लक्जुरिया एस्टेट में ‘ढाई करोड़’ का पेंट वर्क विवाद! निवासियों ने मांगी स्वतंत्र जांच!
एओए बोर्ड पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
ऑडिट बैलेंस शीट पर उठे बड़े सवाल!
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एओए/आरडब्लूए डेस्क
गाजियाबाद। आदित्य वर्ल्ड सिटी स्थित लक्जुरिया एस्टेट सोसाइटी में एओए पदाधिकारियों पर लगे वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच अब पेंट कार्य को लेकर भी विवाद गहराता दिख रहा है। निवासियों का कहना है कि वर्ष 2024-25 की ऑडिटेड रिपोर्ट सार्वजनिक न करना और बड़े वर्क ऑर्डर जारी करना कई सवाल खड़े करता है।
ऑडिट रिपोर्ट पर पारदर्शिता की मांग
निवासियों के अनुसार, ऑडिटेड बैलेंस शीट बार-बार मांगने के बावजूद साझा नहीं की गई। शिकायत पत्र में खातों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सोसाइटी के फंड का उपयोग नियमानुसार हुआ या नहीं।
ढाई करोड़ के कार्य और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल
रेसिडेंट्स के मुताबिक सोसाइटी में पेंटिंग, सीपेज और बेसमेंट लीकेज से जुड़े कार्यों के लिए लगभग ढाई करोड़ रुपये का वर्क ऑर्डर जारी किए जाने या प्रक्रिया में होने की बात सामने आई है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और जीबीएम की पूर्व सहमति भी नहीं ली गई।
निवासियों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि जुटाने के लिए फ्लैट मालिकों पर आर्थिक दबाव डाला जा रहा है, जबकि यह स्पष्ट नहीं है कि सभी सदस्य इतनी भारी रकम वहन करने की स्थिति में हैं या नहीं।
पेंट वर्क: सोसाइटी विवादों की जड़ ?

हाई राइज सोसाइटियों में पेंट कार्य अक्सर सबसे बड़े विवाद का कारण बनता रहा है। कई मामलों में यह पाया गया है कि हैंडओवर के समय बाहरी पेंट और संरचनात्मक रखरखाव बिल्डर के दायित्व में शामिल होता है। किंतु आरोप यह भी लगते रहे हैं कि सुनियोजित तरीके से इन कार्यों को बाद में सोसाइटी के खाते में डाल दिया जाता है।
चूंकि पेंट कार्य में लाखों से लेकर बड़ी सोसाइटियों में करोड़ों रुपये तक खर्च होते हैं, इसलिए पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रक्रिया की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रारंभिक हैंडओवर शर्तों और बिल्डर-एओए के बीच हुए समझौतों की स्पष्ट समीक्षा न हो तो भविष्य में ऐसे विवाद जन्म लेते हैं।
अध्यक्ष के इस्तीफे से बढ़ी हलचल
विवाद के बीच बोर्ड अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा के इस्तीफे की सूचना ने भी चर्चा को तेज कर दिया। शर्मा के अनुसार उन्होंने 11 नवंबर 2025 को अपना इस्तीफा बोर्ड को सौंप दिया था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। बाद में 14 फरवरी को पुनः इस्तीफा दिया गया, जिसे एओए कमेटी द्वारा स्वीकार कर लिया गया और अब वे कार्यकारिणी सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी जांच में वह पूरा सहयोग देंगे। हालाँकि बोर्ड द्वारा उनके इस्तीफे की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, ऐसा सोसयटीवासियों का कहना है।
शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री कार्यालय, रजिस्ट्रार मुख्यालय, जिलाधिकारी और जीडीए उपाध्यक्ष को भेजी गई है। अब देखना होगा कि प्रशासनिक स्तर पर क्या कार्रवाई होती है।
