तेज-तर्रार IAS कृष्णा करुणेश बने नोएडा के नए CEO, सिस्टम पर उठे सवालों के बीच मिली जिम्मेदारी!
2022 में गोरखपुर जिले का डीएम नियुक्त किया गया था
गाजियाबाद में एसडीएम और सीडीओ के पद पर रह चुके हैं
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण में प्रशासनिक स्तर पर बड़ा और अहम बदलाव किया गया है। 2011 बैच के आईएएस अधिकारी कृष्णा करुणेश को नोएडा अथॉरिटी का नया मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। उन्होंने डॉ. लोकेश एम की जगह यह जिम्मेदारी संभाली है। यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की संदिग्ध मौत को लेकर प्राधिकरण, प्रशासन और सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं।
विवादों के बीच बदलाव, संदेश साफ
इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला लगातार सुर्खियों में रहा। लापरवाही, जवाबदेही तय न होने और अधिकारियों की भूमिका को लेकर उठे सवालों ने सरकार को भी असहज किया। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद मामले का संज्ञान लिया और एसआईटी जांच के आदेश दिए। इसी क्रम में नोएडा अथॉरिटी के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव को प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
कृष्णा करुणेश: सख्त प्रशासक की छवि
आईएएस कृष्णा करुणेश की गिनती उत्तर प्रदेश के तेज-तर्रार और फील्ड-ओरिएंटेड अधिकारियों में होती है। वह इससे पहले गोरखपुर के जिलाधिकारी रह चुके हैं, जहां कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक अनुशासन और विकास कार्यों को लेकर उनकी कार्यशैली की अलग पहचान बनी। नोएडा अथॉरिटी में वह पहले से ही अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) के तौर पर कार्यरत थे, ऐसे में प्राधिकरण की आंतरिक कार्यप्रणाली, इंजीनियरिंग विंग और लंबित परियोजनाओं की उन्हें गहरी समझ मानी जाती है।
प्रशासनिक अनुभव का लंबा रिकॉर्ड
मूल रूप से बिहार के रहने वाले कृष्णा करुणेश ने एमए और एलएलबी की पढ़ाई की है। यूपी में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, गाजियाबाद में एसडीएम और सीडीओ, हापुड़ और बलरामपुर में जिलाधिकारी रह चुके हैं। यह प्रशासनिक पृष्ठभूमि उन्हें कानून, भूमि, विकास प्राधिकरण और जनहित से जुड़े मामलों में मजबूत बनाती है।
नोएडा के सामने बड़ी चुनौतियां
कृष्णा करुणेश के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं, प्राधिकरण की जवाबदेही और पारदर्शिता बहाल करना, इंजीनियरिंग और परियोजना विभागों में अनुशासन, लंबित योजनाओं और बिल्डर-होमबायर विवादों पर सख्त रुख और सबसे अहम, सिस्टम पर जनता का टूटता भरोसा वापस लाना।
क्या बदलेगा सिस्टम ?
प्रशासनिक हलकों में यह नियुक्ति केवल ट्रांसफर नहीं, बल्कि संदेश मानी जा रही है, लापरवाही और ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं। सवाल यह है कि क्या तेज-तर्रार छवि वाले नए CEO नोएडा अथॉरिटी को सिर्फ कागजी सुधारों से आगे ले जाकर जमीनी बदलाव की ओर ले जा पाएंगे ?
