क्लब, जिम और स्विमिंग पूल के पंजीकरण की अनिवार्यता
निवासियों को बढ़ती मेंटिनेंस लागत की चिंता
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जनपद में जिला क्रीड़ाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी नोटिस के बाद शहर की रिहायशी सोसायटियों में खलबली मच गई है। नोटिस में सभी सोसायटियों, क्लबों और खेल अकादमियों को 7 दिन के भीतर खेल विभाग में पंजीकरण कराने का निर्देश दिया गया है। चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समयसीमा में अनुपालन न करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जैसे ही यह पत्र सोसायटी प्रबंधन समितियों तक पहुंचा, कई हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में आपात बैठकों का दौर शुरू हो गया। खासतौर पर वे सोसायटियां जहां क्लब हाउस, जिम, स्विमिंग पूल, बैडमिंटन कोर्ट या अन्य खेल सुविधाएं संचालित हैं, वहां असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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पहले ही दे रहे हैं भारी मेंटिनेंस
सोसायटियों के निवासियों का कहना है कि वे पहले से ही क्लब, जिम और स्विमिंग पूल के संचालन व रखरखाव के लिए मोटी मेंटिनेंस राशि चुका रहे हैं। ऐसे में यदि खेल विभाग में पंजीकरण, लाइसेंस शुल्क और अन्य औपचारिकताएं जोड़ी जाती हैं तो इसका सीधा असर मासिक मेंटिनेंस पर पड़ेगा।
एक वरिष्ठ निवासी ने कहा-
“हम हर महीने हजारों रुपये मेंटिनेंस देते हैं। यदि अब रजिस्ट्रेशन, निरीक्षण और अन्य शुल्क जोड़े जाएंगे तो सोसायटी की लागत बढ़ेगी और अंततः बोझ हम पर ही आएगा।”
एओए और मेंटिनेंस एजेंसी दुविधा में
कई अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) के पदाधिकारी भी इस नोटिस को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अधिकांश सोसायटियों में खेल सुविधाएं केवल निवासियों के उपयोग के लिए हैं, वे व्यावसायिक रूप से संचालित नहीं होतीं। ऐसे में उन्हें किस श्रेणी में रखा जाएगा, इस पर स्थिति साफ होनी चाहिए।
कुछ मेंटिनेंस एजेंसियों का तर्क है कि यदि हर सोसायटी को औपचारिक खेल संस्था की तरह पंजीकृत किया जाएगा, तो नियमों के पालन में अतिरिक्त स्टाफ, सुरक्षा मानक और दस्तावेजी प्रक्रिया की जरूरत होगी, जिससे खर्च बढ़ना तय है।
प्रशासन सख्त, कार्रवाई के संकेत
जिला क्रीड़ाधिकारी कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि शासनादेश के अनुरूप सभी खेल गतिविधियों का पंजीकरण अनिवार्य है और बिना अनुमति संचालन पर कार्रवाई होगी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम खेल गतिविधियों को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए उठाया गया है।