सड़क नहीं तो वोट नहीं! सोसायटियों के गेट पर टंगे बैनर, प्रशासन की नींद उड़ाने वाला संदेश!!
कब बनेगी हमतुम रोड ?
कब मिलेगा जवाब ?
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र की बहुचर्चित और बदनाम हो चुकी ‘हमतुम रोड’ अब केवल एक सड़क नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता, राजनीतिक खोखले वादों और सिस्टम की असफलता का प्रतीक बन चुकी है। वर्षों से अधूरी पड़ी इस सड़क से त्रस्त सात हाउसिंग सोसायटियों और मोरटा गांव के हजारों निवासियों ने अब निर्णायक और सीधा टकराव का रास्ता चुन लिया है।
थक-हार कर, अनसुने रहकर, बार-बार अपमानित होकर अब निवासियों ने साफ ऐलान कर दिया है कि जब तक सड़क नहीं बनेगी, वोट नहीं पड़ेगा। जब तक बुनियादी सुविधाएँ नहीं मिलेंगी, टैक्स नहीं दिया जाएगा।

सोसायटियों के गेट पर टंगे बैनर, सिस्टम को दिखाया आइना
हमतुम रोड के दोनों ओर स्थित निलाया ग्रीन, संचार रेजीडेंसी, मीडो विस्टा सहित सात सोसायटियों के मुख्य द्वारों पर बड़े-बड़े बैनर टांग दिए गए हैं, जिन पर मोटे अक्षरों में लिखा है-
“सड़क नहीं तो वोट नहीं”
“सुविधा नहीं तो टैक्स नहीं”
ये बैनर सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि लोकतंत्र के उस आईने की तरह हैं जिसमें प्रशासन और नेताओं को अपनी सूरत साफ दिखाई दे रही है।
धरने, मार्च, ज्ञापन: सब बेअसर, अब आर-पार की लड़ाई
स्थानीय निवासी और लंबे समय से इस सड़क के लिए संघर्ष कर रहे मुरारीलाल शर्मा बताते हैं-

“हमने जीडीए से लेकर जिलाधिकारी तक, नेताओं से लेकर अफसरों तक हर दरवाज़ा खटखटाया। धरने दिए, मार्च निकाले, सड़क पर उतरे। लेकिन नतीजा शून्य रहा। शायद हमारी ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं। अब हमने तय कर लिया है, जब तक सड़क और सुविधाएँ नहीं मिलतीं, हम चुप नहीं बैठेंगे।”
उनकी आवाज़ में आक्रोश भी है और व्यवस्था से टूटा भरोसा भी।
नरक बनी ज़िंदगी, जानलेवा बन चुकी है हमतुम रोड
हजारों परिवारों के लिए यह सड़क रोज़ाना की सज़ा बन चुकी है।गड्ढों से भरी सड़क, बरसात में कीचड़ और जलभराव, धूल से दम घोंटता माहौल, एंबुलेंस और स्कूल बसों की दुर्दशा के चलते यहाँ जीना दूभर हो चला है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दर्जनों लोग अब तक दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं, कई गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन किसी जिम्मेदार पर इसका असर नहीं पड़ा।
प्रशासन और नेताओं की चुप्पी: कब टूटेगा यह मौन ?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हजारों टैक्स देने वाले नागरिक सिर्फ वोट बैंक हैं ? क्या सड़क बनवाने के लिए आंदोलन करना अनिवार्य हो गया है ? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही सिस्टम जागेगा ? जिस क्षेत्र से हर चुनाव में भारी मतदान होता है, उसी क्षेत्र के लोगों को आज वोट बहिष्कार की घोषणा करनी पड़ रही है, यह लोकतंत्र के लिए भी गंभीर चेतावनी है।
अब यह सिर्फ सड़क नहीं, अधिकारों की लड़ाई है
हमतुम रोड को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब स्थानीय समस्या नहीं रहा। यह उस पूरे सिस्टम पर सवाल है जो नागरिकों से टैक्स तो लेता है, लेकिन बदले में उन्हें सुरक्षित सड़क तक नहीं दे पाता। निवासियों ने साफ कर दिया है अब वादों से नहीं, काम से भरोसा बनेगा। अगर प्रशासन और जनप्रतिनिधि अब भी नहीं जागे, तो यह आंदोलन आने वाले चुनावों में बड़ा राजनीतिक संदेश बन सकता है।
