February 15, 2026

अधूरी रह गई एक उजली कहानी: 42 की उम्र में थम गई नीरज शर्मा की धड़कन!

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न्यायिक, प्रशासनिक, सामाजिक और राजनीतिक जगत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

दादरी। गौतमबुद्ध नगर ने शनिवार शाम एक ऐसी खबर सुनी, जिसने पूरे जिले को स्तब्ध कर दिया। जिले के शासकीय अधिवक्ता (सिविल) नीरज शर्मा अब हमारे बीच नहीं रहे। महज 42 वर्ष की आयु में उनका आकस्मिक निधन न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे विधि समुदाय और जनपद के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

शनिवार शाम करीब पाँच बजे उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट आया। परिजन तत्काल उन्हें नजदीक के मोहन स्वरूप हॉस्पिटल लेकर पहुँचे। वहाँ से स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें ग्रेटर नोएडा स्थित कैलाश अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह खबर जैसे ही फैली, पूरे जनपद में शोक की लहर दौड़ गई।

रविवार सुबह 10 बजे बिसहड़ा रोड स्थित श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में जनपद के न्यायिक, प्रशासनिक और राजनीतिक जगत की अनेक हस्तियाँ मौजूद रहीं। जिला जज, सांसद डॉ. महेश शर्मा, एमएलसी श्रीचंद शर्मा, जिलाधिकारी मेधा रूपम, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज भाटी और नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष गीता पंडित सहित हजारों नागरिकों ने नम आँखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। हर चेहरे पर अविश्वास और पीड़ा साफ झलक रही थी।

यूपी के उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक के साथ नीरज (फाइल फोटो)

नीरज शर्मा केवल एक अधिवक्ता नहीं थे, वे एक सहज, मृदुभाषी और संवेदनशील इंसान थे। चार भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। अपने पीछे वे माता-पिता, तीन भाइयों, पत्नी और तीन मासूम बच्चों, 14 और 12 वर्ष की दो बेटियों तथा पाँच वर्षीय पुत्र को छोड़ गए हैं। इतनी कम उम्र में बच्चों के सिर से पिता का साया उठ जाना किसी भी संवेदनशील मन को विचलित कर देने वाला है।

भाजपा जिलाध्यक्ष एवं बाल-सखा अभिषेक शर्मा के साथ नीरज (फाइल फोटो)

उन्होंने अपना सार्वजनिक जीवन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बैनर तले शुरू किया और बाद में भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता बने। वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद शासन ने उनके कार्य और निष्ठा को देखते हुए उन्हें नोएडा जिले का सिविल शासकीय अधिवक्ता नियुक्त किया। अपने कर्तव्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और सादगी ने उन्हें सबका प्रिय बना दिया था।

लेखक के लिए यह क्षति व्यक्तिगत है। नीरज केवल एक अधिकारी या राजनीतिक कार्यकर्ता नहीं थे, वे छोटे भाई जैसे थे। हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने वाले, हर कठिन समय में हिम्मत बंधाने वाले, मुस्कुराकर तनाव कम कर देने वाले। उनका यूँ अचानक चले जाना भीतर तक तोड़ देने वाला है। विश्वास करना कठिन है कि अब वह सहज मुस्कान, वह विनम्र आवाज और वह आत्मीय स्पर्श केवल स्मृतियों में ही रह जाएगा।

आज गौतमबुद्ध नगर शोक में डूबा है। अदालतों के गलियारों में सन्नाटा है, राजनीतिक दफ्तरों में चुप्पी है और परिचितों के घरों में आंसू। पर सबसे बड़ा खालीपन उस घर में है जहाँ तीन मासूम बच्चे अपने पिता की राह देख रहे हैं।

नीरज शर्मा का जीवन भले ही छोटा रहा, लेकिन उन्होंने अपने व्यवहार, कर्मनिष्ठा और सरलता से जो छाप छोड़ी है, वह हमेशा जीवित रहेगी। जनपद उन्हें एक ईमानदार अधिवक्ता और सज्जन नागरिक के रूप में याद रखेगा, और अपने करीबियों के दिलों में वे हमेशा एक स्नेही छोटे भाई की तरह बसते रहेंगे।

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