जरा संभल कर! हेलमेट से मोबाइल तक, हर गलती पर सीधी जेब पर चोट!!

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गाजियाबाद में अब कैमरे तय करेंगे चालान

NEWS1UP

संवाददाता

गाजियाबाद। नगर की सड़कों पर अब “देखा नहीं, रिकॉर्ड हुआ” का दौर शुरू हो चुका है। लंबे इंतजार के बाद इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) पूरी तरह एक्टिव होते ही प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब नियम तोड़ना महंगा पड़ेगा। पुलिसकर्मी चौराहे पर हों या नहीं, AI कैमरे आपकी हर हरकत पर 24×7 नजर रखेंगे।

पहले ही दिन 326 चालान, बिना हेलमेट वाले सबसे ज्यादा फंसे

1 फरवरी से शुरू हुई ITMS कार्रवाई के पहले ही दिन 326 लोगों के ई-चालान कट गए। इनमें से 302 चालान सिर्फ बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों के थे। इसके अलावा 14 रेड लाइट जंप और 10 ट्रिपल राइडिंग के मामले सामने आए। यह आंकड़े खुद बता रहे हैं कि गाजियाबाद में लापरवाही किस स्तर तक पहुंच चुकी है।

नगर आयुक्त विक्रमादित्य मलिक के अनुसार यह कोई एक दिन की मुहिम नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली सख्त कार्रवाई है।

53 करोड़ का हाई-टेक ट्रैफिक कवच

गाजियाबाद नगर निगम स्थित ITMS कंट्रोल रूम का निरीक्षण प्रमुख सचिव अमृत अभिजात, नगर आयुक्त और मेयर सुनीता दयाल ने किया। करीब 53 करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस सिस्टम के रखरखाव पर हर साल 14.4 करोड़ खर्च होंगे। शहर के 78 प्रमुख चौराहों पर 3000 से अधिक HD कैमरे और सेंसर लगाए गए हैं, जो हर लेन और हर सिग्नल पर नजर रख रहे हैं।

इन इलाकों में अब गलती की गुंजाइश नहीं

AI कैमरों से लैस प्रमुख इलाके हापुड़ चुंगी, मोहन नगर, सीमापुरी बॉर्डर, तुलसी निकेतन, नाग द्वार, एलिवेटेड रोड, मेरठ तिराहा, लाल कुआं AI कैमरों से लैस हैं। यानी शहर में एंट्री हो या एग्जिट हर रास्ता निगरानी में है।

कैसे कटता है ई-चालान ?

जैसे ही कोई वाहन स्टॉप लाइन पार करता है, रेड लाइट जंप करता है, बिना हेलमेट या सीट बेल्ट चलता है, ट्रिपल राइडिंग करता है या वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल करता है तो AI कैमरे नंबर प्लेट स्कैन कर लेते हैं। इसके बाद परिवहन विभाग के डेटाबेस से वाहन मालिक की जानकारी निकालकर सीधे मोबाइल पर ई-चालान का SMS भेज दिया जाता है। न बहस, न सिफारिश, सबूत डिजिटल है।

नियम तोड़ने पर कितना देना होगा ?

प्रशासन ने जुर्माने की राशि भी साफ-साफ तय कर दी है- 

बिना हेलमेट वाहन चलाना – 1,000

ट्रिपल राइडिंग (दोपहिया) –1,000

सीट बेल्ट न लगाना – 1,000

रेड लाइट जंप करना – 1,000 से 5,000 तक

वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग – 1,000 से 5,000 तक

यानी अब एक छोटी सी लापरवाही भी हजारों की चोट दे सकती है।

‘सेफ सिटी’ से जुड़ा पूरा नेटवर्क

ITMS को सिर्फ ट्रैफिक तक सीमित नहीं रखा गया है। इसे सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगे 350 अतिरिक्त कैमरों से जोड़ा गया है। इससे पूरे जिले में 3000 से ज्यादा कैमरे अब ट्रैफिक के साथ-साथ अपराध और कानून-व्यवस्था पर भी नजर रखेंगे।

अधिकारियों का मानना है कि जब तक नियम तोड़ने पर आर्थिक चोट नहीं लगेगी, तब तक सुधार मुश्किल है। ITMS के जरिए गाजियाबाद को न सिर्फ जाम-मुक्त बल्कि अनुशासित और सुरक्षित शहर बनाने की कोशिश की जा रही है।

 अगर अब भी हेलमेट को बोझ और मोबाइल को जरूरत समझकर गाड़ी चलाएंगे, तो कैमरा आपकी गलती लिख लेगा, और चालान सीधे आपकी जेब तक पहुंचेगा।

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