नोएडा–दिल्ली के बाद अब गाजियाबाद ? खुले नाले, खुले बेसमेंट और प्रशासन की खामोशी!
नोएडा के बाद दिल्ली में भी गड्ढा मौत
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। नोएडा और दिल्ली में खुले गड्ढों में गिरकर लोगों की मौत के बाद भी गाजियाबाद प्रशासन ने कोई ठोस सबक नहीं लिया है। शहर के कई प्रमुख स्थानों पर जानलेवा हालात बने हुए हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। सवाल यह है कि क्या गाजियाबाद प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है ?
हापुड़ चुंगी चौराहा: फुटओवर ब्रिज बना खतरे का रास्ता

हापुड़ चुंगी चौराहे पर स्थित फुटओवर ब्रिज को एक तरफ से सीधे गहरे नाले में उतार दिया गया है। न तो वहां कोई सुरक्षा रेलिंग है, न चेतावनी बोर्ड और न ही बैरिकेडिंग। रात के समय यह स्थान पूरी तरह अंधेरे में रहता है, जिससे पैदल राहगीरों, बुज़ुर्गों और बच्चों के लिए यह पुल मौत का जाल बन चुका है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया है।
NH-24 जयपुरिया ग्रीन्स टाउनशिप: खुला बेसमेंट, खुला खतरा

इसी तरह एनएच-24 स्थित जयपुरिया ग्रीन्स टाउनशिप में एक बेहद चौड़ा और गहरा बेसमेंट लंबे समय से खुला पड़ा है। आसपास रिहायशी इलाका होने के बावजूद इसके आसपास कोई सुरक्षा इंतज़ाम नहीं किए गए हैं। बारिश के मौसम में यह बेसमेंट पानी से भरकर और भी जानलेवा हो सकता है। पहले ही बिल्डर इसमें सोसायटियों सीवर का पानी अवैध रूप से छोड़ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि यह इलाका मुख्य हाईवे से सटा होने के बावजूद प्रशासन और संबंधित विभागों की नजर से बाहर बना हुआ है।
राजनगर एक्सटेंशन: सड़क बनी, सुरक्षा नहीं

राजनगर एक्सटेंशन में पुलिस चौकी से क्लासिक रेजिडेंसी सोसायटी तक बनाई गई सड़क के साथ गहरा नाला खुला छोड़ दिया गया है। सड़क पर रोज़ाना भारी ट्रैफिक चलता है, लेकिन नाले पर न तो मजबूत रेलिंग है और न ही कोई स्थायी कवर। हल्की सी चूक किसी बड़े हादसे में बदल सकती है, खासकर रात और बारिश के दौरान।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस संबंध में कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन प्रशासन और नगर निगम की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
दिल्ली–नोएडा की घटनाओं से भी नहीं चेता प्रशासन
जनवरी में नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत और हाल ही में दिल्ली के जनकपुरी में खुले गड्ढे में गिरकर बैंक मैनेजर की मौत ने पूरे सिस्टम की लापरवाही उजागर कर दी है। इसके बावजूद गाजियाबाद में खुले नाले, अधूरे पुल और बिना सुरक्षा के गड्ढे ज्यों के त्यों बने हुए हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब हादसा होता है, तब जांच कमेटी बनती है, लेकिन उससे पहले रोकथाम क्यों नहीं होती ? क्या प्रशासन सिर्फ़ हादसे के बाद ही जागेगा ? जब तक समय रहते इन खतरनाक स्थानों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक गाजियाबाद में भी किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
