श्रद्धा जब नीयत से हार जाए, तो मंदिर भी सुरक्षित नहीं रहता
दादरी स्थित खाटू श्याम मंदिर
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
ग्रेटर नोएडा/दादरी।“देते हैं भगवान को धोखा, इंसान को क्या छोड़ेंगे” यह पंक्ति अब किसी पुराने फ़िल्मी गीत की नहीं, बल्कि ग्रेटर नोएडा में दादरी के गढ़ी में स्थित खाटू श्याम मंदिर की सच्ची और शर्मनाक हेडलाइन बन चुकी है। शनिवार दोपहर, जब मंदिरों में शांति का वातावरण होता है, उसी समय जरचा रोड स्थित खाटू श्याम मंदिर में दो ऐसे ‘श्रद्धालु’ पहुंचे, जिनकी भक्ति का तरीका काफ़ी आधुनिक और आपराधिक था। एक ने हेलमेट पहन रखा था, शायद भक्ति से ज़्यादा पहचान छुपाने की नीयत से। दूसरा बिना हेलमेट, लेकिन दोनों के इरादे पूरी तरह नंगे।
दोपहर 1 बजकर 25 मिनट पर मंदिर में प्रवेश करते ही वे सीधे दरबार की ओर बढ़ते हैं। आम श्रद्धालु जहाँ घंटा बजाकर भगवान को याद करता है, वहीं इन महानुभावों ने घंटा उतारने का रास्ता चुना। पूरी तसल्ली, इत्मीनान और “श्रद्धा” के साथ मंदिर में टंगे घंटे को खोला गया, बैग में रखा गया, मानो भगवान का प्रसाद पैक किया जा रहा हो।
इतना ही नहीं, भगवान के चरणों में जल रही ज्योति भी इन्हें अनावश्यक लगी। सो, जाते-जाते ज्योति दीपक को भी साथ ले लिया। शायद यह सोचकर कि भगवान तो सर्वत्र हैं, एक दीपक कम हो गया तो क्या फ़र्क पड़ेगा!
सबसे चौंकाने वाला दृश्य वह था, जिसने इस चोरी को अपराध से ज़्यादा व्यंग्य बना दिया। चोरी के बाद में चोर भगवान के सामने हाथ जोड़ते हैं, शीश झुकाते हैं और पूरे शिष्टाचार के साथ प्रणाम करते हैं। मानो पहले ही भगवान से ‘सेटिंग’ कर ली हो, “प्रभु, चोरी हम कर रहे हैं… आप नाराज़ मत होना।”
करीब सात मिनट तक चली यह “श्रद्धा सहित चोरी” अगर उजागर हुई है, तो उसकी वजह भगवान नहीं, बल्कि मंदिर में लगा सीसीटीवी कैमरा है। शायद चोर यह मान बैठे थे कि भगवान सब देखते हैं लेकिन बताते नहीं, यह बात उन्हें नहीं पता थी कि कैमरे देखते भी हैं और पुलिस तक पहुँचाते भी हैं।
घटना को लेकर एक श्रद्धालु एवं पेशे से वकील भूपेंद्र मंगलने गहरी नाराज़गी जताते हुए कहा-
एडवोकेट भूपेंद्र मंगल
“यह सिर्फ़ चोरी नहीं, हमारी आस्था पर सीधा हमला है। जिस घंटे को बजाकर श्रद्धालु भगवान से जुड़ते हैं, उसी को चुरा ले जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। समिति ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और हम चाहते हैं कि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर सख़्त सज़ा मिले।”
वहीं इस घटना पर मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष एवं स्थानीय सभासद मोहित विकल ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा-
सभासद मोहित विकल
“दिनदहाड़े मंदिर में चोरी होना बेहद चिंताजनक है। यह कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक गिरावट को भी दर्शाता है। मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर इस तरह की वारदात बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन से मांग है कि दोषियों को जल्द पकड़कर कड़ी कार्रवाई की जाए और मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था और मज़बूत की जाए।”
पुलिस ने मंदिर समिति की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है। लेकिन असली जांच तो समाज की मानसिकता की होनी चाहिए, आखिर वह कौन-सी सोच है, जिसमें इंसान चोरी भी करता है और भगवान से माफ़ी की उम्मीद भी रखता है ?
यह घटना सिर्फ़ सुरक्षा में चूक नहीं, बल्कि उस सोच का प्रमाण है जहाँ आस्था को भी ‘मैनेज’ किया जा सकता है। जहाँ इंसान मान लेता है कि मंदिर में चोरी कर लेंगे, दो हाथ जोड़ लेंगे और सब बराबर हो जाएगा। याद रखना चाहिए कि भगवान का घर कोई गोदाम नहीं और श्रद्धा कोई ढाल नहीं, जिसके पीछे अपराध छुपाया जा सके। अगर भगवान के सामने हाथ जोड़कर चोरी जायज़ हो जाए, तो फिर कानून, नैतिकता और समाज, तीनों की ज़रूरत ही क्या रह जाएगी ?
दादरी के इस मंदिर में हुई यह वारदात हमें हँसाती भी है, चौंकाती भी है और डराती भी है। हँसाती इसलिए कि तरीका हास्यास्पद है, चौंकाती इसलिए कि दुस्साहस खुला है, और डराती इसलिए कि जब भगवान का घर भी सुरक्षित नहीं, तो इंसान की आस्था कितनी सुरक्षित है ?