“पापा… सॉरी”: सुसाइड नोट के शब्दों में कैद तीन बहनों का आख़िरी दर्द!
सुसाइड नोट ने पूछा सवाल
बच्चों की डिजिटल दुनिया कितनी सुरक्षित ?
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। भारत सिटी सोसाइटी में तीन नाबालिग बहनों की मौत के मामले में मिला सुसाइड नोट अब जांच का सबसे अहम आधार बन गया है। एक पन्ने पर लिखे कुछ वाक्य “इस डायरी में जो कुछ भी लिखा है, वो सब पढ़ लो… आई एम सॉरी, पापा” के साथ बनाया गया रोते चेहरे का इमोजी, पुलिस को संकेत दे रहा है कि बच्चियों के मन में गहरा डर, अपराधबोध और किसी अनकहे दबाव की मौजूदगी थी।
डायरी का ज़िक्र, पर डायरी कहां ?
सुसाइड नोट में “डायरी” का उल्लेख है, लेकिन वह अभी तक बरामद नहीं हुई है। पुलिस मान रही है कि उसी डायरी में वे बातें दर्ज होंगी, जो बच्चियां खुलकर किसी से नहीं कह पा रही थीं। यही वजह है कि फ्लैट की तलाशी दोबारा ली जा रही है और डिजिटल नोट्स, ड्राफ्ट्स व क्लाउड बैक-अप्स भी खंगाले जा रहे हैं।
माफी के शब्द और ‘आई एम सॉरी’ का मनोविज्ञान
विशेषज्ञों के मुताबिक, सुसाइड नोट में बार-बार माफी मांगना अक्सर यह दर्शाता है कि लिखने वाला खुद को किसी गलती का दोषी मान रहा होता है, चाहे वह वास्तविक हो या किसी बाहरी दबाव से उपजा भ्रम। रोते इमोजी का इस्तेमाल यह भी संकेत देता है कि बच्चियां भावनात्मक रूप से टूट चुकी थीं और वे अपनी पीड़ा शब्दों में पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पा रही थीं।

ऑनलाइन टास्क या अदृश्य दबाव ?
जांच एजेंसियां यह जानने में जुटी हैं कि कहीं किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, टास्क या चैट के जरिए बच्चियों पर डर, धमकी या “नियम तोड़ने पर सज़ा” जैसा दबाव तो नहीं बनाया गया। सुसाइड नोट में सीधे किसी का नाम नहीं है, लेकिन “सब सच है” जैसे शब्द पुलिस को इस दिशा में ले जा रहे हैं कि कोई ऐसा सच था जिसे बच्चियां सामने लाने से डर रही थीं।
एक साथ निर्णय: संयोग या बाध्यता ?
तीनों का एक साथ कदम उठाना जांच का दूसरा बड़ा पहलू है। नोट में सामूहिक निर्णय का संकेत मिलता है, जैसे वे किसी साझा स्थिति से निकलने का रास्ता नहीं देख पा रही थीं। यह व्यवहार टास्क-आधारित गेम्स या ग्रुप-प्रेशर से जुड़े मामलों में पहले भी देखा गया है, जहां बच्चे हर काम “एक साथ” करने लगते हैं।
नोट के शब्दों ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि क्या बच्चियों को समय रहते काउंसलिंग या भरोसेमंद संवाद का मौका मिला ? क्या स्कूल या परिवार स्तर पर उनके व्यवहार में आए बदलाव पकड़े जा सके ? पुलिस इन सभी पहलुओं पर बयान दर्ज कर रही है।
मोबाइल फोन, ऐप डेटा, चैट हिस्ट्री और संभावित डायरी, इन सबके सामने आने के बाद ही सुसाइड नोट के “सब सच है” की परतें खुलेंगी। फिलहाल, पुलिस का कहना है कि नोट किसी एक कारण की ओर नहीं, बल्कि लंबे समय से बने मानसिक दबाव की ओर इशारा करता है।
