साल का पहला वलयाकार सूर्य ग्रहण आज, जानें भारत में समय और सूतक काल!
नोएडा में दोपहर 03:26 से शाम 07:57 तक
गाजियाबाद में दोपहर 03:26 से 07:57 तक
NEWS1UP
धर्म-कर्म डेस्क
साल 2026 का पहला ग्रहण आज,17 फरवरी को लगने जा रहा है। यह एक वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढक लेता है और सूर्य का बाहरी किनारा अग्नि-वलय (Ring of Fire) की तरह दिखाई देता है। खगोलविदों के अनुसार यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, जाम्बिया, नामीबिया, मॉरीशस, चिली और अर्जेंटीना समेत दक्षिणी गोलार्ध के कई हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। धार्मिक दृष्टि से सूतक काल का पालन किया जाएगा और वैज्ञानिक दृष्टि से यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना होगी। भारत में यह ग्रहण आंशिक रूप से देखा जा सकेगा।
भारत में सूर्य ग्रहण का समय
पंचांग के अनुसार को सूर्य ग्रहण की शुरुआत आज दोपहर 3 बजकर 26 मिनट पर होगी और इसका समापन शाम 7 बजकर 57 मिनट पर होगा। हालांकि देश के अलग-अलग शहरों में ग्रहण का प्रभाव लगभग समान समय पर रहेगा।
प्रमुख शहरों में ग्रहण का समय
नई दिल्ली – 03:26 PM से 07:57 PM
मुंबई – 03:26 PM से 07:57 PM
कोलकाता – 03:26 PM से 07:57 PM
नोएडा – 03:26 PM से 07:57 PM
बेंगलुरु – 03:26 PM से 07:57 PM
लखनऊ – 03:26 PM से 07:57 PM
पटना – 03:26 PM से 07:57 PM
अहमदाबाद – 03:26 PM से 07:57 PM
जयपुर – 03:26 PM से 07:57 PM
पुणे – 03:26 PM से 07:57 PM
कानपुर – 03:26 PM से 07:57 PM
नागपुर – 03:26 PM से 07:57 PM
चेन्नई – 03:26 PM से 07:57 PM
हैदराबाद – 03:26 PM से 07:57 PM
गाजियाबाद – 03:26 PM से 07:57 PM
लुधियाना – 03:26 PM से 07:57 PM
चंडीगढ़ – 03:26 PM से 07:57 PM
जम्मू-कश्मीर – 03:26 PM से 07:57 PM
वाराणसी – 03:26 PM से 07:57 PM
गुरुग्राम – 03:26 PM से 07:57 PM
गोरखपुर – 03:26 PM से 07:57 PM
देहरादून – 03:26 PM से 07:57 PM
कोटा – 03:26 PM से 07:57 PM
बरेली – 03:26 PM से 07:57 PM

सूतक काल कब से ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस ग्रहण का सूतक 17 फरवरी की सुबह 3 बजकर 26 मिनट से प्रारंभ माना जाएगा। सूतक काल के दौरान किसी भी प्रकार के शुभ एवं मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और देव आराधना से परहेज किया जाता है। और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
क्या रखें सावधानियां ?
सूर्य ग्रहण को कभी भी नंगी आंखों से न देखें
प्रमाणित सोलर फिल्टर या विशेष ग्रहण चश्मे का उपयोग करें
टेलीस्कोप या कैमरे में भी विशेष फिल्टर लगाना आवश्यक है
खगोलीय महत्व
वलयाकार सूर्य ग्रहण तब बनता है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर होता है और वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता। इससे सूर्य का बाहरी भाग चमकते हुए वलय के रूप में दिखाई देता है। यह खगोलीय आयोजन विज्ञान और आस्था, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
