ग्रेटर नोएडा सेक्टर-36: बेसमेंट से थाने तक, धर्मांतरण के आरोपों में घिरी प्रार्थना सभा!
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प्रशासन का दावा
हर पहलू की निष्पक्ष जांच होगी
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
ग्रेटर नोएडा। रविवार की दोपहर सेक्टर-36 के बीटा-2 की गलियों में सामान्य दिनों जैसा सन्नाटा नहीं था। पुलिस की गाड़ियाँ, भीड़ की फुसफुसाहट और मोबाइल कैमरों के बीच हर कोई अचरज में था कि यह सब इतने सालों से चल रहा था, और किसी को भनक तक नहीं लगी!
मकान संख्या बी-224 बाहर से एक आम रिहायशी घर लगता है। तीन मंज़िला इमारत, गेट पर ताला, आसपास खड़ी कारें, कुछ भी असामान्य नहीं। लेकिन इसी घर के बेसमेंट में रविवार को जो हुआ, उसने पूरे इलाके को सुर्खियों में ला दिया।

बेसमेंट के भीतर क्या दिखा ?
पुलिस और स्थानीय लोगों के अनुसार, बेसमेंट में कुर्सियाँ करीने से लगी थीं। सामने एक मेज़, धार्मिक पुस्तकें, बाइबिल और प्रचार सामग्री रखी हुई थी। करीब 40 से 50 लोग मौजूद थे, जिनमें महिलाएं, बुज़ुर्ग और कुछ युवा भी शामिल थे।
एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,
“हर रविवार यहां भीड़ होती थी। हम सोचते थे कि कोई सत्संग या प्रार्थना सभा होगी। लेकिन इतनी किताबें और बाहर से आए लोग देखकर शक होता था।”
हंगामे की शुरुआत कैसे हुई ?
प्राप्त जानकारी के अनुसार दोपहर करीब 1 बजे हिंदू संगठनों से जुड़े कुछ लोगों को सूचना मिली कि यहां कथित तौर पर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। इसके बाद हिंदू युवा वाहिनी और बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। देखते ही देखते बहस तेज हो गई। नारेबाज़ी शुरू हुई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। किसी ने पुलिस को फोन कर दिया। पुलिस की गाड़ी पहुंचते ही बेसमेंट में मौजूद कुछ लोग बाहर निकलने लगे, कुछ भागने की कोशिश में थे।
चार हिरासत में, बाकी पूछताछ के दायरे में
पुलिस ने मौके से दो महिलाओं और दो पुरुषों को हिरासत में लिया। इनमें एक स्थानीय निवासी और एक राजस्थान से जुड़ा व्यक्ति बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।
एसीपी अरविंद कुमार ने मौके पर बताया-
हिंदू युवा वाहिनी के जिला अध्यक्ष चैनपाल प्रधान से सूचना मिली थी कि सेक्टर-36 में कथित तौर पर धर्मांतरण की गतिविधियाँ चल रही हैं। इसके बाद बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ता, अन्य हिंदू संगठन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे।
मौके पर बड़ी संख्या में लोग और धार्मिक पुस्तकें पाई गईं। आरोप है कि लोगों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था। सूचना पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया।
मोहल्ले में डर और सवाल
घटना के बाद सेक्टर-36 में रहने वाले लोग घरों के बाहर खड़े होकर चर्चा करते दिखे।
एक महिला निवासी कहती हैं-
“अगर कुछ गलत हो रहा था तो प्रशासन को पहले पता क्यों नहीं चला ? और अगर सब कानूनी था, तो इतना हंगामा क्यों हुआ ?”
कुछ लोग इसे सुरक्षा से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ सामाजिक सौहार्द पर असर की चिंता जता रहे हैं।
प्रशासन के सामने चुनौती
ग्राउंड पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह गतिविधि प्रलोभन या दबाव के तहत थी ? क्या यह निजी धार्मिक सभा थी या संगठित धर्मांतरण ? और सबसे अहम, क्या ऐसे मामलों में समय रहते प्रशासन की निगरानी पर्याप्त है ?
फ़िलहाल इलाके में शांति है, लेकिन भरोसा डगमगाया हुआ है। सेक्टर-36 अब सिर्फ एक रिहायशी इलाका नहीं, बल्कि धर्म, कानून और सामाजिक संतुलन की बहस का केंद्र बन चुका है। जांच आगे बढ़ेगी, बयान दर्ज होंगे, कानूनी पहलू तय होंगे, लेकिन ग्राउंड पर अभी भी लोग यही पूछ रहे हैं-
जो दिख रहा था, वही सच था या सच कुछ और है ?
