70वें पड़ाव पर मायावती: सियासत में आत्मसम्मान की राजनीति की अडिग प्रतीक!
NEWS1UP
पॉलिटिकल डेस्क
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं मायावती आज 70 वर्ष की हो गईं। इस अवसर पर राजनीतिक गलियारों में शुभकामनाओं का सिलसिला चला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए प्रभु श्रीराम से उनके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। वहीं बसपा ने प्रदेशभर में कार्यक्रम आयोजित कर अपने शीर्ष नेतृत्व के प्रति निष्ठा और संगठनात्मक ताकत का प्रदर्शन किया। राजधानी लखनऊ में मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर आगे के राजनीतिक रोडमैप के संकेत भी दिए।
बादलपुर-दादरी के एक साधारण परिवार में जन्मीं मायावती की कहानी भारतीय राजनीति की उन दुर्लभ यात्राओं में है, जहां शिक्षा से सियासत तक का सफर आत्मसम्मान और संगठन की ताकत से तय हुआ। राजनीति में कदम रखने से पहले वे शिक्षिका थीं। कांशीराम के विचारों और बहुजन आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना, और देखते ही देखते बसपा की मुख्य उत्तराधिकारी के रूप में उभरीं।
चार बार सत्ता, एक पहचान
मायावती चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं और भारत की पहली दलित महिला मुख्यमंत्री बनने का इतिहास रचा। 2007 से 2012 का उनका कार्यकाल खास तौर पर इसलिए याद किया जाता है कि उन्होंने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ दलित-ब्राह्मण गठजोड़ के जरिए सत्ता का नया गणित स्थापित किया। यह प्रयोग न केवल चुनावी था, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व के विमर्श में भी एक निर्णायक मोड़ माना गया।
सख्ती, संरचना और स्मारक
प्रशासनिक दृष्टि से मायावती को ‘आयरन लेडी’ कहा गया, कानून-व्यवस्था पर सख्त पकड़ और अफसरशाही में स्पष्ट संदेश उनकी पहचान बने। उनके शासन में एक्सप्रेसवे, पार्क और भव्य स्मारकों का निर्माण हुआ, जिनमें डॉ. भीमराव अंबेडकर और कांशीराम को समर्पित स्थल प्रमुख हैं। हालांकि स्मारकों पर खर्च को लेकर विवाद भी हुए, लेकिन समर्थकों के लिए ये स्थल सामाजिक स्मृति और स्वाभिमान के प्रतीक रहे।
आज भी प्रासंगिक
सात दशक की उम्र में भी मायावती भारतीय राजनीति में करोड़ों वंचितों और दलितों के लिए आत्मसम्मान का चेहरा बनी हुई हैं। बदलते राजनीतिक परिदृश्य में बसपा की रणनीति क्या होगी, इस पर निगाहें टिकी हैं, और उनके जन्मदिन पर दिए जाने वाले संदेशों को इसी संदर्भ में पढ़ा जा रहा है।
70वें जन्मदिन पर मायावती का राजनीतिक सफर यह याद दिलाता है कि सत्ता केवल संख्या नहीं, प्रतीक भी होती है, और उन्होंने उस प्रतीक को दशकों तक मजबूती से थामे रखा है।
