ग्रेटर नोएडा: 100% सीवर लाइन का दावा, लेकिन सड़क पर बह रहा गंदा पानी!
सूरजपुर की एचडीएफसी बैंक वाली गली में बदहाल हालात ने खोली विकास के दावों की पोल
NEWS1UP
संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। सूरजपुर क्षेत्र की एचडीएफसी बैंक वाली गली इन दिनों गंभीर सीवर संकट से जूझ रही है। एक ओर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण गांवों और शहरी क्षेत्रों में 100 प्रतिशत सीवर लाइन चालू होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की सच्चाई पर सवाल खड़े कर रही है। गली में खुलेआम बहता सीवर का गंदा पानी न केवल बदबू फैला रहा है, बल्कि स्वास्थ्य संकट को भी न्योता दे रहा है।
शिकायतें दर्ज, सबूत सौंपे, फिर भी कार्रवाई शून्य
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें कीं। फोटो और वीडियो साक्ष्य भी अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि हर बार आश्वासन दिया जाता है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
गली में फैला गंदा पानी मच्छरों के पनपने का बड़ा कारण बन चुका है। डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। आसपास के दुकानदारों और राहगीरों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बारिश में बन जाती है ‘गंदे पानी की झील’
बरसात के मौसम में हालात और भयावह हो जाते हैं। सड़कें जलमग्न हो जाती हैं और सीवर का पानी घरों के आसपास तक पहुंच जाता है। बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार फिसलकर गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
सिर्फ असुविधा नहीं, सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा
पर्यावरणविद प्रदीप डाहलिया के अनुसार, यह समस्या केवल सफाई व्यवस्था की कमी नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। खुले में बहता सीवर जल भू-जल को प्रदूषित कर सकता है, जिससे भविष्य में बड़े स्वास्थ्य संकट की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो यह स्थिति महामारी का रूप भी ले सकती है।
प्राधिकरण से चार बड़ी मांगें
निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्राधिकरण से मांग की है कि गली का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए, सीवर लाइन की वास्तविक स्थिति की सार्वजनिक रिपोर्ट जारी की जाए और दोषी ठेकेदारों व अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो जनहित में उच्च अधिकारियों और सक्षम न्यायिक मंचों का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
