रात के सन्नाटे में धमाका: EV चार्जिंग हादसे से परिवार अब भी दहशत में!
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जिस दीवार से सटा था बेडरूम, वहीं जल रही थी ई-कार
नियमों के बावजूद हादसा, जांच में जुटी कंपनी
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। शहर के पॉश इलाके शास्त्री नगर, सी-ब्लॉक में बीते सोमवार की रात एक परिवार मौत से सिर्फ कुछ सेकंड की दूरी पर था। जिस घर में चैन की नींद ली जा रही थी, वहीं बाहर चार्जिंग पर खड़ी नामचीन कंपनी मॉरिस गैराज (MG) की इलेक्ट्रिक कार ‘विंडसर’ अचानक आग का गोला बन गई। आग इतनी विकराल थी कि कार का आधा हिस्सा जलकर राख हो गया और उसी से सटे कमरे में लगा एयर कंडीशनर धमाके के साथ फट पड़ा।
यह कोई मामूली हादसा नहीं था, यह एक ऐसी चेतावनी थी, जो अगर कुछ पल और देर से मिलती, तो एक पूरा परिवार जिंदा जल सकता था।
खिड़की टूटी, नींद खुली… और सामने मौत खड़ी थी
जिस कमरे से सटी दीवार के बाहर कार खड़ी थी, उसी कमरे में छह लोग गहरी नींद में सो रहे थे। आग की लपटें कमरे के भीतर तक पहुंच चुकी थीं। अगर खिड़की का कांच टूटने की आवाज न आती, तो शायद यह खबर “हादसा” नहीं, बल्कि “जन हानि” शीर्षक के साथ लिखी जाती।
कार मालिक हर्षित गुप्ता बताते हैं-
“रात करीब साढ़े ग्यारह बजे अचानक जोरदार धमाका हुआ। पहले खिड़की टूटी, फिर AC फटा। आंख खुली तो कमरे में आग फैल रही थी। कुछ समझ नहीं आया, बस माता-पिता, पत्नी, बहन और बच्चे को लेकर जैसे-तैसे बाहर भागे।”

फायर ब्रिगेड कुछ मिनट देर से आती, तो कॉलोनी जल जाती
स्थानीय लोगों के अनुसार आग तेजी से फैल रही थी। दमकल की गाड़ी समय पर पहुंच गई, वरना यह आग पास के मकानों को भी चपेट में ले सकती थी।
मौके पर मौजूद लोग कहते हैं-
“ये बस एक घर नहीं, पूरी गली का मामला बन सकता था।”

18.5 लाख की कार, नियम पूरे, फिर आग कैसे ?
हर्षित गुप्ता ने करीब 18.5 लाख रुपये खर्च कर यह इलेक्ट्रिक कार एक साल पहले खरीदी थी। वे बताते हैं कि चार्जिंग कंपनी के निर्देशों के अनुसार थी, स्लो चार्जिंग के लिए आवश्यक 3 किलोवाट की जगह घर में 6 किलोवाट का लोड है। रात 8:15 बजे कार चार्जिंग पर लगाई गई थी
फिर सवाल उठता है-
जब सब कुछ नियमों के अनुसार था, तो आग किसकी लापरवाही से लगी ?

कंपनी जांच की बात कर रही है, जवाब टाल रही है
घटना के बाद बुद्धवार सुबह MG कंपनी की टेक्निकल टीम मौके पर पहुंची। प्राथमिक जांच में सामने आ रहा है कि आग चार्जिंग पॉइंट से शुरू हुई, हालांकि यह भी कहा गया कि बैटरी तक आग नहीं पहुंची, वरना नुकसान कई गुना बड़ा हो सकता था।
लेकिन जब आग लगने के वास्तविक कारण पर सवाल किया गया, तो जवाब मिला-
“कार को सर्विस सेंटर भेजकर जांच होगी, तभी कुछ कहा जा सकता है।”
यानी फिलहाल न जिम्मेदारी तय हुई, न जवाब।

ई-कारों की रफ्तार तेज, सुरक्षा सवालों में
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों को भविष्य बताकर तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन यह हादसा कई असहज सवाल छोड़ जाता है मसलन क्या ई-कारें वाकई उतनी सुरक्षित हैं, जितना बताया जा रहा है ? क्या कंपनियां सिर्फ मोटी कीमत वसूल रही हैं, या सुरक्षा की जिम्मेदारी भी ले रही हैं ? और क्या सरकार ने चार्जिंग के लिए मजबूत, सुरक्षित और मानकीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया है ?
यूज़र्स भी सावधान हों
विशेषज्ञ मानते हैं कि यूज़र की जागरूकता जरूरी है, घर की वायरिंग उच्च गुणवत्ता की हो, चार्जिंग पॉइंट खुली, हवादार और सुरक्षित जगह पर हो, सस्ते या अनधिकृत चार्जर का उपयोग न किया जाए तथा चार्जिंग के दौरान आग से बचाव के उपकरण उपलब्ध हों।
दहशत में परिवार, इंसाफ की मांग
हर्षित गुप्ता और उनका परिवार अब भी सदमे में है। एक झटके में उनकी गाड़ी जलकर खाक हो गई और ज़िंदगी भर का डर दिल में उतर गया। परिवार कंपनी से पूरा मुआवजा और स्पष्ट जवाब चाहता है।
यह हादसा एक चेतावनी है-
अगर अब भी सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो अगली खबर में शायद “बच गए” लिखने का मौका न मिले।
