अलंकार अग्निहोत्री का बड़ा सियासी दांव, “सनातनी पार्टी” बनाने का ऐलान!
क्या यूपी में उभरेगा नया ध्रुवीकरण ?
निर्वाचन आयोग में जल्द होगा आवेदन
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
वृंदावन। उत्तर प्रदेश की नौकरशाही से निकला एक नाम अब सीधे सियासत के मैदान में उतरने जा रहा है। बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नई राजनीतिक पार्टी बनाने की औपचारिक घोषणा कर दी है। यह ऐलान ऐसे समय में आया है जब उनका इस्तीफा अब तक स्वीकार नहीं हुआ है और वे निलंबन व विभागीय जांच का सामना कर रहे हैं।
विजय एकादशी पर वृंदावन से ऐलान
शुक्रवार विजय एकादशी के दिन वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के बाद अग्निहोत्री ने कहा कि “सनातनी समाज” को अब एक अलग राजनीतिक विकल्प की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि समाज के भीतर लंबे समय से इस विचार पर चर्चा चल रही थी और अब इसे राजनीतिक रूप देने का समय आ गया है।
“सनातनी पहचान” बनेगी सियासी आधार
अग्निहोत्री ने साफ कहा कि जिस तरह उत्तर प्रदेश में सामाजिक आधार वाली पार्टियाँ सक्रिय हैं, उसी तरह अब “सनातनी पहचान” के साथ नई पार्टी काम करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी गठबंधन भी कर सकती है और यदि ज़रूरत पड़ी तो अकेले चुनाव भी लड़ेगी। अग्निहोत्री के अनुसार नई पार्टी के लिए जल्द ही भारत निर्वाचन आयोग में पंजीकरण के लिए आवेदन किया जाएगा।
इस्तीफा, निलंबन और जांच
बीते महीने उन्होंने यूजीसी एक्ट समेत कई मुद्दों पर विरोध दर्ज कराते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था। हालांकि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ, उन्हें सस्पेंड किया गया तथा उनपर विभागीय जांच बैठा दी गई। यानी प्रशासनिक विवाद के बीच सियासी एंट्री, यह अपने आप में असाधारण घटनाक्रम है।

असंतोष या नई राजनीति ?
राजनीतिक पंडित इसे तीन नजरियों से देख रहे हैं। पहला व्यवस्था से असहमति का सार्वजनिक प्रदर्शन, दूसरा धार्मिक पहचान आधारित राजनीति का विस्तार और तीसरा उत्तर प्रदेश में नए सामाजिक ध्रुवीकरण की कोशिश। उत्तर प्रदेश पहले से ही जातीय और सामाजिक समीकरणों की राजनीति का केंद्र रहा है। ऐसे में “सनातनी पार्टी” का दावा क्या नया वोट बैंक गढ़ पाएगा, या यह पहले से मौजूद बड़े दलों के एजेंडे से टकराएगा ?
नई पार्टी का गठन आसान नहीं होगा। इसके लिए उन्हें संगठन खड़ा करना होगा, कार्यकर्ता जोड़ना होगा, संसाधन जुटाना होगा और वैचारिक एजेंडा स्पष्ट करना होगा। इसके साथ-साथ सेवा नियमों और चल रही जांच की प्रक्रिया भी उनके राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर सकती है।
बरेली की प्रशासनिक कुर्सी से उठकर सियासी मंच तक पहुंचने की यह कहानी अब तेजी से आगे बढ़ रही है। क्या अलंकार अग्निहोत्री उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया अध्याय लिख पाएंगे ? या यह घोषणा एक प्रतीकात्मक राजनीतिक प्रयोग बनकर रह जाएगी ? इन सवालों का जवाब तो आने वाला वक़्त ही देगा।
फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई हलचल शुरू हो चुकी है।
