भारत–अमेरिका कृषि व्यापार संधि के विरोध में भारतीय किसान यूनियन मंच का प्रदर्शन!
राष्ट्रपति के नाम सौंपा गया ज्ञापन
संधि निरस्त करने की मांग
NEWS1UP
संवाददाता
दादरी (गौतमबुद्धनगर)। भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के मध्य हाल ही में हुई कृषि व्यापार संधि के विरोध में आज भारतीय किसान यूनियन मंच के तत्वावधान में तहसील दादरी परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया गया। किसानों ने इस संधि को भारतीय कृषि और किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए इसके निरस्तीकरण की मांग की। इस संबंध में भारत सरकार के नाम माननीय राष्ट्रपति महोदया को संबोधित एक ज्ञापन भी सौंपा गया।
प्रदर्शन के दौरान भारतीय किसान यूनियन मंच के राष्ट्रीय महासचिव मास्टर मनमिंदर भाटी ने कहा कि भारत–अमेरिका के बीच हुई कृषि ट्रेड डील से भारतीय किसानों को गंभीर आर्थिक और सामाजिक नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संधि बहुराष्ट्रीय कंपनियों और विदेशी कृषि उत्पादकों के हित में है, जबकि देश के किसानों की आजीविका पर सीधा संकट खड़ा करती है।

संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. यामीन ने कहा कि विदेशी कृषि उत्पादों के सस्ते आयात से देश में स्थानीय फसलों के दाम गिरेंगे। पहले से बढ़ती उत्पादन लागत के बावजूद किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर होगी।
ज़िलाध्यक्ष अक्षय मुखिया ने कहा कि इस समझौते का सबसे अधिक दुष्प्रभाव छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ेगा। उन्होंने आशंका जताई कि किसान आर्थिक संकट की स्थिति में पहुंच जाएंगे और इससे देश की कृषि आत्मनिर्भरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
प्रदेश प्रभारी विक्रांत भाटी ने कहा कि देश का किसान पहले से ही कर्ज, महंगाई और लागत बढ़ने की मार झेल रहा है। ऐसे में इस प्रकार की कृषि व्यापार संधियां किसानों की परेशानियों को और बढ़ाएंगी। उन्होंने कहा कि किसान आए दिन आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मूल समस्याओं की अनदेखी कर रही है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण भड़ाना ने सरकार से मांग की कि कृषि व्यापार समझौते की पुनः गहन समीक्षा कराई जाए तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी गारंटी दी जाए, ताकि किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम मिल सके।
इस मौके पर अजब सिंह भाटी, अब्दुल कादिर, आस मोहम्मद, विकास कलशन, दानिश, अब्दुल हसन, संजय भाटी, दीपांशु भाटी, शौरभ, इमरान, गुलफाम सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। किसानों ने एक स्वर में सरकार से कृषि हितैषी नीतियां लागू करने और किसान विरोधी समझौतों को रद्द करने की मांग की।
