गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार ने डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय को गाजियाबाद से नोएडा स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वर्तमान में यह कार्यालय मेरठ रोड स्थित गुलधर मेट्रो स्टेशन के पास संचालित हो रहा है। शासन के आदेश के बाद अब इसका आधिकारिक पता गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में दर्ज होगा, हालांकि मूल आदेश की अन्य शर्तें यथावत रहेंगी।
राज्य सरकार के विशेष सचिव शिवा सिंह द्वारा जारी आदेश में रजिस्ट्रार को राज्यपाल की स्वीकृति से अवगत कराया गया है। डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय समितियों, पार्टनरशिप फर्मों और चिट निधियों के पंजीकरण, प्रशासन और विनियमन का दायित्व निभाता है। साथ ही आरडब्ल्यूए और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) के गठन व संचालन से जुड़े मामलों का भी निस्तारण करता है।
एक पद, दो जिले, और बढ़ती जटिलताएं
वर्ष 2023 में गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर के लिए एक ही डिप्टी रजिस्ट्रार का पद सृजित किया गया था। इससे पहले सोसायटी संबंधी मामलों के लिए आवेदकों को मेरठ जाना पड़ता था। वर्तमान में दोनों जिलों का कार्यभार एक ही अधिकारी संभाल रहे हैं।
डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार ने कहा है कि वे गाजियाबाद में पूर्व की तरह साप्ताहिक बैठक (वीकली सीटिंग) जारी रखेंगे, ताकि स्थानीय आवेदकों और सोसायटी पदाधिकारियों को असुविधा न हो। हालांकि विभागीय पत्राचार और आधिकारिक पता नोएडा स्थानांतरित हो जाएगा।
आंकड़ों की असमानता पर उठे सवाल
कार्यालय सूत्रों के अनुसार, गाजियाबाद जिले में लगभग 10,000 फाइलें लंबित या सक्रिय हैं, जबकि गौतमबुद्ध नगर में यह संख्या करीब 5,000 है। ऐसे में अधिक कार्यभार वाले जिले से कार्यालय हटाने के निर्णय पर सवाल उठ रहे हैं।
गाजियाबाद की सोसायटियों में इस फैसले को लेकर निराशा और असमंजस का माहौल है। एओए और आरडब्लूए पदाधिकारियों का तर्क है कि यदि नोएडा को प्राथमिकता दी जानी थी तो वहाँ एक अतिरिक्त डिप्टी रजिस्ट्रार की नियुक्ति की जा सकती थी, न कि मौजूदा कार्यालय का स्थानांतरण।
फेडरेशन ऑफ़ राजनगर एक्सटेंशन सोसाइटीज के सीनियर सेक्रेटरी अभिनव त्यागी का कहना है कि-
अभिनव त्यागी
“जब गाजियाबाद में फाइलों की संख्या दोगुनी है, तो कार्यालय को यहां से हटाना समझ से परे है। साप्ताहिक बैठक एक अस्थायी समाधान है, स्थायी नहीं। आधिकारिक कार्यों के लिए हमें बार-बार नोएडा जाना पड़ेगा।” सोसाइटीज में जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकतर लोग नौकरी-पेशा होते हैं, ऐसे उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
सामाजिक कार्यकर्त्ता दीपांशु मित्तल कहते हैं कि-
दीपांशु मित्तल
“प्रशासन को कार्यभार के आधार पर निर्णय लेना चाहिए था। यदि दोनों जिलों में काम अधिक है तो अलग-अलग डिप्टी रजिस्ट्रार नियुक्त किए जा सकते थे। गाजियाबाद की 10 हज़ार फाइलें अपने आप में इस जिले की प्राथमिकता साबित करती हैं।”
फेडरेशन ऑफ़ गोल्फ लिंक्स टाउनशिप के अध्यक्ष एसके भटनागर का मानना है कि-
एस के भटनागर
“फाइलों की संख्या सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों से जुड़े मामलों का प्रतिनिधित्व करती है। यदि मुख्यालय नोएडा में होगा तो गाजियाबाद के मामलों की गति प्रभावित हो सकती है।”
प्रशासन की दलील बनाम ज़मीनी हकीकत
प्रशासन का कहना है कि साप्ताहिक बैठक व्यवस्था जारी रहने से गाजियाबाद के आवेदकों को असुविधा नहीं होगी। लेकिन सोसायटी प्रतिनिधियों का मानना है कि आधिकारिक मुख्यालय का स्थानांतरण व्यवहारिक रूप से कई प्रक्रियाओं, जैसे रजिस्ट्रेशन, संशोधन, ऑडिट और विवाद निस्तारण को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल, 10 हज़ार फाइलों वाले गाजियाबाद की सोसायटियां इस फैसले को लेकर परेशानी में हैं और शासन से पुनर्विचार की उम्मीद कर रही हैं।