जयपुरिया सनराइज ग्रीन्स में फंसे हज़ारों सपने, GDA की तहरीर पर बिल्डर के खिलाफ FIR की तैयारी!!

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नियम उल्लंघन के आरोप

वेव सिटी थाने में जांच जारी

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद। दिल्ली से सटे गाजियाबाद में NH-24 पर विकसित की गई जयपुरिया सनराइज ग्रीन्स इंटीग्रेटेड टाउनशिप कभी “आधुनिक जीवन” और “विश्वस्तरीय सुविधाओं” का प्रतीक बताई गई थी। इसी टाउनशिप के भीतर रुचिरा सफायर, दिव्यांश ऑनिक्स, गोल्डन गेट, ऐरोकॉन रेनबो जैसे कई ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स स्थापित किए गए, जिनमें हज़ारों मध्यमवर्गीय परिवारों ने जीवन भर की कमाई लगाकर अपने सपनों का घर खरीदा।

डेवलपर्स और जयपुरिया ग्रुप ने होम बायर्स को सुनहरे सपने दिखाए, चौड़ी सड़कें, सीवरेज सिस्टम, हरियाली, सुरक्षा और बेहतर कनेक्टिविटी। लोगों ने भरोसा किया, बैंक लोन लिए, रजिस्ट्रियां कराईं। लेकिन अब, जब उस भरोसे पर खरा उतरने का समय आया, तो डेवलपर्स से लेकर जयपुरिया तक सबने जिम्मेदारी से किनारा कर लिया है। जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक टाउनशिप में अभी कम से कम आठ टॉवर और आने बाकी हैं। 

सोसाइटियों के मैन गेट पर इक्कठा लावारिस पशु

टाउनशिप में घुसते ही टूट जाता है भ्रम

जयपुरिया सनराइज ग्रीन्स में प्रवेश करते ही ऐसा महसूस होता है मानो कोई एनसीआर नहीं बल्कि किसी दूर-दराज़, अविकसित इलाके में आ गया हो। संकीर्ण और अतिक्रमित रास्ते, सड़कों पर बहता सीवर का दूषित पानी, उससे उठती असहनीय बदबू, लावारिस पशुओं और आवारा कुत्तों का डर, यही आज इस कथित इंटीग्रेटेड टाउनशिप की पहचान बन चुकी है। सीवर के पानी को खुले में छोड़ा जा रहा है, आरोप है कि फायर के उपकरण भी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। 

डेवलपर्स बनाम जयपुरिया: जिम्मेदारी की पिंग-पोंग

निवासी जब अपने-अपने प्रोजेक्ट डेवलपर्स से सवाल करते हैं, तो जवाब मिलता है “यह जयपुरिया की जिम्मेदारी है।” जयपुरिया के निदेशक/मालिक आम नागरिकों की पहुँच से वर्षों से बाहर हैं, तो फिर नौकरी-पेशा और टैक्स तथा इन्सटॉलमेंट भरने वाला इंसाफ़ माँगे तो किससे ?

प्राधिकरण का रवैया: पीड़ित को ही दोषी ठहराना

जब पीड़ित होम बायर्स गाजियाबाद विकास प्राधिकरण का दरवाज़ा खटखटाते हैं, तो कई बार उन्हें ही यह कहकर लौटा दिया जाता है कि-

“आपने यहाँ घर लेने से पहले जाँच क्यों नहीं की ?”

जब किसी प्रोजेक्ट की रजिस्ट्री हो रही हो, बैंक लोन स्वीकृत कर रहे हों और प्राधिकरण की ओर से न कोई नोटिस, न कोई सार्वजनिक चेतावनी जारी की गई हो, तो आम नागरिक के लिए इससे बड़ा भरोसे का प्रमाण और क्या हो सकता है ?

सोसाइटियों के मैन गेट पर बहता सीवर का गन्दा पानी

STP वर्किंग नहीं… और फंस गए हजारों परिवार 

अब जाकर होम बायर्स को पता चल रहा है कि न तो एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) के इंटीग्रेशन की व्यवस्था नहीं की गई है और न ही सीवर जल निकासी का स्थायी समाधान। कमजोर, घटिया तथा कम क्षमता वाली पाइपलाइन बार-बार फट जाती हैं, जिससे गंदा पानी पूरे परिसर में फैल जाता है और स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है। सभी टावर्स से निकलने वाला सीवर का दूषित पानी टाउनशिप में खुदे एक बेसमेंट में इक्कट्ठा हो रहा है। यह बेसमेंट जिसे स्थानीय निवासी मौत का कुंड भी कहते हैं, GDA और पुलिस प्रशासन की खुली चुगली कर रहा है। 

टाउनशिप में बना मौत का कुंड, जिसमें जमा होता है सीवर का पानी

अब प्रशासन हरकत में, बिल्डर पर मुकदमे की तैयारी

मामले में नया मोड़ तब आया जब गाजियाबाद विकास प्राधिकरण जोन-5 के सहायक अभियंता (ए.ई.) ने बताया कि GDA द्वारा जयपुरिया सनराइज ग्रीन्स के बिल्डर के खिलाफ नियमों के उल्लंघन को लेकर मुकदमा दर्ज कराने हेतु थाना वेव सिटी में एक लिखित तहरीर दी गई है।

इस तहरीर में टाउनशिप में विकास कार्यों में गंभीर अनियमितताओं और निर्धारित मानकों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। 

वहीं वेव सिटी थाना प्रभारी ने पुष्टि करते हुए बताया कि

GDA द्वारा दी गई लिखित शिकायत प्राप्त हो चुकी है। मामले की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।”

हालांकि, होम बायर्स का कहना है कि सवाल सिर्फ मुकदमा दर्ज होने का नहीं, बल्कि यह भी है कि एक दशक तक ये उल्लंघन होते कैसे रहे और उस दौरान निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी।

दिव्यांश ऑनिक्स निवासी रवि साहू कहते हैं-

रवि साहू

“अगर नियमों का उल्लंघन था तो कार्रवाई आज से दस साल पहले क्यों नहीं हुई ? अब मुकदमे की बात हो रही है, लेकिन हमने जो मानसिक और आर्थिक नुकसान झेला है उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ?”

रुचिरा सफायर की नीरू चोपड़ा  का कहना है-

नीरू चोपड़ा

“हम सिर्फ कार्रवाई की खबर नहीं, ज़मीन पर सुधार चाहते हैं। सीवर, सड़क और सुरक्षा, यह कोई लग्ज़री नहीं, हमारा अधिकार है।”

जयपुरिया सनराइज ग्रीन्स का मामला प्रशासनिक लापरवाही, डेवलपर की मनमानी और जवाबदेही के अभाव का प्रतीक बन चुका है। जब तक ठोस कारवाई और स्थाई समाधान नहीं हो जाता तब तक यहाँ बसे हज़ारों परिवारों के सपने, बदबूदार सीवर और टूटे भरोसे के बीच ही फंसे रहेंगे।

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