनदयाल गर्ग, ओम प्रकाश गुप्ता, सेवाराम त्यागी, अरुण त्यागी, अजय त्यागी, पुनीत त्यागी, वीरेंद्र त्यागी, मनोज त्यागी, संदीप सिंघल, विवेक कुमार, गौरव शर्मा, रमेश चंद्र गुप्ता, शिवकुमार शर्मा, राजेश गुप्ता, देवेंद्र सिंह, एन.के. शर्मा, राजू राघव, रंजीत पोद्दार, डॉ. ए.के. शर्मा, डॉ. गौरव सैनी, नरेंद्र कुमार गुप्ता, अशोक भारतीय, अरुण कुमार सिंह, अशोक गुप्ता, अरविंद कुमार, संजीव गुप्ता, प्रभु सिंह सिंगल, मनोज गुप्ता, हेमंत कंसल, राजीव अग्रवाल, संजीव अग्रवाल, एस.के. शर्मा, सुरेंद्र चंद शर्मा, नरेंद्र कुमार गुप्ता नंदी, दिलीप कुमार, एस.के. मिश्रा, सुरेश त्यागी, सतीश चोपड़ा, एन.एस. तोमर, अनिल ठाकुर, गौरव अग्रवाल और लोकेशन सिंघल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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