पीरागढ़ी ट्रिपल सुसाइड केस: जब ‘धनवर्षा’ के भ्रम ने तीन जिंदगियां निगल लीं!
NEWS1UP
अपराध डेस्क
नई दिल्ली। पीरागढ़ी फ्लाईओवर के पास कार में मिली तीन लाशें किसी सड़क हादसे की कहानी नहीं कहतीं, बल्कि उस अंधविश्वास की कीमत बताती हैं, जो आज भी लोगों की सोच पर हावी है। दिल्ली के इस ट्रिपल सुसाइड केस में सामने आया स्वयंभू बाबा कमरुद्दीन दरअसल उस मानसिक अंधेरे का चेहरा है, जिसमें तर्क, विज्ञान और समझ सब दम तोड़ देते हैं।
चमत्कार का लालच, मौत का रास्ता
कमरुद्दीन ने खुद को ‘बाबा’, ‘मौलाना’ और तांत्रिक बताकर लोगों को यह भरोसा दिलाया कि वह धनवर्षा करा सकता है। उसने कहा, एक महिला चाहिए, लंबे बाल हों, विशेष अनुष्ठान होगा और ऊपर से पैसा बरसेगा। यह दावा सुनकर कोई हंसा नहीं, कोई सवाल नहीं उठा। तीनों लोगों ने इसे सच मान लिया। यहीं से अंधविश्वास ने ज़हर का रूप ले लिया।

लड्डू में मिला ज़हर, विश्वास में डूबी मौत
पुलिस जांच में सामने आया कि बाबा ने लड्डू में सल्फास और नींद की गोलियां मिलाकर तीनों को खिला दीं। यह सिर्फ हत्या नहीं थी, यह अंधविश्वास का अंतिम चरण था, जहां इंसान अपनी जान तक सौंप देता है। जिस व्यक्ति को चमत्कार करने वाला माना गया, उसी के हाथों ज़िंदगी खत्म हो गई।
एक साल तक पनपता भ्रम
कमरुद्दीन कोई अचानक आया ठग नहीं था। वह करीब एक साल से इन लोगों के संपर्क में था। धीरे-धीरे विश्वास बढ़ाया गया, डर और उम्मीद का खेल खेला गया और आखिरकार उन्हें पूरी तरह अपने वश में कर लिया गया। अंधविश्वास ऐसे ही काम करता है, धीरे, चुपचाप और गहराई से।
इलाज के नाम पर जादू-टोना
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लोगों को बीमारी के इलाज के नाम पर बुलाता था। वह पथरी निकालने जैसे दावे करता था, अनुष्ठान दिखाता था और खुद को चमत्कारी साबित करता था। जब बीमारी का डर और चमत्कार की उम्मीद मिलती है, तो इंसान सोचने की ताकत खो देता है।
तीन मौतें, एक कड़वा सच
रणधीर (76 वर्ष), शिव नरेश सिंह (47 वर्ष) और लक्ष्मी देवी (40 वर्ष) की मौत यह सवाल छोड़ जाती है, क्या अंधविश्वास आज भी इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी है ? यह मामला बताता है कि जब इंसान तर्क छोड़ देता है और आंख बंद करके किसी ‘बाबा’ पर भरोसा कर लेता है, तब मौत सिर्फ एक अनुष्ठान दूर होती है।
…अदृश्य लेकिन घातक
पीरागढ़ी केस यह साबित करता है कि अंधविश्वास कोई निजी मान्यता नहीं, बल्कि जानलेवा सोच बन सकता है। धनवर्षा, चमत्कार, तंत्र-मंत्र ये सब सपने दिखाते हैं, लेकिन अंत अक्सर एक ही होता है, सब कुछ खत्म।
