गौर कैस्केड में AOA अध्यक्ष मनोनयन और सचिव पद पर विवाद!
AOA में नियमों को लेकर खींचतान
डीआर की चुप्पी कटघरे में
NEWS1UP
विशेष संवाददाता
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की अनुशासित और बेहतर रख-रखाव वाली सोसाइटी के तौर पर पहचानी जाने वाली गौर कैस्केड इन दिनों अपने ही अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) के चुनावों से उपजे गंभीर विवादों के कारण चर्चा के केंद्र में है। यह मामला इसलिए भी असामान्य है क्योंकि आरोप किसी बाहरी निवासी या चुनाव में हारे प्रत्याशी नहीं, बल्कि खुद बोर्ड के भीतर से सामने आ रहे हैं, और आरोप भी महज़ प्रक्रियात्मक नहीं, बल्कि नियमों की कथित खुलेआम अनदेखी से जुड़े हैं।
इस्तीफों से खुली परतें
11 मई 2025 को संपन्न AOA चुनावों में 10 सदस्य निर्वाचित हुए थे। चुनाव परिणामों के बाद चंदरभान शर्मा को अध्यक्ष चुना गया। लेकिन बोर्ड के भीतर असहमति इतनी गहरी थी कि उन्होंने 28 जुलाई को अपने ही बोर्ड के दो सदस्यों पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 3 अक्टूबर को एक और निर्वाचित सदस्य अनिल जैन ने भी पद छोड़ दिया।
आरोप है कि अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद बोर्ड ने एक ऐसे व्यक्ति को AOA में शामिल किया जो चुनाव ही नहीं लड़ा था, और उसे सीधे अध्यक्ष पद सौंप दिया गया। यह कदम न केवल चुनावी जनादेश के खिलाफ बताया जा रहा है, बल्कि यूपी अपार्टमेंट एक्ट और मॉडल बायलॉज़ की भावना पर भी सवाल खड़े करता है।
सचिव पद पर सबसे बड़ा सवाल
विवाद की सबसे संवेदनशील कड़ी AOA सचिव से जुड़ी है। आरोप है कि वर्तमान सचिव वर्ष 2024-25 में भी सचिव थे और उन्होंने नए बोर्ड को वित्तीय व प्रशासनिक हैंडओवर साझा नहीं किया। इसके अलावा, 21 नवंबर 2025 को उन्होंने अपना फ्लैट H-358 बेच दिया, जिसके बाद वे कानूनी रूप से AOA के सदस्य नहीं रह गए। इसके बावजूद सचिव पद पर बने रहना और निर्णय लेना विवाद को और गहरा करता है।
बोर्ड सदस्यों के तीखे आरोप
बोर्ड के चार सदस्य, अनुज कुमार राठी, संजीव कुमार मलिक, इति सिंघल और निधि शर्मा लगातार डिप्टी रजिस्ट्रार को शिकायतें भेजते रहे। 7 जून, 25 अगस्त, 9 अक्टूबर और 28 अक्टूबर 2025 को शिकायतों के बाद 6 सितंबर को डिप्टी रजिस्ट्रार ने अध्यक्ष और सचिव को नोटिस जारी किया। 11 नवंबर को चीफ रजिस्ट्रार के निर्देश भी आए, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई होती नहीं दिखी।
हाल ही में 3 और 9 फरवरी को फिर से शिकायती पत्र देकर यूपी अपार्टमेंट एक्ट, मॉडल बायलॉज़ और रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं: अनुज कुमार राठी
पूर्व एओए अध्यक्ष व वर्तमान बोर्ड सदस्य अनुज कुमार राठी कहते हैं-

“हमने हर मंच पर तथ्यों के साथ शिकायत की है। अध्यक्ष का मनोनयन चुनाव प्रक्रिया को दरकिनार कर किया गया और सचिव ऐसे व्यक्ति हैं जो अब AOA के सदस्य (21 नवंबर को फ्लैट बेच देने के बाद) ही नहीं हैं। नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं, लेकिन रजिस्ट्रार कार्यालय आंख मूंदे बैठा है।”
शिकायतों का ढेर, कार्रवाई शून्य: इति सिंघल
वहीं बोर्ड सदस्या इति सिंघल का कहना है-

“करीब दर्जन भर शिकायतें देने के बावजूद सिर्फ एक नोटिस जारी हुआ, वह भी दिखावे के लिए। प्रशासनिक क्षमता होने के बावजूद डिप्टी रजिस्ट्रार कोई निर्णायक कदम नहीं उठाते। उल्टा हालात ऐसे बना दिए गए हैं कि निवासी आपस में ही उलझते रहें।”
मॉडल बायलॉज़ और अपार्टमेंट एक्ट का हवाला
आरोपों पर AOA सचिव पुनीत गोयल का कहना है कि-

मेरी सदस्यता का विषय बोर्ड की विधिवत बैठक में नियमों के अनुसार निपटाया जा चुका है और सक्षम प्राधिकारी को भी अवगत कराया गया है। मैं वर्तमान में सोसाइटी का वैध अपार्टमेंट ओनर और सदस्य हूँ। यह एक प्रशासनिक विषय था, कोई अनियमितता नहीं। यदि किसी को आपत्ति है तो वैधानिक मंच उपलब्ध हैं। सभी निर्णय बोर्ड और GBM की लोकतांत्रिक प्रक्रिया से लिए गए हैं।
कटघरे में रजिस्ट्रार कार्यालय
इस पूरे प्रकरण में सबसे कठोर सवाल डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय की भूमिका पर उठ रहे हैं। आरोप है कि शिकायतों पर समयबद्ध और निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय ऐसी नीति अपनाई जा रही है, जिससे निवासी आपस में ही आमने-सामने खड़े हो जाएं और प्रशासनिक जिम्मेदारी से बचा जा सके। इस विषय पर डिप्टी रजिस्ट्रार से बात करने के लिए कई बार कॉल लगाया परन्तु उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
