शाबाश राजन दीप! 400 रन बनाकर इतिहास रचने वाले बने दूसरे बल्लेबाज!!
सीके नायडू ट्रॉफी में इससे पहले यह कारनामा
यशवर्धन दलाल ने किया था
NEWS1UP
स्पोर्ट्स डेस्क
झारखण्ड क्रिकेट ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा अगर जुनून और अनुशासन से मिले, तो इतिहास रचने से कोई नहीं रोक सकता। अंडर-23 सीके नायडू ट्रॉफी के मौजूदा सत्र में झारखण्ड ने मेघालय को पारी और 337 रनों से रौंदकर न सिर्फ एक बड़ी जीत दर्ज की, बल्कि भारतीय घरेलू क्रिकेट को एक यादगार कहानी भी दे दी। इस जीत के केंद्र में रहे, कप्तान राजन दीप, जिनकी 400 रनों की नाबाद पारी ने क्रिकेट प्रेमियों को रोमांच और गर्व से भर दिया।
राजन दीप: जब कप्तानी ने बल्ले से इतिहास लिखा
यह सिर्फ एक बड़ी पारी नहीं थी, यह संयम, आक्रामकता और नेतृत्व का अद्भुत संगम था। 33 रन पर दो विकेट गिरने के बाद जब टीम दबाव में थी, तब कप्तान राजन दीप ने मोर्चा संभाला और ऐसा खेल दिखाया, जो वर्षों तक याद रखा जाएगा। 387 गेंदों में 43 चौकों और 7 छक्कों से सजी उनकी नाबाद 400 रनों की पारी, मैदान के हर कोने में गूंजती रही। बाउंड्री से आए 53.50 प्रतिशत रन और 147 सिंगल, यह आंकड़े बताते हैं कि यह पारी सिर्फ ताकत की नहीं, बल्कि क्रिकेटिंग समझ की मिसाल थी।
राजन दीप सीके नायडू ट्रॉफी में 400 रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज बने। उन्होंने यह कारनामा पूरा करते ही पारी घोषित की, जैसे कहना चाहते हों, “टीम पहले, रिकॉर्ड बाद में।” यह वही सोच है, जो महान खिलाड़ियों की पहचान बनती है।

साझेदारियां जिन्होंने जीत की नींव रखी
नकुल यादव के साथ 276 रनों की साझेदारी, फिर कौनाइन कुरैश (155 रन) और नितेन पांडे (173 रन) के साथ मजबूत गठजोड़, इन साझेदारियों ने झारखण्ड की पहली पारी को 700 रन तक पहुंचाया। यह स्कोर सिर्फ आंकड़ा नहीं था, यह मेघालय पर मनोवैज्ञानिक बढ़त भी थी।
गेंदबाज़ी में अमित कुमार का कहर
जहां बल्लेबाज़ी ने मंच सजाया, वहीं गेंदबाज़ी में अमित कुमार ने मेघालय की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। पहली पारी में 18 ओवर में 7 विकेट लेकर उन्होंने विरोधी टीम को 102 रन पर समेट दिया। दूसरी पारी में भी गेंदबाज़ों ने दबाव बनाए रखा, तनिष के 3 विकेट, हर्ष राज मनीषी के 2-2 विकेट ने जीत को औपचारिकता बना दिया।
नवोदित क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा
राजन दीप की यह पारी हर उस युवा खिलाड़ी के लिए संदेश है, जो सीमित संसाधनों या शुरुआती असफलताओं से घबराता है। यह कहानी कहती है कि कप्तानी सिर्फ टॉस जीतने का नाम नहीं, बल्कि संकट में आगे बढ़कर जिम्मेदारी उठाने का साहस है। राजन ने दिखा दिया कि सपने उम्र और स्तर नहीं देखते, बस मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास मांगते हैं।
