अब सरकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य होगा ‘वंदे मातरम्!!
जब किसी सभागार में सुर उठते हैं “वंदे मातरम्…” तो वह केवल एक गीत नहीं रहता, वह स्मृति बन जाता है। स्मृति उस संघर्ष की, जिसने भारत को स्वतंत्रता दी; स्मृति उस माटी की, जिसे माँ कहकर पुकारा गया। आज़ादी के दशकों बाद अब पहली बार भारत सरकार ने इस राष्ट्रीय गीत को केवल भावनाओं तक सीमित न रखकर, उसे औपचारिक सम्मान और स्पष्ट मर्यादा के साथ राष्ट्रीय मंच पर स्थापित कर दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी नया प्रोटोकॉल दरअसल एक प्रशासनिक आदेश से कहीं अधिक है, यह उस सांस्कृतिक आत्मा की पुनःस्वीकृति है, जिसे लंबे समय तक अस्पष्टता के बीच छोड़ दिया गया था।

NEWS1UP
भूमेश शर्मा
नई दिल्ली। स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा और राष्ट्रभाव का स्वर ‘वंदे मातरम्’ अब औपचारिक रूप से देश के सरकारी मंचों पर अनिवार्य रूप से गूंजेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर पहली बार विस्तृत और स्पष्ट प्रोटोकॉल जारी करते हुए निर्देश दिया है कि कई आधिकारिक और सरकारी कार्यक्रमों में इसका गायन या वादन अनिवार्य होगा। आदेश के अनुसार यदि किसी आयोजन में ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ दोनों प्रस्तुत किए जाते हैं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद राष्ट्रगान होगा।
28 जनवरी को जारी यह 10 पन्नों का आदेश सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों और संवैधानिक संस्थाओं को भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय गीत के छह अंतरों वाला 3 मिनट 10 सेकंड का पूरा आधिकारिक संस्करण ही बजाया या गाया जाएगा और इसके दौरान उपस्थित लोगों को सम्मान में सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा।

गृह मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक तिरंगा फहराने के समय, राष्ट्रपति के आगमन और प्रस्थान पर, राष्ट्र के नाम उनके संबोधन से ठीक पहले और बाद में, साथ ही राज्यपाल और उपराज्यपाल के औपचारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि गीत किसी फिल्म या डॉक्यूमेंट्री का हिस्सा हो, तो दर्शकों से खड़े होने की अपेक्षा नहीं होगी।
अब तक जहां राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के लिए स्पष्ट नियम और समय-सीमा तय थी, वहीं ‘वंदे मातरम्’ को लेकर कोई औपचारिक सरकारी व्यवस्था नहीं थी। नया आदेश इस लंबे समय से चली आ रही अस्पष्टता को समाप्त करता है। सरकार ने कार्यक्रमों को तीन श्रेणियों में बांटकर यह भी तय किया है कि किन अवसरों पर केवल वादन होगा, कहां सामूहिक गायन किया जाएगा और स्कूलों जैसे शैक्षणिक संस्थानों में इसे संस्कार के रूप में कैसे अपनाया जाएगा।
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत को लेकर सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने पर जोर दे रही है। संसद में हाल ही में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं जयंती पर चर्चा हुई थी और इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड की थीम भी “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम्” रखी गई थी।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत रहा है। अब गृह मंत्रालय के नए प्रोटोकॉल के साथ ‘वंदे मातरम्’ को न केवल सम्मान मिला है, बल्कि उसे राष्ट्र के औपचारिक जीवन में स्पष्ट स्थान भी प्राप्त हुआ है।
