गाजियाबाद में आवारा कुत्तों का कहर: 4 साल की बच्ची को घसीट-घसीटकर नोचा, सिर में आए 37 टांके!!
राजनगर एक्सटेंशन की सोसाइटी
गुलमोहर गार्डन में भी बच्चे पर कुत्तों का हमला
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। गाजियाबाद में आवारा कुत्तों का आतंक अब भयावह रूप ले चुका है। इंदिरापुरम थाना क्षेत्र के कनावनी इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ घर के बाहर खेल रही चार साल की मासूम बच्ची पर आवारा कुत्तों के झुंड ने अचानक हमला कर दिया। कुत्ते बच्ची को काटते हुए सड़क पर घसीटने लगे, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई।
चीखें सुनकर दौड़े लोग, तब जाकर बची जान
बच्ची की चीख-पुकार सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे और किसी तरह कुत्तों को भगाया। इसके बाद घायल बच्ची को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद बताया कि बच्ची के सिर में 37 टांके लगाने पड़े हैं। घटना के बाद से बच्ची का परिवार सदमे में है।

मां का दर्द: अब बच्चों को बाहर भेजने से डर लगता है
घायल बच्ची की मां पिंकी ने आंखों में आंसू लेकर बताया कि
“मेरा चार साल का बच्चा घर के बाहर खेल रहा था, तभी कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। जैसे-तैसे बचाकर अस्पताल ले गए। अब बच्चों को बाहर भेजने में डर लगने लगा है।”
परिवार में पिता अमरपाल, एक छोटा भाई कुलदीप भी है। एक मासूम की यह हालत पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है।
घटना के बाद से इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
गेटेड सोसायटी में भी डर का साया
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट और सख्त निर्देशों के बावजूद ‘आवारा कुत्तों’ की समस्या पर प्रशासन की उदासीनता अब जानलेवा होती जा रही है। और एक ताज़ा मामला शुक्रवार की सुबह राजनगर एक्सटेंशन स्थित गुलमोहर गार्डन गेटेड हाईराइज सोसायटी का है, जहाँ आवारा और हिंसक 6 कुत्तों के झुंड ने एक बच्चे पर हमला कर दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सोसायटी निवासी राजकुमार के बेटे पर अचानक कुत्तों ने हमला कर दिया। यह घटना बताती है कि अब हालात ऐसे हो चुके हैं कि गेटेड और सुरक्षित मानी जाने वाली सोसायटियाँ भी प्रशासनिक लापरवाही की शिकार हैं। घटना का CCTV फुटेज बेहद डरा देने वाला है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि मानव जीवन सर्वोपरि है और आवारा कुत्तों के मामले में नगर निगम व प्रशासन जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रित पुनर्वास के आदेश दिए गए हैं, लेकिन कनावनी और गुलमोहर गार्डन की घटना ने इन आदेशों की पोल खोल दी है।
शिकायतें बहुत, कार्रवाई नदारद
गुलमोहर गार्डन के पूर्व एओए सचिव अवधेश अग्रवाल बताते हैं कि-

इस समस्या को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन हर बार आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया। न निवारण हुआ, न निगरानी बढ़ी,और न ही किसी अधिकारी की जवाबदेही तय हुई।
यहाँ कई अहम् सवाल जहन में पैदा हो जाते हैं! मसलन, गेटेड सोसायटी में आवारा कुत्ते कैसे पहुँचे ? नगर निगम और पशु विभाग क्या कर रहा था ? अगर आज कोई बड़ा हादसा हो जाता, तो जिम्मेदार कौन होता ?
बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कुछ नहीं
सुप्रीम कोर्ट यह भी साफ कर चुका है कि पशु प्रेम के नाम पर नागरिकों, खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों की जान को खतरे में नहीं डाला जा सकता। इसके बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
