गाजियाबाद। इंदिरापुरम के न्यायखंड-1 स्थित एक आवासीय सोसायटी में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब देर रात अचानक एक के बाद एक पुलिस की गाड़ियां और चीता बाइक सोसायटी गेट पर आकर रुकीं। सायरन और पुलिस मूवमेंट देख कर लोग अपने-अपने फ्लैट की बालकनियों और गलियारों में निकल आए।
दरअसल, विधायक कॉलोनी के एक फ्लैट से तेज म्यूजिक और शोर-शराबे की लगातार शिकायत 112 पर की गई थी। बताया गया कि फ्लैट के भीतर चल रही पार्टी से इतनी तेज आवाजें आ रही थीं कि आसपास के परिवारों, बुजुर्गों और बच्चों का रहना दूभर हो गया था। पड़ोसियों द्वारा कई बार अनुरोध और टोके जाने के बावजूद जब शोर बंद नहीं हुआ, तो मजबूरी में पुलिस को कॉल करना पड़ा।
प्रतीकात्मक इमेज
सूचना मिलते ही 112 पर तैनात पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे, लेकिन हालात इतने बिगड़े हुए थे कि स्थिति उनके नियंत्रण से बाहर होती दिखी। इसके बाद अभयखंड पुलिस चौकी को सूचित किया गया। करीब आधा दर्जन अतिरिक्त पुलिसकर्मियों के पहुंचने के बाद हंगामा कर रहे युवकों को फ्लैट से बाहर निकालकर चौकी लाया गया।
चौकी इंचार्ज ओमवीर सिंह ने बताया कि उक्त फ्लैट में किराये पर रह रहे एक युवक का जन्मदिन था। उसके 6-7 दोस्त पार्टी में शामिल थे और अत्यधिक शोर-शराबा कर रहे थे। पुलिस ने सभी के खिलाफ शांतिभंग की धारा में चालान किया है।
सवाल सिर्फ एक पार्टी का नहीं
यह घटना किसी एक सोसायटी या एक रात तक सीमित नहीं है। एनसीआर समेत शहरी इलाकों की अधिकांश हाउसिंग सोसायटियों में यह एक आम समस्या बनती जा रही है, किराये के फ्लैट, तेज म्यूजिक, देर रात पार्टियां और पड़ोसियों की शांति में खलल।
यह मामला सभी अपार्टमेंट सोसायटियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि “व्यक्तिगत खुशी, सामूहिक शांति से ऊपर नहीं हो सकती।” जन्मदिन हो या कोई और जश्न, सोसायटी परिसर में रहते हुए नियम, समय और पड़ोसियों की सहमति का सम्मान जरूरी है।
कानूनी मामलों जानकार कहते हैं कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए AOA को सख्त नॉइज़ पॉलिसी लागू करनी चाहिए, किरायेदारों के लिए नियमों की लिखित जानकारी अनिवार्य हो और देर रात तेज म्यूजिक और पार्टियों पर ज़ीरो टॉलरेंस अपनाई जाए।