February 15, 2026

वैलेंटाइन डे पर मौत: प्रेम, प्रेशर और डिजिटल प्रताड़ना के साए में 17 वर्षीय छात्र की संदिग्ध मौत!

0
0
0

कथित ‘मर जाओ’ संदेश की पड़ताल

परिवार ने ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया

NEWS1UP

अपराध डेस्क

प्रयागराज। वैलेंटाइन डे, जिसे युवा दिलों के जश्न का दिन माना जाता है, उसी दिन प्रयागराज के टैगोर टाउन से एक ऐसी खबर आई जिसने उत्सव को मातम में बदल दिया। 17 वर्षीय आशुतोष प्रताप गिरी उर्फ अमन का शव उसके कमरे में फांसी के फंदे से लटका मिला। पहली नजर में मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन परिवार के सवाल इस कहानी को कहीं अधिक जटिल बना रहे हैं।

सिर्फ ‘ब्रेकअप’ नहीं, क्या था दबाव का दायरा ?

अमन 12वीं का छात्र था और राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की तैयारी कर रहा था। परिजनों के अनुसार, उसका प्रतापगढ़ की एक युवती से प्रेम संबंध था, जो खुद भी एनडीए की तैयारी कर रही थी। बताया जा रहा है कि वैलेंटाइन डे से ठीक पहले दोनों के बीच अनबन हुई थी।

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह महज भावनात्मक टूटन का मामला है, या फिर डिजिटल युग की नई किस्म की प्रताड़ना का ? पिता का आरोप है कि लड़की ने अमन को मैसेज भेजा “मर जाओ” परिवार का दावा है कि मोबाइल चैट और एक कथित पत्र में भी ऐसे शब्द मिले हैं, जिनमें संबंध खत्म करने के साथ ‘मर जाने’ जैसी बातें लिखी गईं।

घटनास्थल पर उठे सवाल

परिजन इस मौत को संदिग्ध मान रहे हैं। उनका कहना है कि जब अमन फंदे से लटका मिला, तो उसके दोनों पैर नीचे की ओर मुड़े हुए थे, ऐसी स्थिति जिसे वे सामान्य आत्महत्या की स्थिति से अलग बता रहे हैं। उन्होंने लड़की और उसके कुछ परिचितों पर ब्लैकमेलिंग और प्रताड़ना का आरोप लगाया है।

घटना की जानकारी देते स्थानीय पुलिस अधिकारी

 

मामले की सूचना मिलते ही जार्जटाउन थाना पुलिस मौके पर पहुंची, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मोबाइल फोन जब्त कर डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी। पुलिस कुछ लोगों से पूछताछ भी कर रही है। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच इस मामले की दिशा तय करेगी।

लव, कम्पटीशन और मेन्टल प्रेशर

यह घटना केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं है; यह उस दबाव की भी कहानी है जिसमें आज का युवा जी रहा है। एनडीए जैसी प्रतिस्पर्धी परीक्षा की तैयारी, पारिवारिक अपेक्षाएं, और किशोरावस्था की भावनात्मक उलझनें, इन सबके बीच यदि डिजिटल माध्यम से अपमान, धमकी या अस्वीकृति जुड़ जाए, तो मानसिक संतुलन डगमगा सकता है।

मनोचिकित्सकों का मानना है कि किशोरावस्था में भावनात्मक अस्वीकृति को संभालने की क्षमता अभी विकसित हो रही होती है। ऐसे में कठोर या उकसावे वाले संदेश गंभीर असर डाल सकते हैं। हालांकि, यह भी उतना ही जरूरी है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर न पहुंचा जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!