February 11, 2026

मकर संक्रांति 2026: जानें आज कितने बजे तक रहेगा पुण्यकाल ?

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जब सूर्य साधना बनती है

आत्मबल और भाग्य परिवर्तन का माध्यम!

NEWS1UP

धर्म-कर्म डेस्क

सनातन परंपरा में मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि सूर्य चेतना के जागरण का महापर्व मानी जाती है। यही वह दिव्य क्षण है जब भगवान भास्कर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और पृथ्वी पर उत्तरायण का शुभारंभ होता है, जिसे शास्त्रों में देवताओं का दिन कहा गया है।

कितने बजे तक रहेगा पुण्यकाल ?

प्रसिद्ध ज्योतिषविद् एवं संत स्वामी इंदुभवानंद तीर्थ जी महाराज के अनुसार 15 जनवरी 2026, गुरुवार दोपहर 01:39 बजे तक मकर संक्रांति का पुण्यकाल रहेगा, इस अवधि में किया गया स्नान-दान, सूर्य अर्घ्य और जप-तप अक्षय पुण्य प्रदान करता है।

क्यों विशेष है मकर संक्रांति की सूर्य साधना ?

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा, तेज, नेतृत्व और आत्मसम्मान का कारक माना गया है। मकर संक्रांति के दिन की गई सूर्य साधना बुद्धि को प्रखर बनाती है, आत्मबल और निर्णय क्षमता बढ़ाती है, समाज में मान-सम्मान और यश दिलाती है और जीवन की बाधाओं से संघर्ष करने की शक्ति देती है।

विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में सूर्य नीच का हो या सूर्य की महादशा/अंतरदशा चल रही हो, उनके लिए यह दिन अत्यंत फलदायी माना गया है।

मकर संक्रांति पर अवश्य करें ये 14 शुभ उपाय

सूर्योदय से पहले स्नान करें

शरीर पर तिल लगाकर स्नान करने से दोष नाश होता है

सूर्य संक्रमण काल में विधिवत सूर्य पूजन करें

तांबे के लोटे से जल, तिल, हल्दी व अक्षत मिलाकर अर्घ्य दें

भगवान सूर्य का तर्पण अवश्य करें

तिल से हवन करें, तिल को रोगनाशक माना गया है

अपने इष्ट देव या गुरु मंत्र का जप करें

सूर्याष्टकं, चाक्षुषोपनिषद या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें

सूर्य के 108 नामों का जप विशेष फल देता है

तिल से बने खाद्य पदार्थों का सेवन करें

खिचड़ी का दान व सेवन करें

देवालय में तिल-गुड़ का दान करें

तांबे के पात्र में तिल भरकर दान करें

जरूरतमंदों को कंबल व ऊनी वस्त्र दान करें

दान न करने पर क्या कहती हैं मान्यताएँ ?

शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति पर स्नान-दान करने वाला व्यक्ति पूरे वर्ष सुख, सौभाग्य और आरोग्य प्राप्त करता है, जबकि इस दिन पुण्य कर्मों से विमुख रहने वाला व्यक्ति दीर्घकालीन दरिद्रता का भागी बनता है, यह चेतावनी नहीं, बल्कि कर्म सिद्धांत का संकेत है।

आत्मविकास का पर्व है मकर संक्रांति

मकर संक्रांति पर की गई सूर्य साधना केवल बाहरी समृद्धि नहीं, बल्कि आत्मिक विकास का मार्ग खोलती है। सूर्य आत्मा के कारक हैं, और जब आत्मा प्रबल होती है, तो जीवन स्वयं प्रकाशमान हो उठता है।

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