February 11, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर लगाई रोक!!

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अस्पष्ट हैं प्रावधान, दुरुपयोग का खतरा: सुप्रीम कोर्ट

2012 के नियम फिर से लागू, अगली सुनवाई 19 मार्च को

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी (UGC) के नए नियमों पर बड़ा और अहम अंतरिम आदेश देते हुए उनके अमल पर तत्काल रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि नए नियमों में इस्तेमाल की गई भाषा अस्पष्ट है और इससे दुरुपयोग का गंभीर खतरा पैदा होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि 2012 के नियम अब फिर से लागू होंगे। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी।

अस्पष्ट शब्द, दुरुपयोग की आशंका

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने चिंता जताते हुए कहा कि रेगुलेशन में प्रयुक्त शब्द ऐसे हैं जिनका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। अदालत ने कहा कि फिलहाल यथास्थिति बनाए रखना आवश्यक है, ताकि किसी भी तरह के सामाजिक या शैक्षणिक नुकसान से बचा जा सके।

2012 के नियम बहाल

शीर्ष अदालत ने आदेश में कहा कि यूजीसी के 2012 के नियम प्रभावी रहेंगे। कोर्ट का मानना है कि जब पुराने नियम मौजूद हैं, तो नए प्रावधानों की प्रासंगिकता और आवश्यकता पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।

जस्टिस बागची की अहम टिप्पणी

जस्टिस ज्योमाल्या बागची ने कहा- 

“हम समाज में एक निष्पक्ष और समावेशी माहौल बनाने पर विचार कर रहे हैं। जब 3E पहले से मौजूद है, तो 2C कैसे प्रासंगिक हो जाता है ?”

उन्होंने चेताया कि भारत को ऐसी स्थिति की ओर नहीं बढ़ना चाहिए, जहां पहचान के आधार पर विभाजन बढ़े। बागची ने अमेरिका के अतीत का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत कभी उस दौर तक नहीं पहुंचेगा, जहां अश्वेत और श्वेत बच्चों के लिए अलग-अलग स्कूल हुआ करते थे।

याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने यूजीसी एक्ट की धारा 3(C) को चुनौती देते हुए इसे असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा यह केवल धारणा पर आधारित है कि सामान्य श्रेणी के छात्र भेदभाव करते हैं, यह समानता के संवैधानिक सिद्धांत के खिलाफ है, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों की भावना के विपरीत है और इससे समाज में वैमनस्य बढ़ेगा।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से यूजीसी के नए रेगुलेशन को रद्द करने और तत्काल रोक लगाने की मांग की। साथ ही यह भी कहा कि यदि अनुमति मिले, तो वे बेहतर और संतुलित रेगुलेशन का मसौदा तैयार कर सकते हैं।

CJI सूर्यकांत की तीखी टिप्पणियां

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने समाज में बढ़ते वर्गीय और पहचान-आधारित विभाजन पर गहरी चिंता जताई।

उन्होंने कहा- 

“आजादी के 75 साल बाद भी हम समाज को जातियों से मुक्त नहीं कर सके हैं। क्या हम एक वर्गहीन समाज बनने के लिए जो कुछ हासिल कर पाए हैं, उससे पीछे जा रहे हैं ?”

रैगिंग पर टिप्पणी करते हुए CJI ने कहा कि दक्षिण भारत या पूर्वोत्तर से आने वाले छात्रों की संस्कृति पर टिप्पणियां करना बेहद चिंताजनक है।

उन्होंने सख्त लहजे में कहा-

“भगवान के लिए! आज हमारे समाज में अंतर-जातीय शादियां हो रही हैं। हम खुद हॉस्टल में रहे हैं, जहां सभी एक साथ रहते थे।”

कमेटी बनाने का सुझाव

मुख्य न्यायाधीश ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि कुछ प्रतिष्ठित कानूनविदों की एक समिति बनाने पर विचार किया जाना चाहिए, जो पूरे मुद्दे की समीक्षा करे। उद्देश्य यह हो कि समाज बिना किसी विभाजन के आगे बढ़े और शिक्षा व्यवस्था समावेशी बनी रहे।

कोर्ट का रुख साफ

CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत फिलहाल केवल प्रावधानों की कानूनी वैधता और संवैधानिकता की जांच कर रही है। लेकिन यह भी साफ संकेत दिया कि अस्पष्ट और विभाजनकारी प्रावधानों को लेकर कोर्ट कोई समझौता नहीं करेगा।

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