जयपुरिया सनराइज ग्रीन्स बना “सीवरेज लेक”
700 परिवार बदबू, बीमारी और
प्रशासनिक चुप्पी के बीच कैद
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। NH-24 पर खड़ा जयपुरिया सनराइज ग्रीन्स आज किसी आवासीय परियोजना से ज़्यादा खुला सीवरेज डंपिंग ज़ोन दिखाई देता है। जिस टाउनशिप को बेहतर जीवन का सपना बेचकर बसाया गया था, वह आज गटर, बदबू और बीमारी का स्थायी पता बन चुकी है। मुख्य गेट के सामने बहता सीवरेज, जहरीली हवा और चारों ओर पसरी गंदगी प्रशासन को आईना दिखा रहे हैं।

हालात इतने भयावह हैं कि मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मी तक ड्यूटी करने में असमर्थ हैं। सांस लेना मुश्किल हो चुका है। भीतर का नज़ारा और भी डरावना है, बिल्डर द्वारा खोदा गया एक विशाल, गहरा बेसमेंट अब मौत का कुंड बन चुका है, जिसमें चार सोसायटियों का सीवर और एसटीपी का पानी बेरोकटोक उड़ेला जा रहा है।
नोएडा में युवराज मेहता की सीवरेज में गिरकर हुई मौत के बाद भी अगर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण नहीं चेता, तो सवाल लाज़मी है, क्या यहां भी किसी जान जाने का इंतज़ार किया जा रहा है ?
बच्चों की सांसें, बुजुर्गों की ज़िंदगी दांव पर

दिव्यांश ऑनिक्स, रुचिरा सफायर, गोल्डन गेट और एरोकॉन रेनबो में रह रहे करीब 700 परिवार हर दिन इस ज़हर से होकर गुजरने को मजबूर हैं। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सीवरेज के पानी के बीच रास्ता बनाते हैं। यह परेशानी नहीं, सरकारी लापरवाही से उपजा स्वास्थ्य संकट है।
डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड और हैजा जैसे रोग दस्तक दे रहे हैं, लेकिन गाजियाबाद विकास प्राधिकरण खामोश है, नगर निगम गायब है और स्वास्थ्य विभाग लापरवाह है। यह चुप्पी अब अपराध बन चुकी है।
शिकायतें दर्ज, समाधान शून्य
निवासियों का कहना है कि समस्या को बार-बार अधिकारियों के सामने रखा गया, मगर हर बार फाइलें आगे बढ़ीं और ज़मीन पर कुछ नहीं बदला। अब हालात विस्फोटक हैं, इसलिए जिलाधिकारी से लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तक लिखित शिकायतें भेजी गई हैं।
रजिस्ट्री हो गई, EMI चल रही, तो सीवरेज कहाँ है ?
फ्लैटों की रजिस्ट्री हो चुकी है, बैंक लोन जारी हैं। टैक्स पूरे अदा किए जा रहे हैं। तो फिर बुनियादी सुविधा सीवरेज सिस्टम क्यों नदारद है ? यह विकास नहीं, संस्थागत विफलता है। डेवलपर्स जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं और सारा बोझ उन होम बायर्स पर डाला जा रहा है, जिन्होंने उम्र भर की कमाई इस प्रोजेक्ट में झोंक दी।
बदबू के साथ गिरती कीमतें, टूटता भरोसा

लगातार बदबू और बीमारी के डर ने लोगों को मानसिक तनाव में डाल दिया है। टाउनशिप की साख ध्वस्त हो रही है, प्रॉपर्टी वैल्यू गिर रही है, लेकिन अफसरों की नींद नहीं टूट रही।
48 घंटे का अल्टीमेटम: अब टकराव तय
रुचिरा सफायर निवासी सुदीप शाही ने चेतावनी दी है कि-

यदि 48 घंटे में आपात सफाई, सीवरेज पर रोक और स्थायी समाधान की लिखित कार्ययोजना नहीं दी गई, तो मामला सड़क से लेकर NGT और जनहित याचिका तक जाएगा।
बिल्डर पर होगी FIR
GDA सूत्रों के मुताबिक जून 2025 में जयपुरिया ग्रीन्स के खिलाफ थाना वेव सिटी में FIR के लिए तहरीर दी गई थी। बिल्डर ने आज तक कम्पलीशन सर्टिफिकेट नहीं लिया क्योंकि नॉर्म्स पूरे नहीं हैं। अब दोबारा FIR दर्ज कराने की तैयारी है।
सवाल जो व्यवस्था से टकराते हैं
क्या आम आदमी की जान सबसे सस्ती है ? क्या विकास प्राधिकरण की ज़िम्मेदारी सिर्फ नक्शा पास करने तक सीमित है ? क्या सिस्टम तभी जागता है जब कोई हादसा हो जाए ?
