गाजियाबाद में कफ़न पहनकर सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी, बेड़ियों में जकड़कर यूजीसी के नए नियमों का विरोध!
प्रदर्शनकारियों ने नियमों को सामान्य वर्ग के खिलाफ बताते हुए
सरकार से तत्काल वापसी की मांग की
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नए नियमों को लेकर देश की शिक्षा व्यवस्था में असंतोष की लहर तेज़ होती जा रही है। आज विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के तत्वाधान में UGC के नियम को काला कानून बताते हुए कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन देने से पहले महासभा ने पैदल मार्च और विरोध प्रदर्शन किया जिसमें सभी प्रदर्शनकारियों ने कफ़न पहनकर खुद को बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। विश्व ब्रह्मऋषि ब्राह्मण महासभा के पीठाधीश्वर ब्रह्मऋषि विभूति बी.के. शर्मा ‘हनुमान’ ने इन नियमों को सामान्य वर्ग के विरुद्ध, संविधान की भावना के विपरीत और सामाजिक संतुलन को तोड़ने वाला बताते हुए सरकार को कड़ी चेतावनी दी है।
बी.के. शर्मा हनुमान ने कहा कि यूजीसी के नए नियम समानता स्थापित करने के बजाय एक वर्ग विशेष को असुरक्षित बनाकर नया भेदभाव खड़ा कर रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इन नियमों के लागू होने के बाद सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए शिक्षा ग्रहण करना और शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में कार्य करना लगभग असंभव हो जाएगा।

इक्विटी कमेटी पर सवाल
नए नियमों के तहत प्रत्येक कॉलेज और विश्वविद्यालय में गठित की जाने वाली इक्विटी कमेटी को लेकर भी उन्होंने गंभीर आपत्ति जताई। नियमों के अनुसार इस समिति में एससी, एसटी, ओबीसी, महिला और दिव्यांग वर्ग के प्रतिनिधियों की अनिवार्य भागीदारी तय की गई है, जबकि सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है।
वैश्य समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं परमार्थ सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष वी के अग्रवाल ने कहा कि ऐसी एकतरफा संरचना में निष्पक्ष जांच की कल्पना ही नहीं की जा सकती। यह व्यवस्था न्याय के बजाय पूर्वाग्रह को बढ़ावा देगी और शिक्षा संस्थानों में अविश्वास का माहौल बनाएगी।
झूठी शिकायतों का रास्ता साफ
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नए नियमों में झूठी शिकायतों पर दंड का प्रावधान हटाए जाने से इसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग होगा। सामान्य वर्ग के छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ बेबुनियाद शिकायतें दर्ज कराई जाएंगी, जिन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। इससे उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और संस्थागत भय का वातावरण बनेगा।

संविधान और मौजूदा कानूनों की अनदेखी
बी.के. शर्मा ‘हनुमान’ ने स्पष्ट किया कि दलित और पिछड़े वर्गों के साथ अन्याय के खिलाफ सभी को एकजुट होना चाहिए, लेकिन समानता के नाम पर किसी एक वर्ग को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान देता है, जबकि ये नए नियम उसी मूल भावना के खिलाफ हैं।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब भारतीय न्याय संहिता में भेदभाव से जुड़े मामलों के लिए पहले से ही कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, तो अलग से समिति बनाकर नई व्यवस्था थोपने की क्या आवश्यकता है।
अराजकता की चेतावनी
बी.के. शर्मा हनुमान ने सरकार से यूजीसी के इन नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर देश में सामाजिक असंतोष और अराजकता फैल सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति का लाभ देशविरोधी शक्तियां उठा सकती हैं, जो राष्ट्रहित के लिए घातक होगा।
इस अवसर पर सुरेंद्र पाल त्यागी, अनिल त्यागी, प्रवीण त्यागी, अश्वनी त्यागी, सोबिंदर त्यागी, रमेश चंद शर्मा, धर्मेंद्र सिंह चौधरी, एडवोकेट शैलेंद्र त्यागी, कल्याण देव, हिमांशु शर्मा, पार्षद नरेंद्र मेहता, सुभाष शर्मा, पवन वर्मा, श्यामलाल सरकार, दिलीप कुमार, अतुल शर्मा, सुबोध कुमार मिश्रा, मोहित कुमार, देवाशीष ओझा, ए के जैन, डॉक्टर नीरज गर्ग, श्याम सिंह पुंडीर, ऋषिपाल शर्मा, सुजीत सिंह, मिलन मंडल सहित सर्वसमाज के सैकड़ो प्रतिनिधि मौजूद थे
