February 20, 2026

नोएडा में ‘लिफ्ट अलर्ट’: बिना रजिस्ट्रेशन चल रही लिफ्टों पर कसेगा शिकंजा!

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यूपी लिफ्ट एवं एस्केलेटर अधिनियम-2024 के तहत सख्ती तेज

मनमानी फीस वसूली पर भी प्रशासन की नजर

NEWS1UP

संवाददाता

नोएडा। तेजी से ऊंची इमारतों में तब्दील हो रहे ग्रेटर नोएडा/ग्रेटर नोएडा में अब लिफ्ट सुरक्षा को लेकर बड़ा प्रशासनिक अभियान शुरू हो गया है। गौतम बुद्ध नगर जिला प्रशासन ने आवासीय सोसायटियों, अस्पतालों, स्कूलों, होटलों और व्यावसायिक-औद्योगिक भवनों में लगी सभी लिफ्टों का अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित कराने के लिए विशेष ड्राइव छेड़ दी है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश लिफ्ट और एस्केलेटर अधिनियम, 2024 के तहत की जा रही है।

सुरक्षा बनाम सुविधा

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, जिले में तेजी से बढ़ती हाईराइज इमारतों के बीच लिफ्ट से जुड़ी दुर्घटनाओं और शिकायतों ने निगरानी व्यवस्था को सख्त करने की जरूरत पैदा की है। अधिनियम-2024 का उद्देश्य लिफ्ट और एस्केलेटर की स्थापना, संचालन, रखरखाव और सुरक्षा मानकों को व्यवस्थित करना है ताकि दुर्घटनाओं की आशंका कम हो और जवाबदेही तय हो सके।

File photo

डीएम की सख्त चेतावनी: दो दिन में दें पूरी जानकारी

बीते मंगलवार को समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी मेधा रूपम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले में स्थापित सभी लिफ्टों को पंजीकरण के दायरे में लाया जाए। उन्होंने लिफ्ट निर्माण कंपनियों और अधिकृत सर्विस प्रोवाइडर्स को दो दिन के भीतर जिले में लगी सभी लिफ्टों की विस्तृत सूची डीएम कार्यालय और सहायक निदेशक (विद्युत सुरक्षा) कार्यालय को सौंपने के निर्देश दिए।

डीएम ने कहा कि कंपनियां सोसायटी प्रबंधन, अस्पतालों, स्कूलों और अन्य प्रतिष्ठानों को पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कराने के लिए सक्रिय रूप से प्रेरित करें। जिन संस्थानों ने अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है या आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए हैं, उनकी सूचना प्रशासन को दी जाएगी।

एएमसी और फीस पर भी नजर

समीक्षा बैठक में कुछ लिफ्ट कंपनियों द्वारा अत्यधिक पंजीकरण शुल्क और एएमसी (वार्षिक रखरखाव अनुबंध) शुल्क वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आईं। इस पर डीएम ने सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि सभी शुल्क केवल निर्धारित नियमों के अनुसार ही वसूले जाएं। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर अधिनियम-2024 के तहत कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, सत्यापन प्रक्रिया के दौरान रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र और एएमसी विवरणों की जांच संबंधित संस्थानों से संपर्क कर की जाएगी। जो संस्थान नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए रिपोर्ट जिला प्रशासन और विद्युत सुरक्षा विभाग को भेजी जाएगी।

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