15 फरवरी से यमुना एक्सप्रेसवे पर स्पीड बढ़ी, लेकिन क्या सिस्टम है तैयार ?
165 किलोमीटर की लाइफलाइन
NCR से ताज तक की तेज कनेक्टिविटी
NEWS1UP
संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे पर 15 फरवरी 2026 की रात 12 बजे के बाद फिर से रफ्तार बढ़ने जा रही है। यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (YEIDA) ने सर्दियों में लागू अस्थायी स्पीड लिमिट हटाकर पुराने मानक बहाल करने का फैसला लिया है, अब हल्के वाहन 100 किमी/घंटा और भारी वाहन 80 किमी/घंटा की अधिकतम गति से चल सकेंगे।
लेकिन इस फैसले को सिर्फ “रफ्तार बढ़ी” के नजरिए से देखना अधूरा होगा। बड़ा सवाल यह है कि क्या सुरक्षा ढांचा और ट्रैफिक प्रबंधन भी उसी अनुपात में मजबूत हुआ है ?

कोहरे की पाबंदी से सामान्य व्यवस्था तक
15 दिसंबर 2025 से घने कोहरे के कारण विजिबिलिटी घटने पर हल्के वाहनों की सीमा 75 किमी/घंटा और भारी वाहनों की 60 किमी/घंटा कर दी गई थी। यमुना किनारे होने के कारण इस मार्ग पर सर्दियों में अचानक कोहरा आम बात है। मौसम में सुधार के साथ अब प्राधिकरण ने पुरानी सीमा बहाल कर दी है।
35 हजार वाहन रोज: कैमरे और 2900 चालान
औसतन 35,000 वाहन रोजाना इस एक्सप्रेसवे से गुजरते हैं, जो वीकेंड और त्योहारों में 50,000 तक पहुंच जाते हैं। स्पीड मॉनिटरिंग के लिए पूरे मार्ग पर कैमरे लगे हैं और रोजाना औसतन 2900 चालान कटने की जानकारी सामने आती है। चालान की संख्या कम होना, ऑटोमेटेड स्पीड डिटेक्शन के साथ ड्राइवर अवेयरनेस कैंपेन का चलाया जाना और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम में सुधार अभी भी बड़ा मुद्दा है।
6-लेन एक्सप्रेसवे, लेकिन चुनौती 8-लेन की ट्रैफिक
यह एक्सेस-कंट्रोल्ड 6-लेन (भविष्य में 8-लेन तक विस्तारित) कॉरिडोर ग्रेटर नोएडा के परी चौक से आगरा के कुबेरपुर तक जुड़ता है। इसे पुराने दिल्ली-आगरा हाईवे पर दबाव कम करने, पर्यटन और औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से बनाया गया था।
गति की नै बहाली से आगरा और मथुरा के पर्यटन सेक्टर को फायदा होगा, दिल्ली-एनसीआर से वीकेंड ट्रैफिक में बढ़ोत्तरी होगी और लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक ट्रांसपोर्ट की समय-लागत में कमी आएगी।
सुरक्षा बनाम रफ्तार: संतुलन की परीक्षा
तेज रफ्तार से सफर का समय घटेगा, लेकिन एक्सप्रेसवे का इतिहास बताता है कि ओवरस्पीडिंग और अचानक मौसम बदलाव दुर्घटनाओं की बड़ी वजह रहे हैं। एक्सपर्टस के अनुसार बदलते मौसम में डायनेमिक स्पीड डिस्प्ले बोर्ड, रियल-टाइम वेदर अलर्ट मैसेज, ड्राइवरों के लिए अनिवार्य सेफ्टी एडवाइजरी SMS तथा इमरजेंसी लेन की सख्त निगरानी जैसे महत्वपूर्ण एहतियात बरते जाने चाहिएं।
रफ्तार लौट आई, जिम्मेदारी भी बढ़ी
स्पीड लिमिट बहाल होना यात्रियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए राहत की खबर है। लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या सड़क सुरक्षा के मानक भी उतनी ही मजबूती से लागू हैं। यात्रियों से अपील है कि 100 किमी/घंटा “अधिकतम सीमा” है, लक्ष्य नहीं। मौसम, ट्रैफिक और सड़क की स्थिति को देखते हुए सुरक्षित गति ही सबसे बेहतर विकल्प है।
सुरक्षित यात्रा करें, सतर्क रहें
यही असली स्मार्ट ड्राइविंग है।
