हमतुम रोड पर प्रशासनिक लापरवाही ने ली एक और जान!!
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। GDA और जिला प्रशासन की उदासीनता ने एक बार फिर एक परिवार का चिराग बुझा दिया। राजनगर एक्सटेंशन की कुख्यात होती जा रही हमतुम रोड पर मंगलवार देर रात हुए भीषण हादसे में निलाया ग्रीन सोसायटी निवासी मोहित शर्मा की दर्दनाक मौत हो गई। मोहित नोएडा स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत थे और ड्यूटी पूरी कर बाइक से घर लौट रहे थे, तभी एक तेज़ रफ्तार बड़े वाहन ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी।
मोहित शर्मा निलाया ग्रीन सोसायटी के बी-टावर के फ्लैट संख्या 604 में अपने परिवार के साथ रहते थे मोहित नोएडा के सेक्टर 73 स्थित Idemia pvt LTD में जॉब करते थे। अचानक हुए इस हादसे ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। सवाल वही पुराना है, आख़िर कब जागेगा प्रशासन ?

4 साल में 16 मौतें, फिर भी खामोश तंत्र
स्थानीय लोगों के अनुसार, हमतुम रोड पर पिछले चार वर्षों में यह 16वीं मौत है। यही वजह है कि यह सड़क अब स्थानीय निवासियों के बीच ‘मौत की सड़क’ के नाम से बदनाम हो चुकी है। संकरी, जर्जर और अंधेरी इस सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही लगातार जानलेवा साबित हो रही है।
गौर करने वाली बात यह है कि यह कोई पहली चेतावनी नहीं थी। 2 फरवरी को ही निलाया ग्रीन की तृप्ति स्कूटी से स्कूल जाते समय एक ट्रक की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। इसके बावजूद न तो ट्रैफिक नियंत्रण सख्त हुआ, न ही सड़क सुधार का कोई ठोस काम शुरू किया गया।
जनता की गुहार, प्रशासन की बेरुखी
हमतुम रोड के दोनों ओर बसी हाईराइज सोसायटियों और आसपास के गांवों के लोग वर्षों से सड़क को चौड़ा करने, डिवाइडर, स्ट्रीट लाइट और फुटपाथ बनाने की मांग कर रहे हैं। बच्चों, महिलाओं और बुज़ुर्गों ने कई बार सड़क पर उतरकर धरना-प्रदर्शन किए, ज्ञापन सौंपे, अधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन नतीजा शून्य रहा।
स्थानीय निवासी आरोप लगाते हैं कि GDA केवल कागज़ी योजनाओं और बैठकों तक सीमित रह गया है, जबकि जमीनी हकीकत में सड़क आज भी जानलेवा बनी हुई है।
मानवाधिकार आयोग का नोटिस, फिर भी कार्रवाई नदारद
दो दिन पहले ही मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में GDA को नोटिस जारी किया है। इसके बावजूद अब तक न तो सड़क पर अस्थायी सुरक्षा उपाय किए गए हैं और न ही भारी वाहनों की आवाजाही पर कोई रोक लगाई गई है। यह प्रशासनिक संवेदनहीनता नहीं तो और क्या है?
सवालों के घेरे में GDA
क्या 16 मौतें भी सड़क सुधार के लिए पर्याप्त नहीं थीं ?
हादसों के बाद भी ट्रैफिक प्लान क्यों नहीं बदला गया ?
नोटिस मिलने के बाद भी GDA हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठा है ?
अगर सड़क समय रहते चौड़ी और सुरक्षित कर दी जाती, तो मोहित शर्मा आज ज़िंदा नहीं होते।
बढ़ता जनाक्रोश, टूटता भरोसा
इस ताज़ा हादसे के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है। लोग खुलकर कह रहे हैं कि अगर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज़ होगा। सवाल सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का है।
